बारिश में विकारों से दूर रहकर वर्षा का आनंद कैसे ले Health Tips For Rainy Season

Health Tips For Rainy Season Hindi Languge

बारिश में विकारों से दूर रहकर वर्षा का आनंद कैसे ले Health Tips For Rainy Season – शायद ही कोई हो, जो वर्षा का आनंद लेना चाहता हो. ले भी क्यों नहीं, आखिर काफी असहनीय गर्मी और तपन के बाद राहत मिलने का वक्त जो आया है. मानसून का आगमन, विश्व के लगभग सभी देशों में होता है. लेकिन समय अलग अलग होता है. हमारे देश में भी लगभग जून से शुरुआत होती है. पहला आगमन, समुद्र के किनारे होता है. धीरे-धीरे हवा के रुख के अनुसार जुलाई-अगस्त तक पूरे देश को सफेद चादर के रूप में ढक लेता है.

मानसून में वर्षा का बड़ा ही मनोरम दृश्य होता है. चारों और आकाश में तरह-तरह के बादलों का रूप आसानी से देखने को मिल जाता है. कोई बादल कुत्ते जैसा तो कोई पहाड़ जैसा दिखता है. यह हवा के अनुसार कभी तेज, तो अगले पल धीरे-धीरे चलते रहते हैं. कहीं हल्के, तो दूसरे पल इतने गहरे, कि चारों ओर अंधकार छा जाए. बिजली की चमकाहट तो उसके तुरंत बाद दिल-दहला देने वाली बादलों की गड़गड़ाहट. कहीं मंद-मंद बहार तो थोड़ी दूरी पर तेज धूप. थोड़ा आगे चलो तो मूसलाधार वर्षा. यह कौन कलाकार है, इसका भेद किसी के पास नहीं.

कहां तो किसान दो बूँद पाने के लिए संघर्ष करता है. लेकिन मानसून में पल भर में ही खेत खलिहान पानी से लबालब हो जाते हैं और उसका मन खिल उठता है. खेती में मौसम की अहम भूमिका होती है. ऐसे सुहावने मौसम में चाहे घर, बाहर या किसी पिकनिक स्पॉट पर हो, पूरा आनंद तभी मिलता है, जब स्वास्थ्य सही हो. स्वास्थ्य में जरा सा बदलाव या परेशानी से मौसम का आनंद किरकिरा हो जाता है. यदि मौसमी आनंद लेना है, तो थोड़ा जागरूक होना पड़ेगा.

बारिश के मौसम में अपना ख्याल कैसे रखें How To Take Care Ourself In Rainy Season

✔ काफी समय तक भीगने से हर हाल में बचें. यदि कहीं ऐसा मौका आ जाए, तो कम से कम सिर को तो अवश्य बचाने की कोशिश करें. अगर भीगने से भी ना बच सके, तो किसी टॉवल से पोंछकर जल्दी ही सुखा लें. यदि ऐसा नहीं करेंगे, तो सिर में भारीपन, दर्द आदि महसूस हो सकता है.

✔ जब पानी में नहायें – जैसे नदी, नहर, स्विमिंग पूल, तालाब, पोखर आदि में तो कान में पानी जाने से रोकने की कोशिश करें. ऐसा ना करने पर कान में दर्द, सूजन, बंद होना, जैसा बहना, कम सुनाई देना, जैसे विकार हो सकते हैं. इनसे बचने के लिए नहाने से पहले रूई या ईयर प्लग लगाना अच्छा रहता है.

✔ परिश्रमी व्यक्तियों, जैसे साइकिल चलाना (लंबी दूरी तक), मजदूरी (अधिक देर तक), काफी कपड़े धोना, गोदाम में काम करना, आदि के बाद आने वाले काफी पसीने में भीगने व शरीर गर्म होने पर वर्षा में भीगने से जरूर बचें. ऐसे में स्किन विकार (पित्त, खुजली), बुखार, शरीर में दर्द, और बेचैनी हो सकती है.

✔ शायद ही कोई हो जो वर्षा के सुहावने मौसम में नहाना पसंद ना करता हो. यह स्वाभाविक है, लेकिन जब भी नहाने की सोंचे, पहली वर्षा को बरस जाने दें. इसके बाद बरसने वाली वर्षा में आनंद लेकर नहाए.

✔ इस मौसम में जगह-जगह पानी भरने से गंदगी का आलम बढ़ जाता है. निचले इलाकों में तो जरा सी वर्षा होने पर आसानी से दिखाई देने लगता है. जिससे नालियों, सड़कों की गंदगी, घरों तक में पहुंच जाती है. जिससे पीने का पानी दूषित, वह पैर लगातार भीगे रहने पर अनेक विकार हो सकते हैं.

