चना (Black Gram) के औषधीय गुण एवं घरेलू नुस्खे

black gram gharelu nuskhe in hindi

जलोदर : आधी छटांक (लगभग 25 ग्राम) चनों को कुछ पानी में उबालकर अधौटा कर लें | यह जल गर्म-गर्म लगभग एक माह तक सेवन करने से जलोदर रोग दूर हो जाता है|

उन्माद : रात्रि को भीगी हुई चने की दाल प्रात: पीसकर चीनी व पानी मिलाकर पीने से मस्तिस्क में गर्मी के कारण उत्पन्न उन्माद के लक्षण शांत हो जाते है|

मधुमेह (डायबिटीज) : 25 ग्राम काले चने रात में भिगोकर प्रात: निराहार (खाली पेट) सेवन करने से मधुमेह-व्याधि दूर हो जाती है | यदि समान मात्रा में जौ-चने की रोटी भी दोनों समय खायी जाये तो लाभ शीध्र होगा|

पथरी : मूत्राशय अथवा गुरदे (Kidney) में पथरी हो जाने की स्थिति में रात को भीगी चने की दाल प्रात:काल शहद मिलाकर सेवन करनी चाहिये | ऐसा करने से कुछ हे सप्ताह में पथरी गलकर निकल जाती है|

पुरुषों की नपुंसकता का घरेलू इलाज :

1. भिगोये हुए चने के जल में (चना निकाल लेने के बाद जो जल रह जाये) उसे शहद मिलाकर पीने से किन्ही भी कारणों से उत्पन्न नपुंसकता समाप्त हो जाती है और स्तम्भंग-शक्ति (सेक्स पावर) में आशातीत वृधि हो जाती है|

2. चने के आटे का हलुआ कुछ दिनों तक नियमित रूप से सेवन करना चाहिये | यह हलुवा वात प्रधान श्वास के रोगों में भी लाभकारी है | इस योग के साथ उबालकर ठंडा किया हुआ जल पियें ताकि हलुवा आसानी से पच सके|

वीर्य वर्धक योग : मिट्टी, कांच या चीनी के बर्तन में आवश्यकतानुसार रात को चने भिगोकर रख दे | सुबह-सवेरे उठकर खूब चबा-चबाकर खायें | इसके लगातार सेवन से वीर्य वृधि होती है | तथा अन्य वीर्य सम्बन्धी विकार समाप्त हो जाते है | स्वाद के लिए उसमे बादाम की गिरी या किसमिस भी भिगोयी जा सकती है|

वीर्य पुष्टि कर योग :

1. भीगे हुए चने खाकर ऊपर से दूध पीते रहने से वीर्य का पतलापन दूर हो जाता है|

2. चने की भीगी दाल और शक्कर लगभग 10-10 ग्राम की मात्रा में दोनों मिलाकर 40 दिनों तक खाने से धातु पुष्ट हो जाती है | इस योग के तुरंत बाद पानी नही पीना चाहिये|

जुकाम : गर्म चने रुमाल या किसी साफ़ कपड़े में बांधकर सूंघने से जुकाम ठीक हो जाता है|

बहुमूत्रता : बार-बार थोड़ा – थोड़ा पेशाब जाने की बीमारी में भुने हुए चनों का सेवन करना चाहिये | यदि थोड़ा गुड़ भी खाया जाये तो और भी अच्छा है | वृद्ध व्यक्तियों को इस रोग में चने का प्रयोग लम्बे समय तक करना चाहिये|

बवासीर : गर्म-गर्म भुने चनों को सेवन नियमित रूप से कुछ दिनों तक करते रहने से प्रारम्भिक स्थिति का ‘खूनी बवासीर’ ठीक हो जाता है |

पित्ती निकलना : काली मिर्च को चने के बेसन के लड्डू में मिलाकर खाने से पित्ती में लाभ होता है|

हिचकी, आमाशय विकार : चने के पौधे के सूखे पत्तों को चिल्म में रखकर धूम्रपान करने से शीत के कारण आने वाली हिचकी तथा आमायश की विकृति में लाभ होता है |

पीलिया : चने की दाल लगभग 100 ग्राम को दो गिलास जल में भिगोकर तद्पश्चात दाल पानी में से निकाल कर 100 ग्राम गुड़ मिलाकर 4-5 दिन तक खाये इससे पीलिया में लाभ होगा|

