गुर्दे की पथरी का देसी इलाज

Kidney Stones Natural Treatment In Hindi

गुर्दो से संबंधित प्रमुख विकार उनमें पथरी हो जाना है | गुर्दो की पथरी कई प्रकार की होती है | बहुत छोटे-Kidney Stones Natural Treatment In Hindiछोटे कणों के अतिरिक्त यह हिरण के सींग जैसी नुकीली और काफी बड़ी भी हो जाती है |

गुर्दे की पथरी का कारण

अधिकांश रोगियों में पथरी के कारणों का स्पष्ट पता नहीं लगता | जिन व्यक्तियों के रक्त में यूरिक अम्ल की अधिकता होती है, उनमें यह क्षार गुर्दे में पथरी का रूप धारण कर लेता है | जिन रोगियों की पैराथॉयराइड ग्रंथि अधिक सक्रिय होती है, उनके रक्त और मूत्र में कैलशियम की मात्रा सामान्य से अधिक होने के कारण पथरी बनने लगती है | गुर्दो में किसी प्रकार का संक्रमण होने से अन्दर के कण टूटकर अलग हो जाते हैं, और उनके गिर्द अन्य कण इकट्टे होने से पथरी का स्वरूप बन जाता है | जो व्यक्ति बीमारी के कारण अधिकांश समय लेटकर बिताते हैं उन्हें तथा गर्म क्षेत्रों में कम पानी पीने वाले लोगों के गुर्दो में भी पथरी बन जाती है |

गुर्दे की पथरी का लक्षण

अनेक बार गुर्दे में पथरी होने का पता ही नहीं चलता | परंतु जब गुर्दे की पथरी मूत्रनली में फंसकर मूत्र के प्रवाह को रोक देती है, तो भयंकर दर्द होने लगता है |

गुर्दे की पथरी का उपचार

पथरी से छुटकारा पाने का सबसे उत्तम उपाय शल्य-क्रिया ही है किन्तु चिकित्सक केवल शारीरिक रूप से स्वस्थ व सबल रोगियों की ही शल्य-क्रिया की सलाह देते हैं | अतः वृद्ध तथा शारीरिक रूप से निर्बल रोगियों को शल्य-चिकित्सा न करवा कर स्वदेशी चिकित्सा का सहारा लेकर निम्न उपचार करने चाहिए |

1. पथरी की चिकित्सा में केले के पेड़ के तने का रस बहुत उपयोगी माना गया है | इससे पथरी गलकर निकल जाती है | इससे पित्ताशय की पथरी भी ठीक हो जाती है | यदि संभव हो तो केले के पेड़ के तने के रस में कपूर का सत भी मिला लें |

2. पथरी की चिकित्सा में अंगूर भी बहुत लाभदायक है | अंगूर में पानी की मात्रा और पोटाशियम अधिक होने के कारण गुर्दे की पथरी ही नहीं पित्ताशय की पथरी में भी लाभ होता है |

3. चुकन्दर के रस में गाजर और खीरे का रस मिलाकर सेवन करने से पथरी घुलकर बाहर निकल आती है | गुर्दे और पित्ताशय से संबंधित अन्य रोगों में भी लाभ होता है |

4. गुर्दे के दर्द में तुलसी और अजवाइन को बराबर मात्रा में लेकर उसमें थोड़ा-सा सेंधा नमक मिलाकर चूर्ण बना लें | प्रातः-सायं इस चूर्ण की दो ग्राम की मात्रा गुनगुने जल से लेने से रोगी की पथरी के दर्द में फौरन आराम होता है |

5. खरबूजे के सूखे हुए छिलके के चूर्ण को पानी के साथ लेने से पथरी के दर्द में आराम होता है |

6. दस ग्राम के लगभग धनिए को रात्रि के समय पानी में भिगो दें | सुबह उसे पीसकर मिश्री मिलाकर सेवन करने से भी पथरी के फलस्वरूप उत्पन्न होने वाली मूत्र की जलन में लाभ होता है |

7. दही में प्याज की चटनी मिलाकर कुछ दिन तक खाने से भी मूत्र की जलन शान्त हो जाती है |

8. मूत्र सरलता से निष्कासित हो, इसके लिए जौ या नारियल का पानी और तुलसी को उबालकर बनाया हुआ पानी और गन्ने का रस पीना लाभदायक है | पथरी के रोगियों के लिए एक सामान्य उपाय यह है कि वे रात्रि को तांबे के बर्तन में रखा हुआ पानी प्रातःकाल पीएं |

9. भोजन के साथ छाछ में धनिए का चूर्ण मिलाकर पीने से भी बहुत लाभ होता है | मूत्र कम अथवा न आने से गुर्दो में दर्द हो, तो भुट्टे के ऊपर के सुनहरी बालों को पानी में उबालकर पीने से मूत्र खुलकर आने लगता है |

10. यदि अन्य किसी भी कारण से मूत्र रुक जाए तो जीरे और मिश्री के चूर्ण की समान मात्रा ताजा जल के साथ सेवन करने से मूत्र की जलन और रुकावट समाप्त होती है | आवश्यकतानुसार दिन में दो-तीन बार इसका उपयोग किया जा सकता है | दोनों की मात्रा समान रखें  |

11. विशेष-यदि गुर्दे की पथरी गुर्दे से निकलकर मूत्र मार्ग में फंसकर पीड़ा उत्पन्न करने लगे तो तुरंत चिकित्सक की सहायता लें |

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