लम्बी उम्र पाने के घरेलू प्राकृतिक उपाय

यदि वैज्ञानिक शब्दावली का प्रयोग किया जाए तो कहना होगा कि जब हमारी कोशिकाओं में डी.एन.ए. की अतिरिक्त मात्रा इकट्ठी हो जाती है, तो यह ऐसे स्तर तक पहुंच जाती है जिससे कोशिका का सामान्य कार्य अवरुद्ध हो जाता है जिसके फलस्वरुप हम धीरे-धीरे बूढ़े होते जाते हैं।

बुढ़ापा एक मायने में तन-मन के क्षय का ही एक रूप है। वर्तमान शोधों के आधार पर यह निष्कर्ष निकाला गया है कि मनुष्य की जीवनावधि सम्यक आहार, व्यायाम, पोषण और हार्मोन पूर्ति से बढ़ाई जा सकती है। इन चीजों से हमारी सक्रियता भी बरकरार रह सकती है और हम एक सार्थक व कर्मशील जीवन जी सकते हैं। प्राचीन मनीषा में इन सभी उपायों का पहले से ही वर्णन मिलता है। हमारे विभिन्न आरोग्य शास्त्र, योग आदि जीवन की अवधि बढ़ाने के शास्त्र ही हैं। परंतु आज हम प्राचीन शास्त्रों के इन गुणों को भूलकर विज्ञान की नई खोजों का मुह ताक रहे हैं।

आज के वैज्ञानिक यह सिद्ध कर रहे हैं कि वह व्यक्ति ज्यादा दिनों तक जिंदा रहते हैं जो कम कैलोरी का भोजन करते हैं। उनका कहना है कि विलकाबंबा के दक्षिणी अमरीकी, हिमालय क्षेत्र की डूजा जाति के लोग, मध्य यूरोप के काकेशियंस सभी प्रतिकूल परिस्थितियों में कड़ी मेहनत करते हैं, फिर भी वे अधिक समय तक जिंदा रहते हैं क्योंकि वे 1600 कैलोरी का ही भोजन करते हैं। इसी प्रकार जापान के ओकीनावा शहर के व्यक्ति शतायु होते हैं तथा सारी दुनिया में जापान में ही सर्वाधिक दीर्घजीवी लोग रहते हैं।

इसका कारण है कि उनका भोजन कम कैलोरी युक्त कितुपोषक तत्त्वों से भरपूर होता है। एक मोटा सिद्धांत यह है कि ‘कम खाओ, लंबी उम्र पाओ।’ यह सिद्धांत वैज्ञानिक आधार पर भी तकसंगत है। कैलोरी की मात्रा कम करने पर चयापचय (Metabolism) की क्रिया धीमी हो जाती है क्योंकि मुक्त मूलक चयापचय के उप-उत्पाद हैं, कैलोरी नियंत्रण से उनके द्वारा की जानेवाली विनाशलीला में कमी आती है और फिर कैलोरी नियंत्रण से शरीर का तापक्रम भी थोड़ा कम रहता है।

इसलिए कोशिकाओं की क्षति भी कम होती है। प्रयोगों के निष्कर्ष के आधार पर यह तथ्य सामने आता है कि कैलोरी नियंत्रण से न केवल जीवन की अवधि में वृद्धि हो सकती है बल्कि रोगों की प्रक्रिया में भी इसके कारण धीमापन आता है। इन शोधों से यह आशा बंधती है कि कैलोरी नियंत्रण के सिद्धांत से बुढ़ापे में होनेवाले रोगों के कारणों का पता लगाने में भी सहायता मिलेगी।

आजकल शरीर को स्वस्थ रखने के लिए विभिन्न शारीरिक व्यायामों की अनुशंसा की जाती है, इनसे जीवनावधि में वृद्धि होती है, परंतु इनकी अपनी निश्चित सीमाएं हैं। योगाभ्यास भी जीवन बढ़ाने हेतु समग्र प्रक्रिया है। लंबी उम्र और संपूर्ण स्वास्थ्य के लिए योगाभ्यास सर्वश्रेष्ठ उपाय है। योगमय जीवन द्वारा हम बुढ़ापे को पछाड़ सकते हैं।

ऋतु अनुसार वर्जित पदार्थ वर्षों से हमारे देश में कई उपयोगी व सारगर्भित कहावतें तथा तुकबदियां प्रचलित रही हैं, जिनमें स्वास्थ्य के लिए बहुत उपयोगी जानकारियां मिलती हैं। इसी संदर्भ में ऋतुओं के अनुसार कुछ भोज्य पदार्थों के सेवन को हानिकारक बतानेवाली एक तुकबंदी यहां प्रस्तुत है।

चैत्र में गुड़, वैशाख में तेल जेठ में महुआ, अषाढ़े बेल॥

सावन दूध, भादो में मही। क्वांर करेला, कार्तिक दही॥

अगहन जीरा, पूस धना। माघ में मिश्री फागुन चना॥

इनका परहेज कर नहीं। मरे नहीं तो पड़े सही॥

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