उपवास से वजन कैसे बढायें How To Gain Weight By Fasting In Hindi

how to gain weight by fasting

ज्यादतर उपवास का उपयोग वजन कम करने के लिए किया जाता है । लेकिन शायद अधिकतर लोगों यह नहीं पता है की उपवास से Weight Gain भी किया जा सकता है |

अत्यधिक और असमय खाने से शरीर का वजन घटता है । अक्सर लोगों की यही शिकायत होती है कि, ”मैं जितना अधिक खाता हूँ, मेरा वजन उतना ही घटता जाता है ।“ ये लोग वजन बढ़ानेवाले आहार का सेवन करते हैं । बार – बार आहार बदलते रहते हैं, फिर भी वे दुबले और अशक्त ही रहते हैं, दिन – प्रतिदिन अधिकाधिक सूखते चले जाते हैं, क्योंकि अतिरिक्त आहार के कारण उनकी पाचनशक्ति स्वयं ही धीमी हो जाती है ।

आहार और पोषकतत्व एक ही नहीं होते । हम जितना खाते हैं उतना पोषण प्राप्त नहीं कर सकते । किंतु हम वही प्राप्त करते हैं जो आसानी से पच जाता है । जब पाचनतंत्र और शोषणशक्ति कमजोर हो जाती है तब शरीर के वजन की वृद्धि रुक जाती है । शरीर की कमजोरी आहार के पोषक तत्त्वों के अभाव के कारण नहीं होती, बल्कि हमारे पाचनतंत्र की दुर्बलता और धीमे होने के कारण होती है । ऐसे रोगियों के लिए आहार की आवश्यकता नहीं है, किन्तु उनके पाचनतंत्र और शोषणतंत्र को ठीक करने की आवश्यकता है । यदि इन तंत्रों को सुधारा जा सके तो उनका वजन बढ़ाने में कोई बाधा खड़ी नहीं होती ।

अनुभव और व्यवहार दोनों से यह सिद्ध हो चुका है कि उपवास से निर्माणकारी शक्तियाँ बढ़ती हैं, संचय और पाचनतंत्र में सुधार होता है । अत: कम वजनवाले व्यक्ति उपवास से अधिक वजन प्राप्त कर सकते हैं, इसमें कोई संदेह नहीं है । दरअसल उपवास के दौरान व्यक्ति का वजन निश्चय ही घट जाता है; किंतु उपवास के अंत में उसका वजन जितना कम हुआ हो उससे कहीं अधिक बढ़ जाता है, क्योंकि उपवास के कारण उसका शरीररूपी यंत्र अपेक्षाकृत अधिक सक्षम हो जाता है और भलीभाँति काम करने लगता है । यही कारण है कि उपवास से पूर्व अधिक आहार ग्रहण करने पर भी दुबले – पतले रहनेवाले लोग उपवास के बाद कम भोजन करने के बावजूद काफी वजन प्राप्त कर लेते है ।

कई शोधों से साबित हो चुका है कि कम आहार से शारीरिक विकास तेजी से होता है । उपवास से शरीर को आराम मिलता है, इसलिए पाचन और शोषणतंत्र में सुधार हो जाता है । खाद्य पदार्थों का भी अधिक और पर्याप्त मात्रा में व्यय होता है । उपवास के बाद अधिक नाइट्रोजन की आवश्यकता होती है और उसे ग्रहण करने की शक्ति भी बढ़ जाती है, इस कारण उच्च प्रकार के स्नायुओं की उत्पत्ति होती है, जो केवल स्टार्च, शक्कर या चरबी से नहीं हो सकती ।

उपवास से मेटाबोलिजम की क्रियाएँ अच्छी हो जाती है । इसके हजारों उदाहरण देखने मिले हैं । इसका अर्थ यह होता है कि उपवास के कारण शरीर में पोषक तत्त्वों की उत्पत्ति अधिक मात्रा में हुई है ।

शरीर के वजन की कमी का कारण पाचनतंत्र और शोषणतंत्र की मंदता है । अत: बीमार अंगों को निरोगी बनाकर शारीरिक दुर्बलता को दूर किया जा सकता है । दुर्बल व्यक्ति को अधिक आहार की नहीं, अपितु आहार के पाचन के लिए अधिक शक्ति की आवश्यकता रहती है ।

कम वजनवाले व्यक्तियों के लिए कितने दिनों का उपवास आवश्यक है इस प्रश्न का कोई निश्चित उत्तर नहीं है । प्रत्येक रोगी की शारीरिक अवस्था भिन्न-भिन्न होती है । अत: प्रत्येक रोगी के लिए उपवास की अवधि भी अलग-अलग होती है । कभी दस से पंद्रह दिनों का उपवास पर्याप्त हो जाता है; कभी इससे भी अधिक दिनों का उपवास कराना आवश्यक हो जाता है । ऐसे उपवास के लिए मार्गदर्शन और निरीक्षण आवश्यक है, पाचन और शोषणतंत्र में सुधार होना आवश्यक है, शक्ति को स्नायुओं तक पहुंचाने के लिए आराम भी आवश्यक है ।

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