प्रतिश्याम: इसके लिए दिनभर उपवास करने के बाद रात में सोते समय भुने हुए चने खायें, और ऊपर से थोड़ा दूध पी लें | इसके साथ पानी कभी नही पीना चाहिये | यदि इन्ही चनों से पोटली बनाकर गले की सिकाई कर ले तो आराम जल्दी होता है |

बिच्छू का विष : चने के क्षार का लेप दंश स्थान पर करने से बिच्छू के विष का कोप शांत हो जाता है |

सिर का दर्द : 25 ग्राम पीसी हुई राई में 150 ग्राम चने के आटे तथा चने के क्षार में मिलाकर लेप करने से वात जन्य सिर की पीड़ा शांत हो जाती है | पीड़ा दूर होते ही लेप हटाकर सिर को धो लेना चाहिये |

चर्म रोग : चने के आटे की नमक रहित रोटी 40 से 60 दिनों तक खाने से चर्म सम्बन्धी विकार जैसे दाज, खाज, खुजली आदि नही होते और हो रहे हो तो ठीक हो जाते है | किन्तु इस कल्प से पूर्व विरेचनादि करके शरीर शुद्ध कर लेना चाहिये |

कफ विकृति : भुने हुए चने रात्रि काल में सोते समय चबाकर ऊपर से गर्म दूध पीने से श्वास-नली के अनेक रोग कफ-बलगम आदि दूर हो जाते है |

सफ़ेद दाग पड़ना : देसी काले चने 25-30 ग्राम लेकर उनमें 10 ग्राम त्रिफला चूर्ण मिला लें और जल में डुबोकर 12 घंटे के लिये रख दें | तत्पश्चात 12 घंटे के लिये उन्हें किसी साफ़ कपडें में बांधकर रख दे, जिससे वे अंकुरित हो जाये | प्रात: के नास्ते के रूप में इन्हें खूब चबा-चबाकर खायें | इसका सेवन करने से विभिन्न अंगो पर पड़ें सफ़ेद चकते समाप्त हो लगतें है|

नासिका शोध : चने के क्षार को 10 गुना जल में मिलाकर नाक से टपकाना चाहिए |

दंत-शोथ, पित्त ज्वर : चने के कोमल ताजा पत्तो का शाक या भुजिया खाने से ज्वर, पित्त तथा दांतों के शूल में लाभ होता है|

अति स्वेद (अधिक पसीना आना) : ज्वर की स्थिति में अधिक पसीना आने पर भुने हुए चनो को पीसकर अजवाइन तथा बच का चूर्ण मिलाकर मालिश करना चाहिये|

महिला रोगों का घरेलू इलाज:

गर्भावस्था की उल्टी (वमन) : भुने हुए चनों का सत्तू खिलाने से महिलाओं की गर्भ की स्थिति की वमन शांत हो जाती है | किन्तु इसका सेवन ग्रीष्म ऋतु में ही करना चाहिए | क्योंकि सत्तू शीत गुणों वाला होता है|

गर्भपात : गर्भपात की संभावना हो तो महिला को काले चनों का काढ़ा बनाकर पिलाना चाहिये, गर्भ स्थिर बना रहेगा|

प्रदर (ल्यूकोरिया) : भुने हुए चनों में देसी खांड (गुड़) मिलाकर रख लें | इसे 2-3 चम्मच खाकर ऊपर से देसी घी मिश्रित गाय का गर्म दूध पीने से कुछ दिनों बाद ही श्वेत प्रदर (सफेद पानी आना ) बंद हो जाता है|

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11 Comments

  1. sir mujhe mera wajhan ghat gya h or mare hath paro m bahut jyada thakan rahti h aakho k age andari aati h or sir mujhe koi bimari bhi nahi h sir m kya karu tal me

  2. mujhe celiace disease hai mai pichhle 1 year se chane ki roti khata hun aur subah ankurit chana khata hun phir bhi mujhe kabj rahta hai , muhanse aur pimple rahte hain, aue mera weight bhi bahut kaam hai.

  3. aapne sahi kaha hai chana ki takat bejod hai maine to iska pardam bhi dekha hai man gaye jaise ghoda chana khata hai or kabhi thakta nai hai baise hai aadmi jo chana khate hai bo kabhi kamjor nahi hote

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