बवासीर (Piles or Haemorrhoids) का घरेलू इलाज

Ayurvedic Treatment For Piles In Hindi.

बवासीर (Piles or Haemorrhoids) में गुदा के ठीक बाहर या भीतर सूजे हुए मस्से हो जाते हैं | ये Ayurvedic Treatment For Piles In Hindi.मस्से गुदा की रक्त नलिकाओं के सूजने से बनते हैं |  बवासीर 2 प्रकार की होती है। आम भाषा में इसको ख़ूँनी और बादी बवासीर के नाम से जाना जाता है। कही पर इसे महेशी के नाम से जाना जाता है।

कारण

इस रोग का प्रमुख कारण निरन्तर कब्ज का बना रहना है | कब्ज अधिकतर असंतुलित या गलत खान-पान के कारण होता है | कब्ज के कारण मल त्यागते समय गुदा की रक्त वाहिनियों पर जोर पड़ता है और वे फूलकर मस्सों का रूप धारण कर लेती हैं | कब्ज की निरन्तरता बने रहने से बवासीर उग्र रूप धारण कर लेता है |

लक्षण

इन फूले हुए मस्सों की तीन स्थितियां होती हैं | पहली स्थिति में मस्सों में कष्ट नहीं होता | ये गुदा के भीतर रहते हैं, परंतु रोगी को इसका आभास तक नहीं होता | कभी-कभी जोर लगाने पर इनसे खून निकलता है तथा गुदा में पीड़ा होती है | दूसरे प्रकार के मस्से मल त्यागते समय जोर लगने पर गुदा से बाहर आ जाते हैं | परन्तु मल त्यागने के बाद वापस गुदा के भीतर चले जाते हैं | इनसे खून आता है और पीड़ा भी होती है | तीसरे प्रकार के मस्से गुदा के बाहर स्थाई रूप से निकले रहते हैं | ये अत्यधिक पीड़ादायक होते हैं |

उपचार (Ayurvedic Medicine For Piles)

बवासीर का उपचार करना हो तो पहले कब्ज दूर करें फिर रोग का उपचार, अन्यथा कोई लाभ न होगा | इसके लिए ऐसा आहार लेना आवश्यक है जिसमें रेशे काफी मात्रा में हों | जब तक मल नरम होकर सरलता से गुदा द्वार से बाहर नहीं निकलेगा बवासीर में आराम नहीं हो सकता | एलोपैथिक चिकित्सा में इन मस्सों का इलाज ऑपरेशन है | खुजली वाले या पीड़ादायक बवासीर के लिए चिकित्सक क्रीम अथवा ग्लिसरीन की बत्ती आदि का सुझाव देते हैं | बवासीर के मस्सों का एक इलाज उन्हें सुखा देना भी है | इसके लिए विशेष प्रकार के इन्जेक्शन दिए जाते हैं | स्थाई रूप से बाहर निकले मस्सों को ऑपरेशन द्वारा भी निकाला जाता है |

जैसा कि ऊपर बताया गया है कि बवासीर के उपचार का सबसे सरल उपाय कब्ज दूर करना है |

1. कब्ज के रोगी को यदि अंजीर खिलाई जाए तो उसकी कब्ज दूर होती है | दो-तीन अंजीर गरम पानी से भली प्रकार धोकर रात को कांच के बर्तन में भिगोने चाहिए | प्रातःकाल उन्हें मसलकर खाने और उसका पानी पीने से धीरे-धीरे कब्ज दूर होना आरम्भ हो जाता है | दो-तीन सप्ताह तक अंजीर का प्रयोग करने से कब्ज में आशातीत होता है |

2. जामुन खूनी बवासीर के लिए बहुत प्रभावकारी औषधि है | प्रातःकाल नमक के साथ लगातार दो-तीन मास तक जामुन खाने से खूनी बवासीर ठीक हो जाती है | जब तक मौसम में जामुन मिलते रहें, तब तक बवासीर के रोगी इनका सेवन करते रहें | यदि ताजा जामुन शहद के साथ खाया जाए तो खूनी बवासीर में शीघ्र लाभ होता है |

3. छोटे नीबू के दो टुकड़े करके, बीज निकालकर और उस पर काला नमक छिड़ककर धीरे-धीरे चूसने से खूनी बवासीर में लाभ होता है | नीबू के रस में रक्त प्रवाह रोकने की शक्ति होती है |

4. नमक में मैगनेशियम सल्फेट होने के कारण, रक्त बन्द होने और शौच खुलकर आने में सहायता मिलती है | इस प्रकार मस्से धीरे-धीरे स्वयं सिकुड़कर ठीक हो जाते हैं |

