महिलाएं 40 के बाद डिप्रेशन का शिकार क्यों Depression In Women After 40

depression in women - tips in hindi

महिलाएं 40 के बाद डिप्रेशन का शिकार क्यों हो रहीं हैं Depression In Women After 40 – Tips In Hindi

वह बहुत एक्टिव स्टाइलिश और बहुत खूबसूरत हुआ करती थी. सब उसकी काबिलियत देख कर उस पर रंज करते थे. लेकिन एक दिन पता चला कि इतनी खूबसूरत और गुणों से भरी महिला ने अपने आप को सिर्फ अपने तक ही सीमित कर दिया है और अब वह उतनी फुर्तीली भी नहीं रही, जितनी कि पहले हुआ करती थी. अपनी उम्र के चालीसवें पड़ाव में आते-आते अधिकतर महिलाएं तनाव की शिकार हो जाती हैं. इसकी एकमात्र वजह यह है कि पहले लड़कियों की शादी जल्दी हो जाया करती थी और वह 40 की उम्र में आते-आते नानी-दादी बन जाया करती थी तथा पोते-पोतियों के काम में व्यस्त हो जाया करती थी. लेकिन अब ऐसा नहीं है, कभी-कभी तो इस उम्र में वह शादी करती हैं, जिस वजह से वह आज इस उम्र में बिल्कुल अकेली रह जाती हैं. जहां उनकी सुंदरता और बाकी गुण भी फीके लगने लगते हैं और वह धीरे-धीरे तनाव का शिकार हो जाती हैं.

पहले के समय में ये बीमारियाँ क्यों नहीं थीं 

आज से 40-50 वर्ष पहले ज्यादातर संयुक्त परिवार में लोग रहते थे. महिलाएं पढ़ाई, शिक्षा को लेकर बहुत ज्यादा सचेत नहीं थी. एक कारण पर्दा प्रथा का भी था. वह 40 की उम्र तक भरे पूरे घर की स्वामिनी होती थी. कुछ तो इस उम्र तक नानी-दादी भी बन जाया करती थी. घर में सास-ससुर, ननंद, देवर, देवरानी, जेठ-जेठानी और उनके बच्चे होते थे. घर में हर समय चहल-पहल रहती थी. तीज त्यौहार बहुत उत्साह से मनाया जाता था. इसके लिए महीनों पहले से तैयारियां भी शुरू हो जाया करती थी. अचार, बड़ी, पापड़, कढ़ाई, सिलाई, बुनाई सभी महिलाएं मिलजुल कर स्वयं करती थी. बड़े परिवार का नाश्ता-खाना, बच्चे का लालन-पालन करना, इन सब कार्यों में महिलाओं को तनिक भी समय नहीं मिलता था. 40 के बाद भी महिलाएं नाती-पोतों बेटे-बहू में व्यस्त रहती थी.

अब क्यों है ऐसे 

अब समय बदल गया है, संयुक्त परिवार टूटने लगे और एकल परिवार ज्यादा होने लगे हैं. बच्चों की संख्या एक या दो रह गई है. महिलाएं उच्च शिक्षित होने लगी हैं. बच्चे बड़े होकर पढ़ने के लिए बाहर जाने लगे. जो महिलाएं काम के सिलसिले में बाहर जाती है, उनका समय तो बीत जाता है. लेकिन जो महिलाएं शिक्षित हैं, परंतु ग्रहणी हैं, वह 35-40 तक आते-आते अवसाद से ग्रस्त (Depression) होने लगी हैं. लड़कियों का विवाह भी देर से होने लगा है या लड़कियां शिक्षा और कैरियर के लिए अविवाहित भी रहने लगी है.

आइए एक नजर डालते हैं कि आज क्यों महिलाएं अवसादग्रस्त हो जाती हैं. आज क्यों साइकेट्रिस्ट के पास महिलाओं की संख्या बढ़ रही है.

महिलाओं में अवसाद के कारण Depression Causes & Symptoms In Women in hindi

☑ पति और बच्चों के ऑफिस और स्कूल जाने के बाद, घर का सारा कार्य समाप्त करके, उनको अकेलापन खलने लगता है. दूसरों को कार्य करते देख, उनके अंदर हीन भावना पनपने लगी है. वह दिनभर कितना TV देखें, पड़ोसियों से कितनी गासिप करें. आज घरों में सुविधा की वस्तुएं आ जाने से, घर के कार्य जल्दी समाप्त हो जाते हैं. कुछ महिलाएं आम नहीं बल्कि खास होती हैं. प्रतिभा की धनी होती है. लेकिन अपना समय बर्बाद होते देख तनाव में रहने लगती हैं.

☑ महंगाई बढ़ती जा रही है, इच्छाएं भी बढ़ रही है. पैसे की तंगी कुछ ना करने का एहसास और गहरा करती है. 35-40 की उम्र तक तो फिर भी महिलाएं बच्चों की पढ़ाई और परवरिश में व्यस्त रहती हैं. लेकिन बच्चे बड़े होकर अपनी जिम्मेदारी स्वयं संभालने लगते हैं या हॉस्टल में उच्च शिक्षा के लिए रहने लगते हैं. ऐसे में 24 घंटे का लंबा समय वे प्रतिदिन घर पर अकेले कैसे बिताएं.

