आम खाने के फायदे और नुकसान Aam Khane Ke Fayde Aur Nuksaan

mango aam khane ke fayde in hindi

आम खाने के फायदे और नुकसान – Mango Benefits – Aam Khane Ke Fayde Aur Nuksaan In Hindi

आम के बारे में सामान्य जानकारी 

इसे शास्त्रों में अमृत फल के नाम से जाना गया है। इसे उगाने के लिए खेतों में गुठली बोकर उगाया जाता है। अपने आप भी यहां-वहां वह वृक्ष लग जाता है। भारत में इसका वृक्ष सर्वत्र पाया जाता है। बीज द्वारा लगाया गया आम बीजू यानी देशी आम कहलाता है, जबकि कलम द्वारा लगाया वृक्ष कलमी आम के नाम से जाना जाता है इसका वृक्ष 30 से 120 फुट तक ऊंचा होता है। पत्ते 4-12 इंच लंबे, 1-3 इंच चौड़े, चिकने, सुगंधित होते हैं। पुष्प छोटे-छोटे, हलके हरे-पीले, लंबी मंजरी में लगते हैं, जिनमें मादक सुगंध होती है। फल अनेक आकार में, कच्चे होने पर हरे और पकने पर पीताभ या रक्ताभ हो जाते हैं। गुठली (बीज) के अंदर गिरी (बीजमज्जा) होती है। बसन्त ऋतु में पुष्प और ग्रीष्म ऋतु में फल लगते हैं। इस वृक्ष के सभी अंग औषधि रूप में प्रयुक्त होते हैं। रंग-रूप, स्वाद, गुण और आकार की दृष्टि से आम की मुख्य किस्में हैं- हाफुस, लंगड़ा, तोतापरी, नीलम, सफेदा, पायरी, गुलाब खास, भूरा, दशहरी,चौसा, फज़ली, अलकासी आदि।

आम के विभिन्न भाषाओं में नाम

  • संस्कृत – आम्र।
  • हिन्दी – आम ।
  • मराठी – आबा ।
  • गुजराती – आम्वी।
  • बंगाली – आम्र।
  • अंग्रेजी – मैंगो (Mango)
  • लेटिन -मैन्गीफेरा इंडिका (Mangifera Indica)

आम के आयुर्वेदिक गुण Mango Ke Ayurvedic Gun

आयुर्वेद के मतानुसार आम का कच्चा फल जिसे कैरी या अमिया भी कहते हैं, गुण में कसैला, खट्टा, रूखा, रुचिकारक, वात, पित्त को पैदा करने वाला, त्रिदोषों को कुपित करने वाला, रक्तविकार उत्पन्न करने वाला होता है, जबकि पका हुआ मीठा आम मधुर, भारी, स्निग्ध, वीर्यवर्धक, बलवर्धक, वातनाशक, त्वचा को सुंदर बनाने वाला, शीतल, हृदय को बल देने वाला, पित्त को न बढ़ाने वाला, कषैले रस वाला तथा कफ़, अग्नि में वृद्धि करने वाला होता है।

यूनानी मतानुसार कच्चा आम स्वाद में खट्टा, दाह, पित्त नाशक, भूख बढ़ाने वाला, पाचक,वमन, मूर्छा, पथरी, पिपासा, रक्तपित और पथरी नाशक होता है, जबकि पका हुआ आम भूख बढ़ाने वाला, कामोद्दीपक, वृक्क और आमाशय को बल देने वाला, कब्ज़ दूर करने वाला होता है।

वैज्ञानिक मतानुसार आम के रासायनिक संगठन का विश्लेषण करने पर ज्ञात होता है कि इसमें जल की मात्रा 86 प्रतिशत, प्रोटीन 0.6 प्रतिशत, वसा 0.4 प्रतिशत, खनिज 0.4 प्रतिशत, कार्बोहाइड्रेट 11.8 प्रतिशत, रेशा 1.1 प्रतिशत, शर्करा (सुक्रोस, ग्लूकोस) आदि रूपों में, टार्टरिक और मैलिक अम्ल, कैल्शियम, फास्फोरस, लोहा, विटामिन ए, बी काम्पलेक्स के घटक, सी भी पाया जाता है। इन सब पोषक तत्वों के कारण ही आम एक पौष्टिक फल बन गया है।

