क्या बच्चों को उपवास करना चाहिए Can Kids Also Do Fasting

can kids do fasting - tips in hindi

क्या बच्चे उपवास कर सकते हैं?

यदि हाँ, तो कब और कितने समय तक?

इसका उत्तर यह है कि बच्चों में प्रकृति – प्रदत्त ज्ञान होता है । अत: वे जानते ही हैं कि उन्हें कब और कितने समय तक उपवास करना चाहिए ।

बच्चे खाना नहीं खाए तो क्या करना चाहिए What To Do When Kids Don’t Take Food?

घरों में माताओं को अक्सर शिकायत होती की मेरा बच्चा अधिक आहार नहीं लेता । उसे खिलाने के लिए मुझे बहुत प्रयत्न करने पड़ते है । जब तक मैं जबरदस्ती नहीं करती तब तक वह भोजन को हाथ भी नहीं लगाता ।

इसका सबसे अच्छा उपाय यह है कि बच्चे को जब तक स्वाभाविक भूख न लगे तब तक उसे उसकी मर्जी पर छोड दें ।

कभी – कभी उनका कहना होता है कि उसे कभी भूख नहीं लगती और मुझे तो लगता है कि वह आहार के बिना मर जाएगा । लेकिन ऐसा नहीं है, बच्चे को जब भूख लगेगी वह स्वयं आपको बताएगा |

कई माताओं की अपने बच्चों के सम्बन्ध में यही समस्या होती है । माताएँ विविध प्रकार की बातें और गप – शप करने में काफी समय बरबाद किया करती हैं, किन्तु बच्चों के आहार के प्रति पर्याप्त ध्यान नहीं देतीं । वे प्राय: अपने बच्चों के विषय में भूख न लगने की, पोषक तत्त्वों के अभाव की, वजन कम होने की शिकायत किया करती हैं । किन्तु इतना नहीं समझ पातीं कि अधिक खाने से ही उनका बच्चा परेशान हो रहा है । आपने कभी भी स्वेच्छा से भोजन का त्याग करनेवाले किसी बच्चे को कभी मरते हुए नहीं देखा होगा । मैंने ऐसे सैकड़ों बच्चों को देखा है जो तब तक आहार के बिना रहे जब तक उन्हें स्वाभाविक भूख नहीं लगी । ऐसा बच्चा भी कभी नहीं देखा जो तुरंत खाने की इच्छा व्यक्त करता हो ।

यदि ऐसे बच्चे को उपवास कराया जाय और उसकी इच्छा के विरुद्ध अधिक खाने का आग्रह नहीं किया जाय तो थोड़े ही समय के बाद बच्चा स्वयं आहार लेने की स्वाभाविक इच्छा प्रकट करने लगेगा ।

कुछ ही दिनों आप पायेगी कि बच्चा स्वयं ही खाने की इच्छा प्रकट कर रहा है और दिनों दिन स्वस्थ भी हो रहा है |

बच्चे को खाने के लिए समय दें Give Food When Kids Are Really Hungry

जब तक छोटे बच्चे खाने की इच्छा व्यक्त न करें, तब तक उन्हें खाने के लिए न दें । उचित समय पर वह निश्चित रूप से खाना अवश्य माँगेगा । उसकी आन्तरिक भूख जगाने के लिए आहार बंद करना एक सर्वोत्तम और निरापद उपाय है । डराने – धमकाने से तो उसमें विरोध करने की भावना जागेगी । स्वादिष्ट एवं मीठे खाद्य पदार्थ का प्रलोभन देकर भूख जगाने की अपेक्षा यह मार्ग उत्तम है । विटामिन और टॉनिक देने से यह अधिक अच्छा उपाय है ।

बच्चों को खाए बिना रहने की आजादी दीजिए । जब उसे स्वाभाविक भूख लगेगी तब उसकी सामान्य भोजन की भूख संतुष्ट होगी; उसे स्वादिष्ट भोजन की आवश्यकता नहीं रहेगी । चॉकलेटवाला दूध, आइसक्रीम और मिठाइयाँ सादे और  पोषक आहार की तुलना में तुच्छ है । अत : बच्चों को उनकी इच्छा के विरुद्ध आहार लेने के लिए बाध्य मत कीजिए ।

बच्चों को आहार के लिए मजबूर करने से, विविध प्रकार के प्रलोभन देकर चाहे जैसा आहार खिलाने से उनकी स्वाभाविक भूख नष्ट हो जाती है । पैसे देना, खिलौने देना, सिनेमा दिखाना आदि से तो उसका चरित्र और स्वभाव बिगड़ता है । इन तमाम कारणों से वह अपेक्षाकृत अधिक भोजन करने से परेशान हो जाएगा और ऐसा स्वाभाविक भी है ।

अपेक्षा से अधिक खाने से बच्चों की भूख कुछ समय के लिए मर जाती है । भोजन के निर्धारित समय में अतिरिक्त मिठाइयाँ और नमकीन देने से भी बच्चों की भूख मर जाती है । यदि बच्चे भोजन के समय खाने की इच्छा व्यक्त न करें, तो उनकी माताओं को आश्चर्य व्यक्त नहीं करना चाहिए । अनुचित आहार के कारण भी बच्चों में मंदाग्नि की शिकायत देखने को मिलती है ।

