योनि रोग के कारण व घरेलू उपचार

योनि रोग के कारण व लक्षण

योनि रोग कई प्रकार के होते हैं। इन रोगों में योनि का कठोर होना, योनि से दाहयुक्त रक्त बहना, मिश्रित रक्त बहना, योनि का अत्यधिक संकुचित होता, योनि में शूल या चींटी रेगने जैसी पीड़ा होना प्रमुख है। वस्तुत: यह सभी रोग अत्यधिक व असंयमित मैथुन का दुष्परिणाम होते हैं, फिर भी ज्यादा परिश्रम, नींद न लेना, क्रोध की अधिकता या योनि में हुए घाव भी इन रोगों को जन्म देते हैं। नियमित योनि की सफाई व संयमित मैथुन से इन रोगों से बचाव किया जा सकता है।

उपचार

जामुनः इलायची, धाय केफूल, मजीठ, जामुन, मोचरस, लाजवंती को कुट-पीसकर बारीक चूर्ण बना लें। इस चूर्ण को योनि में रखने से योनि की दुर्गध, योनि का गीला रहना व लिसलिसापन दूर हो जाता है।

आंवलाः ताजा आवलों का रस निकालकर शक्कर या मिश्री मिलाकर पीएं। तीन दिनों तक इस उपचार को करने से योनि की जलन समाप्त हो जाती है। गिलोय, हरड, आंवला व जमालघोटा को मिलाकर काढ़ा बना लें। ठंडा होने पर इस काढ़े से योनि को धोएं। इससे योनि की खुजली मिट जाती है।

अरंडीः अरंडी के बीजों को नीम के रस में पीसकर गोलियां बना लें। इन गोलियों को योनि में रखने अथवा इन्हें पानी के साथ पत्थर पर पीसकर योनि में लेप करने से योनिशूल दूर हो जाता है।

विशेष टिप्पणीः अधिकांश महिलाएं योनि रोगों से घिरी होती हैं। यह बात अलग है कि मान-मर्यादा, संकोची स्वभाव व लाज-शर्म के कारण ऐसा बहुत कम होता है कि योनि रोगों के लिए महिलाएं चिकित्सकों का परामर्श लेती हैं। वस्तुत: योनि रोगों का प्रमुख कारण यह माना जाता है कि स्त्रियां योनि को अंदर से धोने का ख्याल नहीं रखतीं जबकि विशेषज्ञों की राय है कि प्रतिदिन स्नान करते समय योनि को पानी व साबुन से भीतर तक अच्छी तरह धोना चाहिए। नित्य सफाई न होने से योनि के भीतरी भाग में मैल जमा हो जाता है जिससे दुर्गध आने लगती है, खुजली चलने लगती है, जलन होने लगती है, सफेद पानी की शिकायत होने लगती है। इसके अलावा भी अन्य कई रोगों का मार्ग प्रशस्त हो जाता है। अत: योनि रोगों से बचने का सबसे उत्तम उपाय उसकी नियमित साफ-सफाई है।

योनि के ढीला होने कारण व लक्षण

अप्राकृतिक व असुविधापूर्ण आसनों में तेज गति से सहवास करने, सहवास में अति करने, कृत्रिम साधनों से मैथुन करने तथा अति प्रसव करने के साथ-साथ शारीरिक कमजोरी के कारण कई स्त्रियों का योनिमार्ग ढीला तथा अत्यधिक विस्तीर्ण हो जाता है। जिससे सहवास करते समय सुख व आनंद की प्राप्ति नहीं होती।

उपचार

माजूफलः माजूफल का चूर्ण 30 ग्राम तथा फिटकरी व कपूर 3-3 ग्राम मात्रा में पीसकर तीनों को मिला लें। इस चूर्ण को एक महीन मखमल के साफ-सफेद कपड़े में रखकर छोटी-सी पोटली बनाकर मजबूत धागे से बांध दें। यहां ध्यान रखें कि पोटली से बंधा धागा लंबा रहे ताकि धागे को खींचकर पोटली बाहर खींची जा सके। रात को सोते समय इस पोटली को पानी में डुबोकर गीला कर लें एवं योनिमार्ग में अंदर तक सरका कर रख लें तथा सुबह निकाल कर फेंक दें।

यह प्रयोग कुछ दिनों तक करने से योनि तंग व सुदृढ़ हो जाएगी। मैनफल, मुलहठी और माजूफल को अलग-अलग कृट-पीसकर 50-50 ग्राम वजन में लेकर मिला लें। अब इसमें 25 ग्राम कपूर पीसकर मिला लें। अमलतास वृक्ष की छाल लाकर घर में रखें। छाल का एक टुकड़ा मोटा-मोटा कृटकर गिलास भर पानी में डालकर रात को रख दें। सुबह स्नान के समय मसल-छानकर इस पानी को योनि के भीतर डालकर अच्छी तरह धोएं। इसके पश्चात उपरोक्त चूर्ण की एक चम्मच मात्रा में थोड़ा शहद मिलाकर मोटा गाढ़ा लेप बनाकर योनि के अंदर अच्छी तरह से मल दें। यह प्रयोग कुछ दिनों तक करने से योनि पहले सी तंग व मजबूत हो जाएगी।

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