फ्लैट फुट की समस्या कारण और समाधान

flat foot treatment in hindi

फ्लैट फुट होने के कारण अधिक समय तक खड़े रहने और चलने-फिरने में समस्या उत्पन्न हो जाती है। इस वजह से पिंडली की मांसपेशियों में भी दर्द होता है, लेकिन अब इस समस्या का समाधान संभव है |

जन्म के समय प्रायः सभी बच्चों का पंजा समतल होता है, लेकिन उम्र बढ़ने के साथ उनका पोस्चर बदलता है। वे चलना सीखते हैं, उनकी मांसपेशियां मजबूत होने लगती हैं और 9 से 10 साल की उम्र तक पैर का आर्च यानी घुमाव विकसित होने लगता है |

रोग का स्वरूप

सामान्य रूप से पैर के पंजे में आर्च होने से शरीर का भार एड़ी और पंजों पर समान रूप से बंट जाता है। इसी कारण हम दौड़-भाग कर पाते हैं। फ्लैट फुट (चपटे तलवे) होने के कारण शरीर का पूरा भार सामान्य रूप से पूरे पैर के भागों पर पड़ता है। इस कारण अधिक समय तक खड़े रहने और चलने-फिरने में समस्या आती है। इस वजह से पिंडली की मांसपेशियों में भी दर्द होता है, जिससे पैरों की समस्या और अधिक गंभीर हो जाती है। चपटे तलवे यानी फ्लैट फुट मुख्य तौर से दो प्रकार के होते हैं। पहला, फ्लेक्सिबल व दूसरा रिजिड।

फ्लेक्सिबल फ्लैट फुटः इस समस्या में सामान्य रूप से पैरों का आकार देखने में ठीक लगता है, पर दबाव डालने पर पैरों का संतुलन नहीं बन पाता और पैर चपटा हो जाता है।

रिजिड फ्लैट फुटः इसमें पंजे का आकार समतल रहता है। फ्लैट फुट की समस्या पूरी तरह तभी सामने आती है, जब बच्चे के चलने का समय शुरू होता है। जिन बच्चों में आर्च का सही विकास नहीं होता, उनमें अधिक चलने पर पैरों में दर्द या थकावट की शिकायत भी अधिक होती है।

लंबे समय तक उपचार न किए जाने पर आगे चलकर फ्लैट फुट की समस्या पंजे में अर्थराइटिस का कारण भी बन सकती है। रिजिड फ्लैट फुट में दर्द के अधिक बढ़ जाने पर सर्जरी करवानी पड़ सकती है |

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कारण

फ्लैट फुट होने का एक कारण जोड़ों के लिगामेंट का लचीला होना है। यह स्थिति अधिक वजन बढ़ने (मोटापे) से भी उत्पन्न हो सकती है। पैरों में एक खास नस होती है जिसे टिब पोस्टेरियर कहते हैं, जो पैरों के आर्च (घुमाव) को बनाये रखती है। यह नस अत्यधिक सूजन या मोटापे के कारण क्षतिग्रस्त हो सकती है। इस कारण भी फ्लैट फुट की समस्या हो सकती है। जब कभी बचपन में पैरों की दो हड्डियां आसामान्य रूप से जुड़ जाती हैं (जिसे टार्सल कोएलिशन कहते हैं) उसके कारण पैर कड़े और चपटे हो जाते हैं।

फुट अर्थराइटिस (जो पैर के पीछे या मध्य भाग में होती है) चोट लगने या किसी और कारण से भी हो सकता है |

कभी-कभी पैरों से जुड़ी कोई चोट या फ्रेंक्चर भी चपटे तलवे का कारण बन जाते हैं | लिगामेंट्स के टूटने या कमजोर होने पर हड्डियां एक – दूसरे से जकड़े रहने के बजाय ढीली हो जाती हैं | इस कारण तलवा चपटा हो जाता है |

मोटापा, पैरों या टखनों में चोट आना, रयूमैटाइड अर्थराइटिस, उम्र का बढ़ना और डाइबिटीज के कारण भी फ्लैट फुट की समस्या बढ़ जाती है |