आम खाने के नुकसान / हानिकारक प्रभाव Aam Khane Ke Nuksan in Hindi

खट्टे आम रक्त विकार, नेत्र रोगकारी, मंदाग्नि, मलावरोध, गले में जलन, पेट में गैस, विषम ज्वर, मसूढ़ों के कष्ट, वीर्य में पतलापन लाने जैसे दोष पैदा करता है, अत: इनके सेवन से बचना चाहिए। अधिक मात्रा में पके आम खाने से अधिक दस्त लगना, पेट में मरोड़ उठना,फोड़े-फुसियां उत्पन्न होना, गैस की तकलीफ बढ़ना, भारीपन, पेट दर्द आदि तकलीफें हो सकती हैं। खाली पेट आम का सेवन करना हानिकारक होता है। इन सब दोषों से बचने के लिए हमेशा अच्छे पके आम ही खाना चाहिए। इसके साथ दूध का सेवन करने से अधिकांश दोष दूर हो जाते हैं। अधिक आम खा लेने के दोष को दूर करने के लिए अदरक नमक लगाकर सेवन करें।

विभिन्न रोगों में प्रयोग Aam Khane Ke Fayde / Labh / Benefits In Hindi

1. लू लगना Loo Lagane Par Mango Benefits: कच्चे आम को आग में पकाकर या पानी में उबालकर सेंक लें। फिर पानी में मसलकर छान लें। अब छना हुआ पानी में मिसरी या शक्कर मिलाकर बार-बार सेवन कराएं। इससे लू से उत्पन्न सारे विकार दूर हो जाएंगे।

2. दुर्बलता Weakness Me Mango Khaye: जब तक आम उपलब्ध हो, भोजन के साथ दूध मिले आम के रस में चीनी मिलाकर सेवन करते रहने से दुर्बलता दूर होकर शारीरिक बल, वीर्य बढ़ता है।

3. सूखी खांसी : पके आम को गर्म राख में भून लें। फिर ठंडा करके धीरे-धीरे चूसने से सूखी खांसी दूर हो जाएगी।

4. अनिद्रा Anidra Ka Aam Se ilaj: पके आम चूसकर दूध पीने से नींद अच्छी आती है।

5. भूख न लगना : आम के रस में चीनी और सेंधानमक मिलाकर सेवन करें।

6. रक्ताल्पता, क्षय: एक कप रस के साथ एक कप दूध और एक चम्मच शहद मिलाकर नियमित रूप से सुबह-शाम पीने से इन रोगों में लाभ मिलता है।

7. दांत रोग : गुठली की गिरी पीसकर मंजन की तरह उपयोग करने से न केवल पायरिया,बल्कि दांत के अन्य रोगों और मसूड़ों के रोग भी दूर हो जाते हैं।

8. मिट्टी खाने की आदत : गुठली की गिरी का चूर्ण एक चम्मच की मात्रा में बच्चों को पानी के साथ 2-3 बार खिलाते रहने से कुछ ही दिनों में मिट्टी खाने की आदत छूट जाती है। इसी प्रयोग से पेट के कीड़े भी नष्ट हो जाते हैं।

9. नकसीर (नाक से खून आना) : गुठली की गिरी का रस नाक में टपकाएं।

10. मकड़ी का विष : कच्चे आम के अमचूर को पानी में पीसकर मकड़ी के विष पर लगाने से आराम मिलता है और विष का असर दूर हो जाता है।

11. रक्तस्राव : बवासीर और रक्तप्रदर में अधिक रक्तस्राव होने पर गुठली की गिरी का एक चम्मच चूर्ण दिन में 3 बार पानी से सेवन करें।

12. जलने पर : जले स्थान पर गुठली की गिरी पानी में घिसकर लगाएं।

13. वीर्य स्तम्भक : आम के फूल जिसे मौर या बौर कहते हैं, उन्हें छाया में सुखाकर चूर्ण बना लें और फिर समभाग की मात्रा में पीसी मिसरी मिला लें। एक-एक चम्मच की मात्रा में एक कप दूध के साथ सुबह-शाम नियमित सेवन करते रहने से वीर्य गाढ़ा होता है और स्तम्भन शक्ति बढ़ती है।

14. दस्त लगने पर : गुठली की गिरी, बेल की गिरी और मिसरी बराबर की मात्रा में मिलाकर पीस लें। एक-एक चम्मच की मात्रा में 3 बार सेवन कराएं।

15. हाथ-पैरों की जलन : आम का बौर हाथ-पैरों पर रगड़ें।

loading...

Be the first to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published.


*