शरीर के बेहतर स्वास्थ्य के लिये कुछ दैनिक नियम

नीचे स्वास्थ्य रक्षा के कुछ नियम दिये गए है जिनका हमें अपने जीवन में नित्य पालन करते रहना चाहिये क्योकि तंदुरस्ती हजार नियामत है | जान है तो जहान है | अत: इन नियमो को अपने जीवन में लाने का पूर्ण अभ्यास करें ताकि स्वास्थ्य ठीक रहे और आप अपने देश और समाज के लिए कल्याणकारी बन सके|

  1. रात्रि में भगवान का स्मरण करते हुये निश्चिन्त होकर जल्द सोना और देव बेला में उठकर भगवान का स्मरण करके पहले मल का त्याग करना चाहिये |
  2. मल त्याग के पश्चात शुद्ध मिट्टी (या बेहतर होगा साबुन) से हाथ, मुँह, आँख, कान, नाक तथा पैर आदि अच्छी तरह साफ़ करके नीम या बबूल का दातून करना चाहिये |
  3. मुख शुद्धि के पश्चात धूप निकलने पर धूप में बैठकर तेल मालिश करना चाहिये |
  4. स्नान से निवृत होकर किसी स्वच्छ वायुमंडल में थोड़ी व्यायाम तथा आसन लगाना चाहिये |
  5. थोड़ा विश्राम लेकर जो कुछ प्राप्त हो शुद्ध मन से भगवान का स्मरण करते हुये खूब चबा-चबा कर भोजन करना चाहिये, किन्तु ध्यान रहे की भोजन करते समय ज्यादा पानी नही पीना चाहिये | भोजन के आधे घन्टे बाद आवश्यकता के अनुसार घुँट-घुँट कर पानी पिये तो लाभदायक है | भोजन में पौष्टिक पदार्थ जैसे घी, दूध, दही, सब्जी, साग, भाजी, उचित मात्रा में होना आवश्यक है |
  6. सुबह भोजन करके थोड़ी देर बाद करवट लेटना तथा शाम को भोजन पश्चात चालीस पचास कदम अथवा थोड़ा बहुत टहलना लाभकारी है |
  7. दिन में जो भी कार्य करे उसे पूरे मन और शक्ति लगाकर करें तथा मन को व्यर्थ चिंतन से बचाये रखे |
  8. जहां तक बन सके परमात्मा का स्मरण करते रहें, इससे मन थोड़ा शुद्ध रहेगा | गंदा मन ही बीमारियों की जड़ है अतः इससे दूर रहें |
  9. थोड़ा बहुत फल फूल खाना भी अच्छे स्वास्थ्य के लिये लाभकारी और आवश्यक है |
  10. भोजन हमेशा भूख से कुछ कम करें | पेट का आधा भाग भोजन से तथा चौथाई भाग पानी से भरना चाहिये, ताकि पेट में भारीपन या बदह्जमी न हो, क्योंकि जितने रोग होते है इसमें ज्यादातर पेट की खराबी से होते है |
  11. हप्ते में दो दिन उपवास रखना आवश्यक है | इससे पेट साफ़ रहता है और स्वास्थ्य ठीक रहता है |
  12. जहाँ तक हो सके चिंताओं को कम करना चाहिए | चिन्ता अधिक करने से कई बीमारियाँ हो जाती है|
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