पित्ताशय की पथरी (Gall Stones) का घरेलू इलाज

Gall Bladder Stone Removal Ayurvedic Way In Hindi.

पित्ताशय में पाए जाने वाले छोटे-छोटे पत्थरों जिनका आकार 1.3 से.मी. तक हो सकता है, को पित्ताशय की पथरी कहा जाता है |

कारण

पित्ताशय का प्रमुख कार्य पाचन क्रिया को संपादित करने के लिए पित्त को संचित करना है | किंतु पित्त में उपस्थित कोलेस्ट्रोल व रंगद्रव्य कभी-कभी ठोस आकार ग्रहण कर पथरी का रूप ले लेते हैं | ऐसा क्यों होता है | इसका सही कारण तो ज्ञात नहीं है किंतु विशेषज्ञों का अनुमान है कि जो व्यक्ति अधिक मात्रा में गरिष्ठ भोजन का सेवन करते हैं उनके रक्त में कोलेस्ट्रोल की मात्रा बढ़ जाने के कारण इस रोग की उत्पत्ति होती है |

लक्षण

पथरी से हर समय कष्ट का अनुभव नहीं होता | पथरी के लक्षण सामान्यतया वसायुक्त तथा गरिष्ठ भोजन करने के बाद ही दिखाई देते हैं | पेट के ऊपरी भाग में हल्का दर्द, पेट फूलना, वायु प्रकोप या कभी-कभी तीव्र पीड़ा तथा मितली के लक्षण दिखाई देते हैं  |

उपचार

1. वसायुक्त गरिष्ठ भोजन, दूध आदि का सेवन न किया जाए |

2. आहार में सब्जी तथा फलों का सेवन अधिक करें |

3. कोलेस्ट्रोल की मात्रा घटाने के लिए लहसुन तथा नीबू के रस का सेवन अधिक करें |

4. चुकन्दर, गाजर और खीरे के रस का सेवन करना पथरी का एक अति उत्तम प्राकृतिक उपचार है | इन रसों के सेवन से पित्ताशय की ही पथरी नहीं वरन् गुर्दो की पथरी भी गलकर शरीर से बाहर आ जाती है |

5. अंगूर का सेवन भी गुणकारी है |

6. अनार के खट्टे तथा मीठे दोनों प्रकार के बीजों को पीसकर चूर्ण तैयार कर लें | चने के सूप के साथ एक-एक चम्मच दिन में दो बार देने से पथरी गलकर शरीर से बाहर आ जाती है |

loading...

Be the first to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published.


*