गर्भस्राव व गर्भपात रोकने के घरेलू उपचार

किसी कारणवश यदि स्त्री का गर्भ गिर जाए तो वह गर्भस्राव व गर्भपात के नाम से जाना जाता है। यदि गर्भ गिरने के समय गर्भस्थ शिशु चार माह का हो तो उसे गर्भस्राव तथा पांच या छह माह का हो तो उसे गर्भपात कहा जाता है |

कारण

गर्भावस्था में असंयमित रूप से सहवास करने, अति मैथुन करने, गर्भाशय की कमजोरी, गर्भावस्था में चोट के कारण, ज्यादा श्रम, वजन उठाने के कारण गर्भपात हो जाता है।

लक्षण

गर्भ योनि मार्ग से रक्त में मिश्रित होकर बाहर निकल जाता है। इस समय गर्भाशय में तीव्र पीड़ा होती है तथा थकान व कमजोरी आ जाती है।

उपचार

अनारः 100 ग्राम अनार के ताजा पत्ते पीसकर पानी में छानकर पीने से तथा इन पत्तों का रस पेडूपर लेप की तरह लगाने से गर्भस्राव रुक जाता है।

सिंधाड़ाः गर्भाशय की निर्बलता के कारण गर्भ नहीं ठहरता हो तथा गर्भस्राव या गर्भपात हो जाता हो तो कुछ सप्ताह ताजा सिंघाडे खाने चाहिए। इससे काफी लाभ होता है।

शरीफाः अनचाहा गर्भ ठहर गया हो तो शरीफे के चूर्ण की बत्ती योनि में रख लें, गर्भपात हो जाएगा।

नाशपातीः नाशपाती खाने से गर्भाशय की दुर्बलता दूर हो जाती है।

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