प्रसव में विलम्ब होने पर क्या करें

कारण व लक्षण :

प्रसव में विलंब एक गंभीर समस्या है। प्रसव ऐसा समय होता है जब नारी को नया जन्म मिलता है। प्रसव में अधिक विलंब से गर्भ में पल रही संतान व माता दोनों को खतरा हो सकता है। प्राय: प्रसव में विलंब मांसपेशियों की शिथिलता तथा गर्भस्थ शिशु की निष्क्रियता के कारण होता है|

उपचार

गन्नाः गन्ने का बना ताजा गुड़ तथा गरी खाने से प्रसव काल के दौरान होनेवाली गर्भाशय की पीड़ा कम हो जाती है।

केलाः कुछ वैद्यों का मानना है कि केले की गांठ को कमर में बांध देने से प्रसव शीघ्र होता है तथा प्रसव पीड़ा में भी कमी आती है।

पीड़ारहित प्रसव

पीड़ारहित प्रसव होना असंभव है क्योंकि शिशु को जन्म देने के लिए योनि का विस्तार आवश्यक है और विस्तार पीड़ाहीन नहीं हो सकता। किंतु उचित आहार-विहार व व्यायामों के द्वारा प्रसव की पीड़ा को काफी हद तक कम किया जा सकता है, मांसपेशियों को इतना मजबूत बनाया जा सकता है कि प्रसव पीड़ा कम-से-कम हो। यहां दिए जा रहे उपचार के अलावा गर्भवती महिला को चाहिए कि सुबह-शाम नियमित रूप से दो-दो घंटे पैदल घूमे। इससे प्रसव पीड़ा बहुत कम होगी।

नीबूः यदि गर्भधारण के चौथे माह से प्रसवकाल तक गर्भवती स्त्री एक नीबू की शिकंजी नित्यपीए तो प्रसव के दौरान होनेवाली पीड़ा में काफी कमी जाती है तथा प्रसव बिना कष्ट के संपन्न हो जाता है।

नारियलः नारियल का गोला और मिश्री को 25-25 ग्राम की मात्रा में मिलाकर नित्य खाएं प्रसव सरलता से निर्विघ्न सम्पन्न हो जाएगा।

शक्तिवर्धक पौष्टिक योग

सामग्रीः बादाम गिरी 200 ग्राम, बबूल का गोंद 50 ग्राम, शक्कर काबूरा 250 ग्राम तथा आवश्यकतानुसार शुद्ध घी।

विधिः बादाम को पानी में गलाकर छिलका हटाकर सुखा लें। गोंद को घी में तलकर बारीक पीस लें। इसमें बादाम मिलाकर शक्कर मिला दें। इसे किसी जार में भर लें। प्रतिदिन सुबह दो चम्मच मात्रा में इसे खाकर एक कप मीठा दूध पी लें। इसके तीन घंटे बाद ही भोजन करें। शाम को भोजन के दो घंटे बाद एक चम्मच यह खुराक लें। इसके नियमित सेवन से महिलाओं का शरीर हृष्ट-पुष्ट हो जाता है।

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