घुटने के दर्द का कारण व उपचार

Knee Pain Treatment In Hindi

Knee Pain Treatment In Hindiघुटने की गठिया से राहत देने के लिए मेडिकल साइंस के पास आज दवा, आपरेशन और घुटनों का प्रत्यारोपण तक तक कई उपाय हैं, लेकिन इन्हें आजमाने से पहले यह जानना जरूरी है कि आपको इनकी जरूरत है भी या नहीं।

आपरेशन के अलावा अन्य विकल्प

अधिकांश लोग घुटने की गठिया की समस्या से सही समाधान का अर्थ घुटना बदलने यानी “नी रिप्लेसमेंट से निकालते हैं । वे बड़ी आसानी से यह मान लेते हैं कि यही पहला व आखिरी उपाय है, जबकि हकीकत यह है कि जोड़ों के दर्द (उम्रदराज गठिया जिसे ऑस्टियो-अर्थराइटिस भी कहते हैं) के मामलों में लगभग नब्बे प्रतिशत लोगों को घुटना प्रत्यारोपण से संबंधित ऑपरेशन की कोई जरूरत नहीं होती । उनके दर्द और मर्ज में कुछ सरल से व्यायामों, पौष्टिक भोजन, जीवन शैली में परिवर्तन और खासतौर पर शरीर का वजन कम करने से काफी राहत मिल सकती है ।

शेष दस प्रतिशत लोगों में भी केवल एक प्रतिशत को ही घुटना बदलवाने की जरूरत होती है, जबकि बाकी लगभग नौ प्रतिशत मरीज घुटने में आए तिरछेपन को एक साधारण सी सर्जरी से सीधा करवाकर स्वस्थ और ताउम्र दर्दरहित जीवन जी सकते हैं । घुटने हमारे शरीर का पूरा भार उठाते हैं और वह भी खड़ी अवस्था में । आप अपना वजन जितना घटा लेंगे, आपके घुटने उतनी ही राहत महसूस करेंगे । लंबे समय तक दर्दनिवारक दवाईयों पर आश्रित रहना कुछ अलग किस्म की समस्याओं को जन्म दे सकता है, इसलिए कोशिश करें कि सही व्यायाम से आपके घुटने और जोड़ गतिशील रहें ।

व्यायामों (exercises) से राहत

आप ज्यादा कुछ नहीं कर सकते तो कुछ किस्म के सरल व्यायाम ही आपको काफी राहत दे सकते हैं | जैसे इस तरह का व्यायाम करें- किसी ऊंची कुर्सी या मेज पर पैर लटकाकर बैठ जाएं और अपने एक पैर को क्रमशः सीधे ऊपर उठाते हुए पंजे को शरीर की तरफ खींचे । पंजा खींचने के पश्चात पांच सेकेंड तक रोकें फिर पांव नीचे करके यह प्रक्रिया दूसरे पांव के साथ दोहराएं । यह व्यायाम दोनों पैरों में बारी-बारी से पांच से पंद्रह बार तक करें । व्यायाम करते वक्त इस बात का ध्यान रखें कि दर्द बढ़े नहीं ।

हाई टिबियल ऑस्टियोटॉमी

अब रही बात ऑपरेशन की । क्या यह वाकई जरूरी है, इसकी पहचान आप खुद ही कर सकते हैं । हमारे मुल्क में घुटनों के दर्द का मुख्य कारण है टांगों का तिरछापन (टिबियावेरा) । यह तिरछापन आप खुद आईने में देख सकते हैं । अगर व्यायाम, सिंकाई, वजन घटाने और डॉक्टर द्वारा सुझाई गई दवा इस्तेमाल करने के बाद भी राहत न मिले, तब ‘ओपन वेज हाई टिबियल ऑस्टियोटॉमी’ का विकल्प खुल सकता है । इस ऑपरेशन में घुटना बदलने की जगह घुटने के निचले भाग की हड्डी को सीधा करके उस पर एक प्लेट लगा देते हैं, जिससे वह अपनी सामान्य आकृति में आ जाती है।

कम उम्र, अधिक वजन और सक्रिय जीवनशैली में भी यह ऑपरेशन कारगर रहता है । इस विधि से 75 वर्ष से कम आयु के शारीरिक रूप से सक्रिय दस में से नौ लोगों को लाभ हो सकता है । 75 वर्ष से अधिक की आयु में अगर कोई व्यक्ति ऑस्टियो अर्थराइटिस की फाइनल स्टेज की वजह से अपनी दिनचर्या का निर्वाह न कर पाए और अपाहिज जैसी स्थिति महसूस करे, तब वह कृत्रिम घुटना प्रत्यारोपित करवा सकता है ।

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