लक्षण

  • चलने में दर्द होना विशेष रूप से पैर और एड़ियों में |
  • दौड़ते समय दर्द बढ़ने के कारण कठिनाई होना |
  • एड़ियों में अंदर की तरफ सूजन आना।
  • कभी-कभी पैर के तलवे की ओर सुन्नपन की समस्या हो सकती है। ऐसा इसलिए, क्योंकि एड़ियों की तंत्रिकाएं (नर्व्स) या तो थोड़ी सी खिच जाती है या दब जाती हैं।

डायग्नोसिस

फ्लैट फुट का निदान (डायग्नोसिस) रोगी के चिकत्सकीय इतिहास और उसके लक्षणों के आधार पर किया जाता है | एक्स रे के जरिये फ्लैट फुट की पूरी जानकारी मिल जाती है। जरूरत पड़ने पर एमआरआई और सीटी स्कैन भी कराया जाता है।

उपचार

फ्लैट फुट के कारण अगर कोई दर्द नहीं होता, तो इसके लिए कोई उपचार अवश्यक नहीं हैं | अगर आपका फ्लैट फुट दर्द देता है, तो आपका डाक्टर आपकी समस्या के अनुसार सुझाव दे सकता है | अगर पैर फ्लैट व लचीले (फ्लेक्सिबल) हैं, तब इसका उपचार सामान्य फिजियोथेरेपी से कर सकते हैं, लेकिन जो लोग शारीरिक रूप से सक्रिय जीवन बिताते हैं, उनके लिये यह उपाय कारगर नहीं है। ऐसा इसलिए, क्योंकि उनमें आर्च या घुमाव तो पूरी तरह सपाट (फ्लैट) हो चुका होता है। ऐसे मामलों में, आर्च या घुमाव के पुनः निर्माण के लिए सर्जरी कराना आवश्यक होता है |

१. फिजियोथेरेपी

अगर फ्लैट फुट की समस्या केवल नसों की असामान्यता के कारण होती है, तब इसे फिजियोथेरेपी के जरिये ठीक किया जा सकता है।

आर्च सपोर्ट (आर्थोटिक डिवाइसेस): आर्च-सपोर्ट के कारण फ्लैट फुट से होने वाले दर्द में आराम मिलता है |

स्ट्रेचिंग एकसरसाइज: जिन लोगों में फ्लैट फुट की शिकायत होती है, उनकी पिंडलियों की मांसपेशियां सख्त होती हैं | ऐसी स्थिति में नसों को स्ट्रेच करने वाली एक्सरसाइज से सहायता मिलती है।

पैरों को सहारा देने वाले जूतेः विशेष रूप से डिजाइन किये गये जूते (जो पैरों को सहारा देते हैं) उन सैंडल्स या जूतों की तुलना में अधिक आरामदायक होते हैं जो पैरों को न्यूनतम सहारा देते हैं |

२. सर्जरी

सर्जरी कराना तभी आवश्यक होता है, जब दवाएं और खास किस्म के जूते पहनने से राहत न मिले। ऑपरेशन के जरिये एड़ी को हटाकर उसे अपने नियत स्थान पर लाया जाता है। इस सर्जिकल प्रक्रिया को ‘हील शिफ्ट’ भी कहते हैं। इसमें पैर की उंगलियों से नसों को लेकर तलवे की आर्च बनाई जाती है, लेकिन इससे उनकी कार्यप्रणाली प्रभावित नहीं होती। अगर समस्या के अधिक गंभीर होने पर पैर का उपचार नहीं कराया गया, तो इनमें अर्थराइटिस की समस्या पैदा हो सकती है |

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2 Comments

  1. sir mere dono foot me flat feet bola hai army medical me. mujhe isse koi proble nii hai but medical me 15 din ka time diya hai or aaj 17 june hai to plz mujhe jaldi se btaiye ki flat foot ko sahi kis prakar kare home advice dijiye. plz plz plz….
    bus remedical me unko flat feet na lagge.

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