हार्निया का घरेलू उपचार Hernia Ka Desi ilaj in Hindi

Hernia Treatment In Ayurveda

हार्निया का घरेलू उपचार Hernia Ka Desi ilaj in Hindi – आमतौर पर हार्निया होने का कारण पेट की दीवार का कमजोर होना है | पेट और जांघों के जोड़ वाले भाग में जहां पेट की दीवार कमजोर पड़ जाती है वहां आंत का एक गुच्छा उसमें छेद बनाकर निकल आता है | आंत का कुछ भाग किसी अन्य भाग से भी जहां पेट की दीवार कमजोर होती है, बाहर निकल सकता है | परंतु ऐसा बहुत कम होता है | आंत का गुच्छा बाहर निकलने से उस स्थान पर दर्द होने लगता है | इसी को हार्निया अथवा आंत्रवृद्धि कहते हैं |

हार्निया का कारण Causes of Hernia

अत्यधिक श्रम, अपनी शक्ति से अधिक भारी वस्तु उठाना, निरंतर खांसते रहना अथवा शौच के समय मल त्यागने के लिए जोर लगाने से भी हर्निया हो जाता है | अधिक मोटे व्यक्ति को पेट पर अधिक जोर डालने से भी हार्निया होने की संभावना रहती है | ऑपरेशन होने के बाद भी हार्निया होने की संभावना रहती है | गर्भावस्था में पेट पर जोर पड़ने से भी हार्निया हो सकता है | परंतु यह रोग सामान्यतया पुरुषों को अधिक होता है |

हार्निया के लक्षण Symptoms of Hernia

हार्निया की प्रारंभिक स्थिति में पेट की दीवार में कुछ उभार सा पैदा हो जाता है | इस आगे बढ़ी हुई आंत को धीरे से पीछे भी धकेला जा सकता है | परंतु इसे अधिक जोर लगाकर पीछे धकेलने का प्रयत्न नहीं करना चाहिए |

हार्निया का घरेलू उपचार Hernia Ka ilaj in Hindi

1. यदि आगे बढ़ी आंत को आराम से पीछे धकेलकर अपने स्थान पर पहुंचा दिया जाए तो उसे उसी स्थिति में रखने के लिए कसकर बांध दिया जाता है | यह विधि कारगर न हो सके तो ऑपरेशन करना पड़ता है |

2. हार्निया के रोगी के लिए आवश्यक है कि वह कब्ज न होने दे वर्ना मल त्यागते समय उसे जोर लगाने की आवश्यकता पड़ेगी |

3. अपच होना भी हार्निया के रोगी के लिए हानिकारक है |

4. पेट यदि बहुत बढ़ा हुआ हो तो उसे भी घटाने का प्रयत्न करना चाहिए |

5. अरंडी के तेल को एक कप दूध में डालकर पीने से हर्निया ठीक हो जाता है | इसका प्रयोग एक मास तक करें |

6. टमाटर का रस, थोड़ा नमक और कालीमिर्च मिलाकर प्रात:काल पीने से जहां अन्य अनेक लाभ होते हैं वहीं हर्निया ठीक होने में भी सहायता मिलती है |

7. कॉफी के प्रयोग से भी बढ़ी हुई आंत का फोड़ा ठीक हो जाता है |

loading...

4 Comments

  1. Mera 3 cm long harnia hai isase main chhut kara pana chahta hu .me chahta hu ki mujhe sarjari na karana padh iska koi aasan or gharelu upay bataye or homeopathy mein medicine batayein

  2. mare 3 years old boy ko harnia right undcos mai ho gya hai. poty karna mai kafi problem hoti hai. mai harniya ki bimari se chhut kara pana chahta hu .me chahta hu ki mujhe sarjari na karana padh iska koi aasan or gharelu upay bataye

    vdashu@yahoo.co.in

  3. हर्निया क्या है इसका देसी इलाज | Hernia ka Upchaar
    अन्त्र्वृधिकी बीमारी का ईलाज : – यह बीमारी किसी भी मनुष्य को हो सकती है वो चाहे स्त्री हो या पुरुष | इस बीमारी में गुहाओं की झिल्ली फट जाती है और इसका कुछ भाग बाहर की तरफ निकल जाता है | इस बीमारी का होने का मुख्य कारण मनुष्य की आंत्र गुहा का कमजोर होना है | यह बीमारी शरीर के किसी भी हिस्से में हो जाती है | इस रोग का ईलाज आयुर्वेद चिकित्सा के द्वारा किया जाता है |

    सामग्री : –

    सर्वकल्प क्वाथ :- ३०० ग्राम

    बनाने की विधि :- किसी बड़े बर्तन में ४०० मिलीलीटर पानी की मात्रा लें | इस पानी में एक चम्मच सर्वकल्प क्वाथ मिलाकर धीमी – धीमी आंच पर पकाएं | कुछ देर पकने के बाद जब इस पानी की मात्रा १०० मिलीलीटर रह जाए तो इसे छानकर सुबह और शाम के समय खाली पेट पीयें | इस उपचार का प्रयोग करने से इस बीमारी से छुटकारा मिल जाता है |

    सामग्री : –

    त्रिकटु चूर्ण :- २५ ग्राम

    प्रवाल पिष्टी :- १० ग्राम

    गोदन्ती भस्म :- १० ग्राम

    इन सभी आयुर्वेदिक औषधियों को आपस में मिलाकर एक मिश्रण बना लें | इस मिश्रण की बराबर मात्रा में ६० पुड़ियाँ यानि दो महीने की खुराक तैयार कर लें | इस तैयार औषधी को किसी डिब्बे में बंद करके सुरक्षित जगह पर रख दें | रोजाना एक पुड़ियाँ सुबह नाश्ता करने से आधा घंटा पहले ले और एक पुड़ियाँ रात को खाना खाने से आधा घंटा बाद खाएं | इन औषधियों का सेवन ताज़े पानी के साथ , शहद के साथ या गाय के दूध के साथ खाएं | ऐसा करने से इस बीमारी से जल्दी छुटकारा मिल जाता है |

    सामग्री : –

    कांचनार गुग्गुलु :- ६० ग्राम

    वृद्धिवाधिका वटी :- ४० ग्राम

    इन दोनों आयुर्वेदिक औषधी की दो – दो गोली का सेवन दिन में दो बार सुबह के समय और रात के समय खाना खाने के बाद हल्के गर्म पानी के साथ खाएं | इन गोलियों का सेवन उपर बताएँ गये उपचार के साथ करे |

    स्वमूत्र चिकित्सा – इस बीमारी में व्यक्ति को अपना पेशाब पीने से भी लाभ मिलता है , अपने पेशाब को आरम्भ में निकलने वाला और बाद वाले पेशाब को छोड़कर बीच में आने वाला पेशाब का सेवन करने से भी आपको लाभ मिलेगा, दूध में हल्दी डालकर पीने से भी आराम मिलता है , अधिक ठंडा भोजन न करे,

    सावधानियां –

    अधिक मिर्च मसाले वाले भोजन से बचे ,
    तला हुआ भोजन न करे ,
    अधिक भोजन एक साथ करने से बचे ,
    मांसाहार त्याग दे ,
    तरीदार शब्जी का सेवन करे,
    पतले फुल्के खाये,
    अधिक वसा और चिकनाई युक्त पदार्थों का सेवन करने से बचे ,
    मलाई उतार कर दूध पीये,
    कब्ज न होने दे ,
    वजन को नियन्त्र में रखे ,

Leave a Reply

Your email address will not be published.


*