जौ के औषधीय गुण एवं घरेलू नुस्खे

जौ के नाम से सभी परिचित होगे लेकिन काफी लोग इसके औषधीय प्रयोगों और घरेलू इलाज के बारे में अनभिज्ञ होगे अतः यहाँ पर हम जौ से उपचार और घरेलू नुख्सों के बारें में विस्तार से बताएगें जिन्हें अपना कर आप स्वास्थ्य लाभ पा सकते है | मधुमेह के इलाज में यह काफी उपयोगी है | ये नुस्खे दादी माँ के घरेलू नुस्खे भी कहलाते हैं |

सूजन : यदि शोध के कारण कफ-दोष हो तो जौ के बारीक पिसे आटे में अंजीर का रस मिलाकर लगाना चाहियें |

कंठ माला : जौ के आंटे में धनिये की हरी पत्तियाँ का रस मिलाकर रोगी स्थान पर लगाने से कंठ माला ठीक हो जाती है |

मधुमेह : (डायबिटीज) छिलका रहित जौ को भून पीसकर शहद व जल के साथ सत्तू बनाकर खायें अथवा दूध व घी के साथ दलिया का सेवन पथ्य पूर्वक कुछ दिनों तक लगातार करते करते रहने से मधुमेह की व्याधि से छुटकारा पाया जा सकता है |

जलन : गर्मी के कारण शरीर में जलन हो रही हो, आग-सी निकलती हो तो जौ का सत्तू खाना चाहियें | यह गर्मी को शांत करके ठंडक पहुचाता है और शरीर को शक्ति प्रदान करता है |

मुत्रावरोध : जौ का दलिया दूध के साथ सेवन करने से मूत्राशय सम्बन्धी अनेक विकार समाप्त हो जाता है |

गले की सूजन : थोड़ा-सा जौ कूट कर पानी में भिगो दें | कुछ समय बाद पानी निथर जाने पर उसे गरम करके उसके कुल्ले करें | इससे शीध्र ही गले की सुजन दूर हो जायेगी |

ज्वर : अधपके या कच्चे जौ (खेत में पूर्णत: न पके हो) को कूटकर दूध में पकाकर उसमें जौ का सत्तू मिश्री, घी शहद तथा थोड़ा सा दूध और मिलाकर पीने से ज्वर की गर्मी शांत हो जायेगी |

मस्तिस्क का प्रवाह : जौ का आटा पानी में घोलकर मस्तक पर लेप करने से मस्तिस्क की पित्त के कारण हुई पीड़ा शांत हो जाती है |

अतिसार (दस्त) : जौ तथा मूग का सूप लेते रहने से आंतो की गर्मी शांत हो जाती है | यह सूप लघु पाचक एवं संग्राही होने से उर:क्षत में होने वाले अतिसार (पतले दस्त) या टी. बी. में हितकर होता है |

मोटापा बढ़ाने के लिये : जौ को पानी में भिगोकर, कूटकर, छिलका रहित करके उसे दूध में खीर की भाँती पकाकर सेवन करने से शरीर पर्याप्त हष्टपुष्ट और मोटा हो जाता है |

धातु पुष्टिकर योग : छिलके रहित जौ गेंहू और उड़द समान मात्रा में लेकर महीन पीस लें | इस चूर्ण में चार गुना गाय का दूध लेकर उसमें इस लुगदी को डालकर धीमी अग्नि पर पकायें | गाढ़ा हो जाने पर देशी घी डालकर भुन लें | तद्पश्चात चीनी मिलाकर लड्डू या चीनी की चाशनी मिलाकर पाक जमा लें | मात्रा 10 से 50 ग्राम | यह पाक चीनी व पीतल-चूर्ण मिलाकर गरम गाय के दूध के साथ प्रात:काल कुछ दिनों तक नियमित लेने से वीर्य सम्बधी उनके दोष समाप्त हो जाते है और पतला वीर्य गाढ़ा हो जाता है |

पथरी : जौ का पानी पीने से पथरी निकल जायेगी | पथरी के रोगी जौ से बने पदार्थ लें |

गर्भपात : जौ का छना आटा, तिल तथा चीनी – तीनों सममात्रा में लेकर महीन पीस लें | उसमें शहद मिलाकर चांटे|

कर्ण शोध व पित्त : पित्त की सूजन अथवा कान की सूजन होने पर जौ के आटे में इसबगोल की भूसी व सिरका मिलाकर लेप करना लाभप्रद रहता है |

आग से जलना : तिल के तेल में जौ के दानो को भुनकर जला लें | तद्पश्चात पीसकर जलने से उत्पन्न हुए घाव या छालों पर इसे लगायें, आराम हो जाएगा | अथवा जौ के दाने अग्नि में जलाकर पीस लें | वह भस्म तिल के तेल में मिलाकर रोगी स्थान पर लगानी चाहियें |

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