☑ रोज-रोज वे कितना घर का काम या शॉपिंग में गुजारे. कितना सोए. ऐसी स्थिति में वे मनोचिकित्सक के पास पहुंचती हैं. कोई रोग ना होते हुए भी दवा खाने लगती हैं. जिंदगी जीती नहीं, सिर्फ अपने कंधों पर ढोती हैं. अपनी सांसे गिनती रहती हैं. 50 की उम्र तक आते-आते कुछ महिलाएं मानसिक रोगी बन जाती है. आए दिन आप ऐसी खबरें सुनते देखते और पढ़ते हैं. कई बार बहुत भयावह स्थिति आ जाती है, जब कुछ महिलाएं पागल होकर पागलखाने पहुंच जाती हैं या घर छोड़ देती हैं या घर में ही वर्षो कैद होकर रह जाती है.

आइए एक नजर डालते हैं कि क्या करें उपाय, जिससे महिलाएं ना हो अवसादग्रस्त.

महिलाओं में अवसाद का निवारण Depression Treatment in hindi

➔ सब से पहले तो यह करे कि 40 की उम्र के बाद स्वयं को थका हुआ, चुका हुआ न समझें. आज 40 वर्ष के बाद ही लोग जवान होते हैं. आप अपने सौन्दर्य तथा पहनावे पर ध्यान दीजिए. संतुलित भोजन ग्रहण कीजिए, प्रोटीन तथा कैल्शियम की मात्रा अपने भोजन में बढ़ा दीजिए. इस उम्र में, आप यह सोचिए कि आपको अपने सपने, अपनी इच्छाओं को पूरा करना है. मानव जीवन एक बार मिलता है, इसलिए इसका लाभ उठाएं. जो कुछ आप पहले करना चाहती थी और किसी कारण से नहीं कर पायीं, वह अब कर लीजिए.

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➔ मेरी एक सहेली 45 में भी 30 की दिखती है. लड़कियां भी शरमा जाती हैं, उसकी फिगर, त्वचा, बाल तथा काम देखकर. वह 16-17 घंटे काम करती है. गुणों का खजाना है ,खूबसूरती की मिसाल है. स्वयं को मन से हमेशा जवान महसूस कीजिए. अब आप अपना कैरियर संवारिए.

➔ हम अपने दिमाग का जितना ज्यादा प्रयोग करेंगे. वह उतना ही सक्रिय होगा. जैसे कोई मशीन चलती रहे, तो ठीक, वर्ना जंग लग जाती है. महिलाएं अपनी आगे की पढ़ाई शुरू कर सकती हैं. कोई कोर्स या डिप्लोमा कीजिए, कढ़ाई, सिलाई, सीखिए, सॉफ्टवेयर बनाना, जिम जाना, नाचना, ब्यूटीशियन का कोर्स सीखिए. आज महिलाएं आत्मनिर्भर हो रही हैं. विकल्पों की भरमार है. आवश्यकता है, लगन और रुचि की. अपना ब्यूटी पार्लर या बुटीक का व्यवसाय शुरु कीजिए. मेहंदी आज बहुत फैशन में है, सीखिए फिर दूसरों को सिखाइए. गीत, नृत्य, सीखना-सिखाना, दोनों लाभ देता है. समाज सेवा, प्रौढ़ शिक्षा अभियान में भाग लीजिए. महिलाएं भी इस देश की नागरिक हैं. उनका योगदान अति आवश्यक है. जरूरी नहीं कि हर काम पैसे के लिए किया जाए. देश के विकास के लिए, स्वयं की संतुष्टि के लिए एवं एक जिम्मेदार नागरिक होने के नाते महिलाओं को हमेशा सक्रिय रहना चाहिए. सब काम करेंगे, स्वस्थ रहेंगे तभी तो स्वस्थ देश स्वस्थ समाज का निर्माण होगा.

➔ कुछ सीखने तथा करने की कोई उम्र नहीं होती है. कोई नुक्ता-चीनी करे, तो परेशान ना हो. लोगों का तो काम है, कहना. वह कुछ तो कहेंगे. आप स्वयं में इतना आत्मविश्वास पैदा कीजिए कि आपकी हर कदम पर ईर्ष्या करने वाले लोग एक दिन वाह-वाह करने लगे. दूसरों की परवाह मत कीजिए, अपनी और अपनों की कीजिए.

➔ जीवन एक बार मिलता है, उसको सार्थक कीजिए. कुछ ऐसा कीजिए कि लोग आपसे सीखे और आप जब दुनिया से रुखसत हो, तब भी लोगों के दिलों में आप हमेशा जीवित रहे. खुशियां हमारे ही अंदर है, उसे हमें ही ढूंढना है, कोई भी इंसान हो या महिलाएं हों, ये कोई पुराना फर्नीचर नहीं, कि नया आया तो पुराना उठा कर कोने में रख दिया या फेंक दिया.

इसके अलावा और क्या करें

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  2. दवा का इस्तेमाल कर सकती हैं – Jarrow Formulas Adrenal Optimizer -Buy On Amazon Online

इंसान सर्वोपरि है, महिलाओं से ही घर है, वरना सिर्फ एक पत्थर का मकान है. महिलाएं सृजन करती हैं. हर घर के पुरुषों को अपने घर की महिलाओं का ध्यान रखना चाहिए. उनको अपने पांव पर खड़े होने में, कुछ सीखने, पढ़ने, में मदद करनी चाहिए, उत्साह बढ़ाना चाहिए. जब घर की महिला मानसिक शारीरिक रूप से स्वस्थ होगी, आत्मनिर्भर होगी, तभी स्वस्थ परिवार का निर्माण होगा. परिवार के बच्चों का भविष्य उज्जवल होगा.

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