दमा (अस्थमा) का घरेलू उपचार

Home remedies for asthma

दमा श्वास संबंधी एक गंभीर रोग है। इस रोग में श्वास नली में सूजन आने या फिर उसमें कफ जमने के कारण रोगी को सांस लेने में कठिनाई होती है। यह रोग जब गंभीर अवस्था में होता है तो काफी घातक साबित होता है।

दमा (अस्थमा) होने का कारण

दमा प्रमुख रूप से एलर्जी के कारण होता है। यह एलर्जी धूल, मिट्टी, धूप, सर्दी, गर्मी, बरसात या सौंदर्य प्रसाधन में से किसी से भी हो सकती है। मानसिक परेशानी, मौसम व तापमान में हुए परिवर्तन के कारण भी यह रोग हो सकता है। प्रातः देर तक सोना, फ्रिज में रखी बासी वस्तुएं खाना, फेफडों में संक्रमण, अधिक समय तक खांसी रहना तथा ठंडी हवा के प्रभाव से भी दमा हो जाता है। दमा किसी भी आयु के व्यक्ति को हो सकता है परंतु ज्यादातर इसकी शुरुआत बचपन से ही हो जाती है।

दमा (अस्थमा) होने का लक्षण

रोगी की सांस फूलना इस रोग का प्रमुख लक्षण है। इस रोग में रोगी को सांस लेने में काफी कठिनाई होने लगती है। बेचैनी बढ़ जाती है। कई बार रोगी को तेज खांसी का दौरा भी पड़ जाता है। हृदय की गति तेज हो जाती है तथा रोगी कुछ भी बोलने में असमर्थ हो जाता है।

दमा (अस्थमा) का उपचार

Home remedies for asthma

1. मौसमीः दमा होने पर मौसमी के रस में उससे आधा भाग पानी व सोंठ, जीरा मिलाकर पिलाने से लाभ होता है।

2. अंजीरः दमा के रोगियों के लिए अंजीर अमृत समान माना जाता है। दमा में खासकर बलगम वाले दमा में अंजीर खाने से लाभ होता है। रोगी यदि अंजीर का नियमित प्रयोग करता रहे तो बलगम आसानी से बाहर आ जाता है तथा रोगी आराम महसूस करता है। प्रयोग से पहले अंजीर को अच्छी तरह धो लें। सूखे अंजीर का कठोर छिलका धोने से मुलायम हो जाता है। जिस पानी में अंजीर को भिगोया जाए उस पानी को भी पी लेना चाहिए। इससे भी दमे में बहुत लाभ होता है।

3. आंवलाः सूखा आंवला और मुलहठी को अलग-अलग पीसकर खूब बारीक चूर्ण बना लें, उन्हें मिलाकर रख लें। इस चूर्ण को प्रतिदिन एक चम्मच दिन में दो बार खाली पेट लें। इससे दमे में अत्यंत लाभ होगा।

4. अंगूरः 30-40 ग्राम अंगूर का रस गरम करके रोगी को पिलाने से दमे में तुरंत लाभ होता है। अंगूर खाना भी लाभदायक है। यदि थूक के साथ रक्त आता हो तो भी अंगूर का सेवन असर करेगा।

5. चकोतराः दमे के रोगी चकोतरे की चार-पांच बोतलें शरबत बना लें। सर्दी या बरसात का मौसम हो तो इसे बिना पानी डाले ही चाटते रहिए। इससे खांसी तो थमेगी ही, दमा भी जाता रहेगा। दमे का प्रकोप ज्यादा हो तो इस शरबत को थोड़ा-थोड़ा करके 8-10 बार चाटिए, काफी आराम मिलेगा। चकोतरे के रस में खटास अधिक हो तो इसमें थोड़ा शहद मिला दें। दमे के दौरान बलगम ज्यादा आता हो तो आम की गिरी के चूर्ण की पांच ग्राम मात्रा को इस शरबत में मिलाकर चाटने से आराम मिलेगा।

6. खजूरः खजूर खाने से दमे में बहुत लाभ होता है।

7. ईसबगोलः ईसबगोल की भूसी दमे की कारगर औषधि है। यदि 5-6 माह तक ईसबगोल की भूसी की फंकी गर्म पानी के साथ सुबह-शाम ली जाए तो यह काफी प्रभावी असर करती है। इसी प्रकार एक-दो वर्ष तक यह नियम बना लिया जाए तो कैसा भी दमा क्यों न हो ठीक हो जाता है। परंतु यह ध्यान रखें कि इसके सेवन के समय परहेज के तौर पर चावल, गुड़, तेल, खटाई व तले हुए पदार्थ न लें। दमे से मुक्ति के बाद भी छह माह तक यह परहेज जारी रखें।

8. केला: एक अच्छा केला लेकर उसका छिलका निकाले बिना लगाएं और थोड़ा सा सेंधा नमक और काली मिर्च का चूर्ण भरकर चांदनी रात में रख दें।’सुबह इस केले को आग में भूनकर खाएं| दमा ठीक हो जाएगा। वैसे दमा के रोगियों को केला नहीं खाना चाहिए क्योंकि खाली केला खाना दमे के रोग को बढ़ावा देता है।

9. अदरकः अदरक का रस शहद के साथ लेने से वृद्धावस्था का दमा ठीक हो जाता है।

10. गाजरः गाजर का सेवन दमा में लाभदायक है। नियमित रूप से गाजर के सेवन से लाभ होता है। गाजर का हलवा भी विशेष लाभकारी है। प्रतिदिन सुबह तथा दोपहर एक-एक गिलास गाजर का रस पीने से दमे में शीघ्र लाभ होता है। यदि एक माह तक नियमित गाजर का रस पी लिया जाए तो दमा विदा ले लेता है। गाजर का रस दूध में मिलाकर पीने से भी लाभ होता है।

11. शलगमः शलगम, गाजर, सेम व बंदगोभी का रस मिलाकर सुबह-शाम नियमित दो सप्ताह तक पीने से दमे में काफी लाभ होता है। शलगम को पानी में उबालकर इस पानी को छानकर पीएं। इसमें शक्कर भी मिलाई जा सकती है।

12. नीबू: दमे का दौरा पड़ने पर गर्म पानी में नीबू मिलाकर पीने से बहुत लाभ होता है।  दमे के रोगी को नित्य प्रात: एक नीबू, दो चम्मच शहद और एक चम्मच अदरक का रस एक कप गर्म पानी में मिलाकर पिलाने से काफी आराम मिलता है।

13. बेल: बेल की पत्तियों का काढ़ा तैयार करके 10-10 ग्राम मात्रा में सुबह-शाम शहद के साथ मिलाकर पीने से दमे में काफी राहत मिलती है।

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