महिलाओं में रक्त प्रदर तथा श्वेतप्रदर का घरेलू इलाज

Home remedies for leucorrhoea treatment

कारण यह एक ऐसा रोग है जो अधिकांश महिलाओं में पाया जाता है। महिलाओं का प्रदर रोग ठीक उसी तरह होता है जैसे पुरुषों में प्रमेह रोग। प्रदर होने के कई कारण होते हैं-योनिमार्ग में संक्रमण, घाव, शारीरिक दुर्बलता, भोजन में अनियमितता, शराब व मांस का सेवन, अजीर्ण रहना, दिन में सोना और रात में जागना, विलासी जीवन जीना, अनेक तरह से असंयमित मैथुन करना, मानसिक तनाव तथा अति शोक व दुख करना आदि। मासिक धर्म में अनियमितता के कारण भी प्रदर रोग हो जाता है।

प्रदर दो प्रकारका होता है: 1. श्वेतप्रदर  2. रक्तप्रदर।

 श्वेतप्रदर का कारण व लक्षण

श्वेतप्रदर में योनिमार्ग से पीला व सफेद, चिकना, बदबूदार लिसलिसा स्राव होता रहता है, जबकि रक्तप्रदर में भारी मात्रा में तथा ज्यादा समय तक रक्तस्राव होता रहता है। प्रदर रोग से ग्रस्त रहनेवाली स्त्री का स्वास्थ्य बिगड़ जाता है तथा उसका शरीर लगातार कमजोर होता चला जाता है।

श्वेतप्रदर का उपचार

1. अंगूरः श्वेत प्रदर होने पर महिलाओं को चाहिए कि 100 ग्राम अंगूर नित्य खाएं। इससे मासिक धर्म भी नियमित समय पर आता है तथा श्वेत प्रदर भी समाप्त हो जाता है। दो केले खाकर इसके पश्चात दूध में शहद मिलाकर पीने से श्वेत प्रदर में लाभ होता है।

2. केला: दूध में केले की खीर बनाकर खाने से भी इस रोग में लाभ होता है।

3. ईसबगोलः सफेद मूसली या ईसबगोल की भूसी को शरबत के साथ खाने से भी प्रदर रोग में लाभ होता है।

4. सिंघाड़ाः श्वेत प्रदर में यदि महिलाएं नियमित रूप से सिंघाडे के आटे का हलवा बनाकर खाती रहें तो उनके गर्भाशय को बल मिलता है तथा प्रदर रोग भी ठीक हो जाता है।

5. जामुनः जामुन की ताजी हरी छाल को सुखाकर बारीक करके सुबह-शाम 4-4 ग्राम की मात्रा में बकरी के दूध के साथ खाएं तो प्रदर में बहुत लाभ होता है। जामुन का रस भी लाभदायक है।

6. अंजीरः श्वेत प्रदर में अंजीर का नियमित सेवन काफी लाभदायक है। आमः आम की गुठली की गिरी का दो-दो ग्राम चूर्ण दिन में तीन बार पानी के साथ निगलने से बहुत लाभ होता है।

7. आंवलाः तीन ग्राम आंवले का चूर्ण लगभग छह ग्राम शहद में मिलाकर नित्य एक बार लेने से श्वेत प्रदर ठीक हो जाता है। यह उपचार एक माह तक नियमित करें व इस दौरान खटाई से परहेज रखें। 20 ग्राम आंवले का रस शहद में मिलाकर पीने से एक माह में श्वेत प्रदर समाप्त हो जाता है। एक चम्मच पिसा हुआ आंवला एक चम्मच शहद में मिलाकर पीने से भी प्रदर ठीक हो जाता है।

8. फालसाः फालसे का शरबत नियमित रूप से पीने से शवेत प्रदर में काफी फायदा होता है।

9. चुकंदरः लगभग 100 ग्राम गाजर के रस में 25 ग्राम चुकंदर का रस मिलाकर पीने से श्वेत प्रदर ठीक हो जाता है।

10. छुहाराः छुहारों की गुठलियों को कूट-पीसकर महीन चूर्ण बना लें। इस चूर्ण को शुद्ध घी में अच्छी तरह भून लें तथा किसी शीशी में भरकर रख लें। इसे एक-एक चम्मच सुबह-शाम खाएं श्वेत प्रदर पूर्णतया समाप्त हो जाएगा।

रक्त प्रदर का कारण

रक्त प्रदर होने के कई कारण हैं जिनमें अति मैथुन करना, ऋतुकाल में सहवास करना, अधिक नमकीन, खट्टे व तेज मिर्च-मसालेदार भोजन व मांसाहारी व्यंजनों का अतिसेवन उल्लेखनीय है। इसके अलावा गर्भपात व अपथ्य पदार्थों के सेवन से भी यह रोग हो जाता है।

रक्त प्रदर के लक्षण

ऋतुकाल में ज्यादा रक्तस्राव, जांघों व पिंडलियों के अलावा पेट में, नाभि क्षेत्र के नीचे तेज दर्द होना, चेहरा पीला पड़ जाना व रक्ताल्पता इस रोग के प्रमुख लक्षण हैं।

रक्त प्रदर का उपचार

1. केलाः पके हुए केले को दूध में कई बार सानकर कुछ दिनों तक (लगभग 15 दिन) नित्य सेवन करने से योनि से बहता हुआ रक्त रुक जाता है।

2. सिंघाड़ाः सिंघाडे के आटे की रोटी बनाकर खाने से रक्तप्रदर मिट जाता है। नियमित ताजा सिंघाडे खाना भी इस रोग में लाभप्रद है।

3. बेलः 10 ग्राम बेल की गिरी, 10 ग्राम रसौत और नागकेसर पीसकर-छानकर शीशी में भर लें। चावल के मांड के साथ पांच ग्राम चूर्ण खाएं। यह उपचार दिन में तीन बार करें। एक-दो सप्ताह में रक्तप्रदर ठीक हो जाएगा।

4. तरबूजः तरबूज के लाल बीज और मिश्री एक-एक तोला पीसकर पानी के साथ खाने से रक्तप्रदर समाप्त हो जाता है।

5. अनारः अनार के सूखे छिलके पीसकर छान लें। इसकी एक चम्मच मात्रा ठंडे पानी के साथ दिन में दो बार खाने से इस रोग का प्रभावी उपचार हो जाता है।

6. गन्नाः गन्ने का रस पीने से रक्तप्रदर में लाभ होता है।

7. आंवलाः नियमित एक आंवला जरूर खाएं, काफी लाभ होगा।

8. चुकंदरः चुकंदर का रस पीने से रक्तप्रदर में लाभ होता है।

9. गाजरः नित्य एक गिलास गाजर का रस पीएं। एक माह तक इस उपाय को आजमाएं। रक्तप्रदर मिट जाएगा।

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