5. पपीता चूंकि पेट के रोगों के लिए लाभदायक है, इसलिए बवासीर के रोगी यदि इसका सेवन करते रहें, तो उन्हें इससे लाभ होगा | कच्चे पपीते में पाचक रसों में वृद्धि करने की क्षमता होती है और पेट में पड़ी हुई बेकार की श्लेष्मा भी नष्ट होती है | यह श्लेष्मा आंतों में बेचैनी पैदा करती है | इसके अतिरिक्त पका हुआ पपीता नियमित रूप से खाने से पुरानी कब्ज दूर होती है | इससे खूनी बवासीर ठीक होने में अधिक समय नहीं लगता |

6. पेट के रोगों के उपचार के लिए हमने छाछ के संबंध में कई सुझाव दिए हैं | बवासीर को जड़ से नष्ट करने के लिए छाछ बहुत ही सरल और सर्वोत्तम उपाय है | दोपहर के भोजन के बाद पीसी हुई अजवाइन का थोड़ा-सा चूर्ण सेंधा नमक मिलाकर पीने से बवासीर में लाभ होता है |

7. 1:8 के अनुपात में अरण्डी का तेल तथा कपूर मिलाएं | मल त्याग के बाद मलद्वार को अच्छी तरह साफ करके मस्सों पर इसे लगाने से मस्से सूखने लगते हैं |

8. सूखे नारियल की जटा जलाकर राख बनाएं और छानकर रख लें | दिन में दो-तीन बार एक डेढ़ कप छाछ या दही में मिलाकर पीते रहने से खूनी अथवा खुश्क बवासीर में लाभ होता है |

9. चौलाई के साग में भी रक्त बन्द करने के गुण हैं | चौलाई के साग को बारीक काटकर, मिक्सी में एक प्याला रस निकालें और इसमें एक चम्मच नीबू का रस मिलाएं | रात्रि के समय इसका सेवन करने से खूनी बवासीर में लाभ होता है |

10. करेले का ताजा रस बवासीर के रोगियों के लिए बहुत उपयोगी है | करेले के पत्तों का तीन चम्मच रस निकालकर एक गिलास छाछ में मिलाकर एक माह तक पीने से बवासीर में लाभ होता है | करेले की जड़ को पीसकर बवासीर के मस्सों पर लगाने से भी आराम मिलता है |

11. पथ्य-भयंकर बवासीर की अवस्था में व्यक्ति को दही, छाछ, चावल और मूंग की खिचड़ी आदि तथा छाछ या दही में कच्चा प्याज अथवा प्याज की चटनी मिलाकर खानी चाहिए | इस बात का प्रयत्न करना चाहिए कि कब्ज न रहे |

12. बवासीर के रोगी को खाने के आधे घंटे बाद फल के रूप में पपीते का ही उपयोग करना चाहिए | भोजन के साथ मूली और उसके पत्ते दोनों कम-से-कम 25 से 50 ग्राम की मात्रा में खाने चाहिए | बवासीर के अतिरिक्त मूली से रक्त दोष भी दूर होते हैं |

13. शरीर की नियमित रूप से मालिश करने से भी बवासीर दूर होती है |

14. ज्वार की रोटी का सेवन मस्सों को सुखाने में सहायक सिद्ध होता है |

15. तोरई, टिण्डे, धिया आदि सब्जियां खाने से भी कब्ज दूर होता है तथा बवासीर में लाभ होता है | चौलाई और बथुए की सब्जी खाने से कब्ज दूर होती है तथा बवासीर में लाभ होता है |

16. चुकन्दर का उपयोग करने से भी बवासीर के मस्से दूर होते हैं |

17. कच्ची गाजर खाने अथवा उसका रस पीने से बवासीर के रोगी को लाभ होता है | गाजर के रस में एक भाग पालक का रस मिलाकर पीने से यह और अधिक गुणकारी होता है |

18. आम के रस में एक चम्मच अदरक का रस मिलाकर दिन में तीन बार पीने से बवासीर ठीक हो जाती है |

19. प्याज का उपयोग बवासीर के रोगी के लिए गुणकारी सिद्ध होता हो |

20. गेहूं के पौधे का रस निकालकर पीने से बवासीर में लाभ होता है |

21. पचास ग्राम काले तिल खाने के बाद ठंडा पानी पीने से खूनी बवासीर वाले रोगियों को लाभ होता है |

22. जायफल को देशी घी में भूनकर पीसें और उसका चूर्ण बना लें | इस चूर्ण को दो या तीन कप आटे में मिलाकर थोड़े से घी में अच्छी प्रकार भून लें | स्वाद के अनुसार बूरा मिला लें | प्रातःकाल खाली पेट एक चम्मच चूर्ण का सेवन करने से बवासीर में लाभ होता है |

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1 Comment

  1. aapke dwara diya gya sujao best hai…..aapke dwara mujhe bahut sari jankari mili or maine kai logo ko uske samasyaon ka nijat bhi bataya hai or karne se kafi labh bhi mila hai……..
    aap se niwedan hai ki mujhe night fall dhat nikalna or premature ejaculation se sambandhit jankari de…….

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