मधुमेह रोगी सर्दियों में कैसे स्वस्थ रहें

Ayurvedic Medicine For Diabetes In Hindi.

 

Ayurvedic Medicine For Diabetes In Hindi.सर्दियों का मौसम आते ही गर्म, स्वादिष्ट व मीठे पकवान खाने की इच्छा होने लगती है । हमारे देश में हर क्षेत्र के कुछ खास व्यंजन हैं, जो सर्दियों में बहुत पसंद किए जाते हैं । जैसे गजक व तिलपट्टी आदि, परन्तु इन सब व्यंजनों का अधिक सेवन मधुमेह (डाइबिटिज) से ग्रस्त लोगों के लिए हानिकारक हो सकता है | जरूरी यह है कि कुछ ऐसी बातों का ध्यान रखा जाए, जिससे शुगर असामान्य रूप से न बढ़े । तभी मधुमेह से ग्रस्त व्यक्ति भी सर्दी का लुत्फ उठा सकते हैं ।

बात खानपान की

मधुमेह से ग्रस्त लोगों को यदि मीठा खाने की इच्छा हो, तो वह चीनी की जगह सुगरफ्री का इस्तेमाल करें । उदाहरण के तौर पर गाजर के हलवे में टोन्ड दूध और शुगर फ्री के साथ बादाम, अखरोट का इस्तेमाल करके उसे पौष्टिक बनाएं परंतु यह ध्यान रखें कि बाजार की शुगर फ्री मिठाइयों में धी की मात्रा सामान्य से अधिक होती है । इसलिए इनका सेवन न करें।

वजन नियंत्रित रखें

जब बाहर का तापमान कम होता है, तब देह को गर्म रखने के लिए हमारे शरीर को अधिक ऊर्जा खर्च करनी पड़ती है और शरीर का मेटाबॉलिज्म बढ़ जाता है । यदि हम खानपान पर नियंत्रण रखें और नियम से व्यायाम करते रहें, तो वजन आसानी से कम हो जाता है ।

व्यायाम जारी रखें

सर्दियों में लोग व्यायाम करने में भी आलस्य के कारण कतराते हैं, किन्तु यह स्थिति मधुमेह वालों के लिए शुगर बढ़ने का कारण बन सकती है । समझने की बात यह है कि यह जरूरी नहीं कि आप खुली हवा में ही सैर या कसरत करें । घर में रहकर भी योग या कुछ साधारण व्यायाम किए जा सकते हैं । जैसे, घर के अंदर टहलना, स्टेप जॉगिंग करना और स्ट्रेचिंग करना, घर में बागवानी करना भी एक प्रकार का व्यायाम है ।

रखें पैरों का ध्यान

मधुमेह से ग्रस्त लोगों को सर्दियों में अपने पैरों का खास ध्यान रखना चाहिए | ऐसा इसलिए, क्योंकि सर्दियों में पैरों में रक्त का संचार कम हो जाता है | खासकर उन लोगों में जिनके पैरों में सुन्नपन, झनझनाहट या दर्द हो | ऐसे लोगों को पैरों पर अधिक ध्यान देना चाहिए | ये लक्षण डाइबिटिक न्यूरोपैथी नामक रोग के हो सकते हैं | इस संदर्भ में कुछ बातों पर ध्यान दें…

1. पैरों को गर्म हीटर या गर्म पानी से सिंकाई न करें | ऐसा करने से डाइबिटिक के मरीजों में पैरों में गर्मी महसूस करने की क्षमता कम हो जाती है और पैर जलने का खतरा भी रहता है |

2. पैरों में हमेशा सूती मोज़े पहनें |

3. पैरों को हर रोज साफ करके कोई लोशन या तेल लगाएं |

कैसे करें इंफेक्शन से बचाव

सर्दियों में खासतौर पर ध्यान रखें कि आप स्वयं को ढककर रखें । ऐसा नं करने पर किसी भी तरह के संक्रमण जैसे खांसी, जुकाम व बुखार होने या फिर शुगर के बढ़ने का खतरा बढ़ जाता है । गर्म कपड़े पहनें और शरीर का तापमान गर्म बनाए रखें । अधिकतर बीमारियां हाथ न धोने से फैलती हैं | इसलिए हाथ धोना न भूलें । हाथ स्वच्छ रखने के लिए सैनिटाइजर का इस्तेमाल करें ।

याद रखें

जो मधुमेह रोगी इंसुलिन ले रहे हो, उन्हें अपने डॉक्टर से परामर्श लेकर इंसुलिन की डोज को समायोजित करवाना चाहिए । अगर आप इन छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखेंगे, तो बहुत आसानी से अपनी रक्त शर्करा (ब्लड शुगर) को नियंत्रित रख सर्दियों का लुत्फ उठा सकते हैं ।

इन नुस्खों पर अमल करें

आयुर्वेद के अनुसार मधुमेह रोग शरीर की सभी धातुओं और अंगों की कार्यप्रणाली पर नकारात्मक असर डालता है । सर्दी के मौसम में कम तापमान व ठंडी हवाओं के लगातार प्रभाव से मधुमेह रोगियों में जोड़ों व मांसपेशियों में जकड़न, दर्द और कमजोरी अदि लक्षण बढ़ जाते हैं । इसके अलावा अधिक बार पेशाब जाना, ब्लडप्रेशर की अधिकता और सांस फूलने जैसे लक्षण भी मधुमेह रोगियों में बढ़ सकते हैं, लेकिन कुछ सावधानियां बरतकर इस मौसम में मधुमेह रोगी काफी हद तक स्वस्थ बने रह सकते हैं ।

खान-पान पर दे ध्यान

1. ताजा, हल्का, सुपाच्य व गर्म भोजन लें। भोजन को एक ही बार लेने के बजाय थोड़ी-थोड़ी मात्रा में चार-पांच बार लें ।

2. ऊर्जा की वृद्धि के लिए पाचन क्षमता के अनुसार हरे पत्ते वाली सब्जियों का सेवन अधिक करें ।

3. गर्माहट के लिए मिक्स वेजिटेबल सूप पीना अच्छा है । आं

4. वला, हल्दी, नीम, गुड़मार, मेथी, जामुन, करेला, गिलोय जैसी जड़ी-बूटियों को नियमित रूप से आहार व औषधि रूप में सेवन करने से रोग प्रतिरोधक शक्ति व मधुमेह में सुधार होता है, लेकिन इस संदर्भ में आयुर्वेद विशेषज्ञ से परामर्श लें ।

5. विजयसार चूर्ण, बरगद की छाल का क्वाथ व शिलाजीत का सेवन भी इस रोग में उपयोगी रहता है ।

6. आयुर्वेद चिकित्सक के परामर्श के अनुसार उपयोगी रसायन औषधियों का सेवन करें ।

दिनचर्या

1. दिनचर्या नियमित रखें ।

2. तिल के तेल को हल्का गर्म कर रोजाना मालिश करें ।

3. क्षमता के अनुसार नियमित व्यायाम करें |

4. दिन में सोने की आदत न डालें ।

5. नियमित रूप से ध्यान और प्राणायाम करें ।

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