बवासीर का घरेलू इलाज

वातादि दोष जब कुपित होकर त्वचा, मांस तथा मेद को दूषित कर गुदा में मांस के अंकुर उत्पन्न करते हैं तो उसे बवासीर कहा जाता है। आयुर्वेद में वात, पित्त या कफ में से किसी के कुपित होने से बवासीर होना बताया गया है। कुछ समय पहले तक यह बीमारी काफी कम देखने को मिलती थी कितु आज पाश्चात्य प्रभाव व खानपान के नित बदलते तरीकों से भारी संख्या में वयस्क इससे ग्रस्त हैं। बवासीर होने का प्रमुख कारण कब्ज है। लंबे समय तक कब्ज बने रहने से बवासीर होने की संभावनाएं बढ़ जाती हैं। कब्ज रहने के साथ पित्त का प्रकोप या अम्लपित्त काफी लंबे समय तक बना रहे तो खूनी बवासीर हो जाता है। लंबे समय तक कब्ज रहने से मल विसर्जन के समय अधिक जोर लगाने से गुदामार्ग की कोमल रक्तवाहिकाएं सिकुड़ जाती हैं जो धीरे-धीरे फैलकर मोटी हो जाती हैं और बवासीर का कारण बनती हैं।

अनजाने में उपरोक्त गांठे अनेक लोगों को हो जाती हैं। ये गांठे गुदाद्वार के एकदम भीतर होती हैं। जब व्यक्ति मल विसर्जन करता है तो इन गांठों से उसे काफी कष्ट होने लगता है तथा कभी-कभी रक्तस्राव भी हो जाता है। मलत्याग के समय रक्तस्राव इस रोग का सबसे प्रमुख लक्षण है। कई बार बवासीर गुदा के बाहर भी होता है। जिसमें मल विसर्जन के पश्चात मटर के दाने के आकार की गांठे उभर आती हैं जो कुछ समय पश्चात स्वत: ही गुदाद्वार के भीतर खिसक जाती हैं। मलत्याग के दौरान यह गांठे पीड़ादायक होती हैं। कुछ परिस्थितियों में इस रोग के निदान हेतु ऑपरेशन कराना अपरिहार्य हो जाता है।

उपचार

अमरूदः बवासीर के कब्ज को दूर करने के लिए खाली पेट अमरूद खाना लाभदायक है। पके हुए अमरूद में छेद करके दो से छह माशा अजवाइन का चूर्ण भरकर छेद को उसी अमरूद के टुकड़े से बंद कर दें। उसके ऊपर मिट्टी का लेप करके आग में सेक लें। जब अमरूद अच्छी तरह पक जाए तो उसे निकालकर रातभर ओस में रख छोड़े। सुबह उठकर अमरूद की मिट्टी हटाकर चबा-चबाकर खाएं चार-पांच दिन ऐसा करने से बादी बवासीर पूर्णत: समाप्त हो जाता है।

आलूबुखाराः बवासीर के रोगियों के लिए आलूबुखारा उपयोगी फल है। पका हुआ सूखा आलूबुखारा खाने से बवासीर के रोगी को काफी लाभ होता |

नीबूः नीबू के रस को स्वच्छ महीन कपड़े से छानकर उसमें बराबर मात्रा में जैतून का तेल मिला लें। दो ग्राम की मात्रा रात को गुदा में प्रवेश कराएं इससे बवासीर की जलन व दर्द ठीक हो जाता है। गर्म दूध में आधा नीबू निचोड़कर तुरंत पी जाएं, लाभ होगा। कागजी नीबू काटकर उसमें पांच ग्राम कत्था पीसकर लगा दें। इसे रातभर खुला रखकर सुबह चूसें। इससे बवासीर में काफी लाभ होगा।

आमः आधा कप मीठे आम का रस व 25 ग्राम मीठा दही लेकर उसमें एक चम्मच अदरक का रस मिलाकर पीएं। यह मात्रा दिन में तीन बार लें। बवासीर ठीक हो जाएगा। आम की गुठली की गिरी निकालकर पीस-छानकर शीशी में भर लें। यह 250 ग्राम चूर्ण 100 ग्राम छाछ के साथ दिन में तीन बार सेवन कीजिए, बवासीर के मस्से सूखकर शांत हो जाएंगे।

गाजरः 310 ग्राम गाजर के रस में 125 ग्राम पालक का रस मिलाकर पीने से बवासीर में काफी लाभ देखा गया है।

चुकंदर: चुकंदर के नियमित सेवन से बवासीर के मस्से सूखकर मिट जाते हैं|

जायफलः बवासीर की स्थिति में जायफल को देशी घी में भूनकर उसका चूर्ण बना लें। इस चूर्ण में गेहूं का आटा मिलाकर फिर भलीभांति भून लें। इसे प्रात:काल बूरा मिलाकर नित्य दो चम्मच खाएं |

अदरकः 12 ग्राम सोंठ गुड़ के साथ लेने से लाभ होता है। अदरक की गांठ कुचलकर एक कप पानी में डालकर उबाल लें। जब पानी चौथाई कप बचे तब इसे उतारकर ठंडा कर लें। इसमें एक चम्मच शक्कर या मिश्री मिलाकर दिन में एक बार पीने से बवासीर ठीक हो जाता है।

ईसबगोलः जैसा कि पहले बताया जा चुका है बवासीर का प्रमुख कारण कब्ज है। ईसबगोल के प्रयोग से आंतों की सूजन और उनमें किसी भी प्रकार के जख्म की संभावना समाप्त हो जाती है। ईसबगोल के बीजों को पानी में भिगोकर प्रयोग करने से मलद्वार तक आंतों का पूरा मार्ग नरम हो जाता है तथा बवासीर के रोगी को दोहरा फायदा होता है।

पपीताः बवासीर के मस्से पर ताजा कच्चे पपीते का रस कुछ दिनों तक लगातार लगाते रहने से मस्से कटकर गिर जाते हैं।

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