टायफाइड (मियादी बुखार) का घरेलू इलाज

Home remedies for typhoid cure

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टायफाइड (मियादी बुखार) का कारण

बुखार जब बिगड़ जाता है तो वह टायफाइड का रूप धारण कर लेता है। टायफाइड एक प्राणघातक ज्वर है, इसे सबसे खतरनाक ज्वर माना जाता है|  टायफाइड एक प्राणघातक ज्वर है, इसे सबसे खतरनाक ज्वर माना जाता है | यह रोग प्रमुखत: गंदगी तथा आंतों में घाव हो जाने के कारण  होता है।

टायफाइड (मियादी बुखार) का लक्षण

इस ज्वर में रोगी का सारा शरीर टूट जाता है व बुखार 104″ से 105″ तक पहुंच जाता है। यह रोग प्रथम दो सप्ताह तक बढ़ता है, फिर उसके पश्चात ही उतरना शुरू होता है। इसमें रोगी का सारा शरीर सूखता चला जाता है व रोगी हड्डियों का ढांचा मात्र बनकर रह जाता है।

टायफाइड (मियादी बुखार) का उपचार

1. केला: टायफाइड आतों का ज्वर होता है। यदि इस रोग में रोगी को भोजन के रूप में केला दिया जाए तो रोग को जल्दी दूर किया जा सकता है। इसके सेवन से रोगी को शक्ति तो मिलती ही है, साथ ही रोग के बाद होनेवाली कमजोरी भी दूर हो जाती है।

2. सेवः आंतों के स्वास्थ्य को उत्तम रखने के लिए सेव का रस उत्तम औषधि है। बुखार चढ़ते ही संतरे के रस में सेव का रस मिलाकर पीना शुरू कर दें। यदि नियमपूर्वक इस मिश्रित रस का सेवन किया जाए तो टायफाइड अपनी पहली मियाद के बाद ही समाप्त हो जाता है।

3. मौसमीः टायफाइड में मौसमी के रस का सेवन भी लाभदायक है।

4. बेलः बेल की 25 ग्राम पत्तियां तोड़ लें तथा उनको महीन पीसकर 200 ग्राम पानी में उबलने दें। जब उबलकर काढ़ा बन जाए तो इसे ठंडा करके छान लें। यह काढ़ा पांच से दस ग्राम की मात्रा में रोगी को तीन-तीन घंटे बाद दें। तुरंत आराम मिलेगा। काढ़ा पिलाते रहने से शरीर के विषाक्त पदार्थ बाहर निकलेगें  व बुखार कम होता चला जाएगा।

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