बुखार की दवा

बुखार की दवा –

  • यदि बुखार कफ से हो और जाड़ा देकर आता हो तो आक की कली गुड़ में रखकर खिलायें | दो-तीन बार खिलाने से बुखार ठीक हो जायेगा |

 पुराने बुखार की दवा

  • एक तोला चने की भूसी रात को मिट्टी के कोरे बर्तन में भिगो दें और उसे ओस में रख दे | सुबह उसको पानी निथार कर पियें | इस प्रकार चालीस दिन तक पीने से तपेदिक ठीक हो जाता है |
  • थोडा-सा कपूर एक बोतल में डालकर उसमे पानी भरकर बन्द कर दे | दो घन्टे के बाद थोड़ा-सा पिलावे | यह बुखार की अच्छी दवा है |
  • तिजारी के बुखार में जिस दिन दौरा होने को हो उसके पहले पीपल की दातुन कराना आरन्भ कर दें | ऐसा करने से बुखार नहीं आएगा |
  • तेरह माशे अजवाइन और पाँच अदद पीपल रात में भिगो दे | सुबह अजवाइन अलग करके पीपल उसी पानी में पिंसें और एक टिकरी गरम करके उसमें डालकर छोक लगाये | इसे पीने से हर प्रकार का बुखार दूर हो जाता है |
  • लाल मिर्च को पीसकर सब नाख़ून पर लेप करने से बारी का बुखार नही आता |
  • जाड़ा के बुखार के लिए एक तोला फिटकरी, एक तोला मिश्री दानों को पीसकर आधे माशे से एक माशे तक आयु के लिहाज से दे | इससे जाड़े का बुखार दूर हो जाता है | किन्तु यदि खाँसी आती हो तो यह दवा नही देनी चाहिए |
  • नीम के सींको का छिलका उतार कर सात सीकें बारीक पीसकर छान ले और खपड़े का टुकड़ा खूब गरम करके उसे छौंककर तीन-चार दिन तक पिलावे | उसमें तीन दाने काली मिर्च मिलाना और भी गुणकारी है | यह हर प्रकार से बुखार में फायदेमंद है |
  • खाना छोड़ देने से बुखार अपने आप जाता रहता है | अत: मरीज को बुखार में खाना बहुत सोच समझ कर देना चाहिए | यदि बहुत भूख मालूम पड़े तो खिचड़ी या हल्का खाना थोड़ी मात्रा में देना चाहिए |
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