भूख का मर जाना ही इस बात को उजागर करता है कि शरीर में विटामिनों की कमी हो गई है । यह आने वाली बड़ी परेशानी की यह प्रथम सूचना है । यह सुरक्षा का लक्षण है ।

बच्चे के लिए क्या है बेहतर What Food Is Good For Kids

थोड़े समय तक आहार न लेने से उसकी मात्रा कम हो जाती है और तब शरीर की विटामिन की आवश्यकता भी कम हो जाती है । इसलिए बच्चों को पर्याप्त मात्रा में ताजे फल और साग – भाजी देने चाहिए । अनाज, रोटी, आलू, नमकीन, मटर, मिठाइयाँ आदि बहुत कम मात्रा में देने चाहिए । यदि बच्चों को सहज रूप में विटामिन मिलता हो तो माताओं को अन्य प्रकार के कृत्रिम विटामिनों की चिंता नहीं करनी चाहिए ।

फल और साग – भाजी से बेहतर अन्य कोई आहार नहीं है, क्योंकि उसमें सभी प्रकार के प्रमुख विटामिन पाए जाते है ।

जब खजूर, अंजीर, केले और अन्य अच्छे स्वास्थ्यवर्धक मधुर पदार्थ सुलभ हों तब बच्चों को सफेद चीनी, रंग, सुगंध, क्रीम से बनाई गई केण्डी आदि पदार्थ क्यों खिलाए जाते है भला? फलों और सागभाजी में दवाइयों की अपेक्षा अधिक विटामिन होते हैं । एक नारंगी या अन्य कोई फल बच्चे को काफी पोषण दे सकता है । आइसक्रीम बच्चों के लिए हानिप्रद है । बोतल में भरे हुए रस उसके लिए विष के समान हैं । अत: बच्चों के आहार के प्रति जितनी अधिक सावधानी बरती जाएगी, उसका स्वास्थ्य उतना ही अच्छा रहेगा और माँ – बाप व्यर्थ चिंता और निरर्थक खर्च से बच जाएँगे । बच्चे माता – पिता की भूलों के कारण ही बीमार होते हैं ।

बच्चे की बीमारी What To Do When Kids Are Ill

जब बच्चा बीमार होता है, उस समय उसे खाने की कोई इच्छा नहीं होती । उसकी शारीरिक स्थिति के अनुसार उसे निश्चित समय पर भोजन देना चाहिए । व्यर्थ उत्तेजना करने से उसके स्नायुमंडल पर अत्यधिक बोझ पड़ता है और बच्चों को अपच की शिकायत शुरू हो जाती है । उसके शरीर में जलन, बेचैनी, घबराहट, अनिद्रा, दुर्गन्धित साँस, वेदना, मुँह का फीकापन, ज्वर, गैस- ट्रबल, जी मिचलाना, उल्टी आदि लक्षण दिखाई देते हैं । ऐसी स्थिति में उसे आहार न देना ही उचित है । यदि अपच की स्थिति होने पर भी उसे खिलाया जाए तो उसकी आँतों और पेट में दुर्गंध उत्पन्न होती है । यहीं से भविष्य में होनेवाले भयंकर रोगों की खड़ी होती संभावना है ।

यदि तत्काल खाना बंद कर दिया जाए तो उसी समय अपच मिट जाता है, बच्चे की बेचैनी और घबराहट दूर हो जाती है ।

छोटे बच्चों को ज्वर आने के एक सप्ताह पूर्व से ही उनकी आँतों में चिकनापन उत्पन्न हो जाता है या दुर्गंध आने लगती है । अधिक खिलाने से प्राय : बच्चों को दूध नहीं पचता और दूध के दस्त होने लगते है । इसी समय यदि उसके आहार का ठीक से ध्यान रखा जाए तो उसे स्वस्थ होने में देर नहीं लगती, किंतु लापरवाही से ज्यों – त्यों करके काम चलाया जाए तो उसके पेट में जलन होती है और सूजन आ जाती है । छोटी और बड़ी आँतों की भी यही दशा होती है ।

यदि बच्चे को रहे अपच Kids Have Indigestion

यदि पेट में अधिक दिनों तक अपच रहे तो बच्चा बेचैनी, ज्वर और जलन से पीड़ित होने लगता है । प्रारंभ में वह खाया हुआ सब उल्टी में निकाल देता है । फिर लगातार पानी और पित्त की हल्के पीले रंग की उल्टी होती है । इस स्थिति में यदि आहार बंद कर दिया जाए और पीने के लिए थोड़ा – थोड़ा पानी दिया जाए तो चार दिनों में ही बच्चा निरोगी हो जाता है । बच्चों को प्यास अधिक लगती है । इसलिए पीने के लिए थोड़ा गर्म पानी दें, परंतु आहार कदापि न दें ।

बीमारी के समय बच्चों को विश्राम और शांति दीजिए । जिस समय उसकी स्वाभाविक भूख व्यक्त हो तभी उसे आहार दें । वह जितना माँगे उतना ही रवाने को दें । बच्चे का पालन – पोषण सदैव आरोग्य के नियमों के अधीन रहकर ही करना चाहिए ।

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