जोड़ो में दर्द का घरेलू प्राकृतिक उपचार

जोड़ो में दर्द है तो “वात” बढ़ने न दें

आस्टियो – आर्थराइटिस जोड़ो में सीनोविअल द्रव सूख जाने के कारण होता है| आयुर्वेद के अनुसार यह सूखापन मुख्यतः वात दोष के बढ़ जाने के कारण होता है| वात, मस्तिष्क और शारीर के बीच संतुलन बनाये रखने के लिए जिम्मेदार है| शरीर में असंतुलन के कारण आवश्यकता से अधिक वात, जोड़ो के आस पास इकठ्ठा हो जाता है | इसी के कारण सूखापन पैदा होता है और आस्टियो-आर्थराइटिस होने का खतरा बढ़ जाता है | इसके लिए निश्चित अवधि के उपचार और जीवनशैली में बदलाव कि सलाह दी जाती है |

ऐसा करने से शरीर के प्रभावित हिस्से के ऊतकों को नई ताकत मिलती है | इसके लिए सबसे जरुरी है वात को शांत करना | इसके बाद पंचकर्म और उपचार कि ज़रूरत होती है | साथ ही आहार संबंधी परहेज भी ज़रूरी है |

आपको खाने में ताज़ी, पकी हुई सब्जियां, दालें और सूप आदि लेना चाहिए | यदि आप आस्टियो-आर्थराइटिस से पहले से ही ग्रस्त हैं, तो सप्ताह में कम से कम एक बार काले चने अपने भोजन में ज़रूर शामिल करें | आपके खाने में सेंधा नमक होना भी ज़रूरी है | दोष के अनुसार हल्क़े मसाले भी प्रयोग किये जा सकते हैं | भोजन में घी और तेल का होना भी ज़रूरी है, क्योंकि ये आप के जोड़ो को चिकनाहट प्रदान करते है | लेकिन इसकी मात्रा डॉक्टर के कहे अनुसार ही लें | ठंडी सूखी चीज़ों के साथ साथ तली हुई और बहोत अधिक चिकनी चीज़ें खाने से परहेज़ करें | कड़वे पदार्थों को भी अपने आप से दूर रखें |कुल मिला कर ताज़ा पका हुआ खाना ही लें |

खान पान के साथ पंचकर्म उपचार भी किया जाता है, जिसके ज़रिये विषैले पदार्थों को शरीर से बाहर निकला जाता है | इसमें औषधीय तेलों से मालिश और प्रभावित हिस्सों कि सिंकाई कि जाती है |

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