हिस्टीरिया का कारण, लक्षण और घरेलू उपचार

हिस्टीरिया का कारण, लक्षण

यह भी एक प्रकार से पागलपन का ही दूसरा रूप है। यह रोग स्त्रियों में ज्यादा पाया जाता है। इस रोग में भी मिर्गी के दौरे आ सकते हैं। दौरा उठने से पहले सीने में तेज दर्द शुरू होता है। फिर जम्हाई आती है। मानसिक व शारीरिक ग्लानि होकर चेतना नष्ट हो जाती है। कभी-कभी यह भी देखा गया है कि रोगी के पेट के नीचे से एक गोला सा उठकर ऊपर आता है तथा शरीर के किसी भाग में तेज दर्द होने लगता है। आवेश की स्थिति में रोगी हँसता हुआ चीखने-चिल्लाने लगता है, स्वयं को अपराधी मानकर क्षमायाचना करने लगता है।

स्त्रियों में प्राय: यह रोग अनियमित ऋतुस्राव, गर्भाशय की विकृति, पति का निष्ठुर व्यवहार, अवैध आचरण, भय व शोक का आधिक्य, अतृप्त कामवासना आदि के कारण होता है।

हिस्टीरिया का घरेलू उपचार

1. सेव : नियमित रूप से रोगी को सेव खिलाने चाहिए या सेव का रस सुबह-शाम नियमित पिलाना चाहिए।

2. बादाम : रात्रि को 8-10 बादाम पानी में भिगोकर रख दें। सुबह शौच आदि से निवृत्त होकर चबा-चबाकर बादाम खाएं। इससे इस रोग की आशंका काफी कम हो जाती है।

3. अनार : इस रोग में नियमित अनार खाने से लाभ होता है।

4. नीबू : गर्म पानी में नीबू, नमक, जीरा, भुनी हुई हींग व पुदीना मिलाकर पीएं। यह प्रयोग कम-से-कम एक माह तक करें। निश्चय ही रोग नियंत्रण होगा।

loading...

Be the first to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published.


*