✔ यह मौसम में फंगल इंफेक्शन पैदा होने का सबसे माकूल समय होता है. जिसका प्रभाव शरीर के जोड़ों (जहां पसीना कम सुख पाता है), मैं अधिक होता है, – जैसे बगल, जांघों के बीच, कोहनी आदि. यहां दाद, खाज, खुजली पैदा हो सकती है.

✔ गंदगी की वजह से मच्छर कीड़े, मकोड़े, सांप, बिच्छू आदि की उपस्थिति बढ़ जाती है. क्योंकि गर्म जमीन पर पानी गिरने से भभक निकलती है, जिससे ये जीव अपने बिलों से बाहर निकल आते हैं. रुके पानी के कारण, मच्छरों की पैदावार बढ़ जाती है, जिससे मलेरिया बुखार, सर्प दंश आदि के अवसर पर सकते हैं.

बारिश में होने वाले विकारों से बचने के उपाय Barish Me Hone Vali Problems Se Bachne Ke Upay

➔ भीगने से बचने के लिए छतरी का प्रयोग, रेन कोट, ट्राउजर व कैप आदि का प्रयोग सबसे अच्छा तरीका है. ऐसा करने से वाहन चलाते समय भीगते हुए अपने काम को अंजाम देने व आकस्मिक घटना का सामना करने मैं भी कम परेशानी होगी.➔ एकाएक आई वर्षा का सामना करते समय एक छोटे पॉलीबैग, द्वारा सिर को जरूर भीगने से बचा लें.

➔ बुखार आने पर देसी घी माथे पर मले और बाद में गीले सूती मोटे हल्के रंग वाले कपड़े की पट्टी माथे पर रखें. जिससे तापमान में गिरावट आएगी, बुखार की तेजी में उस ठंडे पानी वाली पट्टी को जल्दी बदले, बुखार कम हो जाएगा.

➔ जुकाम में गुनगुना (हल्का गर्म) सरसों का तेल, छोटी अंगुली द्वारा नाक के दोनों छेदों में डालकर सांस ऊपर खींचें. इससे बंद नाक खुल जाएगी.

➔ कान दर्द में सूती कपड़े को गर्म कर बाहर से सेक करें.

➔ पेट फूले या दर्द हो, तो चम्मच में थोड़ी हींग, पानी के साथ घोलकर नाभि पर रखकर सूती कपड़े से सिकाई करें.

➔ दस्त, मरोड़, आंव या मल के साथ खून आए, तो मरीज को पीने योग्य थोड़ा-थोड़ा जल्दी-जल्दी पानी पीने को दे. इसके अलावा इलेक्ट्राल, ORS घोल, ग्लुकोज, मट्ठा, दही, जौ का पानी, सत्तू आदि दें.

➔ खुजलाहट होने पर, उस अंग की खाल पर कोकोनट का तेल या देसी घी की मालिश करें. नमकीन चीजों का सेवन कम करें.

➔ गीले, नमी, सीलन वाले कमरे या मकान, जिसके पास कोई पोखर, नदी, नाला आदि हो और जहां धूप, हवा ना आती हो, ऐसी जगह पर कतई ना रहें. यदि रहते हों तो जल्दी से जल्दी बदल दें.

बारिश से सम्बंधित अन्य जानकारियां – 

बारिश से फायदे और नुकसान Barish Ke Fayde Aur Nuksaan

  1. कोई घटना हो या मौसम हो इसके दो पहलू होते है जैसे कि इनसे लाभ भी होते हैं और हानि भी.
  2. वर्षा यदि समय से और जरूरत के हिसाब से हो तो अमृत के समान होती है. यदि वह अधिक हो जाए, तो विष के समान लगने लगती है. वर्षा, पृथ्वी पर पानी का बहुत बड़ा स्रोत है. समय पर पर्याप्त हुई वर्षा से, किसानों की बांछें खिल उठती हैं. क्योंकि उसमें लवण एवं आसुत जल होता है, जो कि जमीन वह फसल को उपजाऊ बनाता है.
  3. बारिश का पानी, डिस्टिल वाटर होने के कारण, यह पीने तथा बैटरी में डालने के काम भी आता है. उसके लिए वर्षा होने पर, सभी चौड़े बर्तनों को छतों पर रखकर इकट्ठा किया जाता है और छानकर बड़े पात्र या खाली कांच की बोतलों में रखा जा सकता है. अधिक वर्षा से किसान के दिल की धड़कन बढ़ती है. बाढ़ आने से किनारे रहने वालों का जीवन भी प्रभावित होता है. निचले इलाकों की दिनचर्या काफी परेशानियों वाली हो जाती है. घरों में पानी भरने से लोगों की नींद हराम हो जाती है. जिससे नाली की गंदगी से बीमारी फैलने के अवसर भी बढ़ जाते हैं.
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