आंवला के फायदे और नुकसान Amla Juice Ke Fayde in Hindi

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आँवला के औषधीय गुण/ आंवला के फायदे और नुकसान Amla Juice Ke Fayde/ Labh / Gun in Hindi

आंवले को आयुर्वेद में अमृत के सामान माना गया है. आँवला (Amala) meaning in English –  GOOSEBERRY

आंवले के बारे में सामान्य जानकारी 

आंवले का वृक्ष भारत के प्राय: सभी प्रांतों में पैदा होता है। तुलसी की तरह आंवले का वृक्ष धार्मिक दृष्टिकोण से पवित्र माना जाता है। स्त्रियां इसकी पूजा करती हैं। वृक्ष की ऊंचाई 20 से 25 फुट होती है। पत्ते  इमली के पत्तों की तरह लगभग आधा इंच लंबे होते हैं। पुष्प हरे-पीले रंग के, बहुत छोटे गुच्छों में लगते हैं। फल गोलाकार लगभग 1 से 2 इंच व्यास के हरे, पीले रंग के होते हैं। पके फलों का रंग रक्ताभ होता है।

खरबूजे की भांति फल पर 6 रेखाएं 6 खंडों का प्रतीक होती हैं। फल की गुठली में 3 कोष होते हैं, जिनमें तिकोने बीज निकलते हैं। वनों में उगने वाले आंवले छोटे-छोटे होते हैं, जबकि कलमी आंवले बड़े-बड़े होते है। छोटे आंवलों में गूदा कम, रेशेदार और गुठली बड़ी होती है, जबकि कलमी आंवलों में गूदा ज्यादा, रेशेरहित, छोटी गुठली होती है। बड़े आंवले च्यवनप्राश व मुरब्बा बनाने के लिए अधिक उपयोगी होते हैं, जबकि औषधिक गुणों को अधिक पाने के लिए छोटे आंवले ही अधिक उपयुक्त होते हैं।

आंवले के विभिन्न भाषाओं में नाम

  • संस्कृत – आमलकी, धात्री।
  • हिंदी – आंवला ।
  • मराठी – आंवली।
  • गुजराती – आंवला।
  • बंगाली – आमलकी, आमला।
  • अंग्रेज़ी -एमब्लिक माइरोबेलन (EmblicMyrobalan)।

आंवला के औषधीय गुण Amla Ke Aushdheey Gun

 

आयुर्वेदिक के अनुसार, आंवला त्रिदोष नाशक होता है, यानी वात, पित और कफ़ को नष्ट करता है। शीतल प्रकृति, नेत्र, त्वचा, केश, फेफड़ों के लिए हितकारी, भूख बढ़ाने वाला, रक्त शोधक, मृदुरेचक, वृद्धावस्था दूर करने वाला, शरीर की गर्मी दूर करने वाला, चर्मविकार नाशक, स्मरण शक्ति, ओज, हृदय का बल और आयु बढ़ाने वाला भी होता है।

यूनानी मतानुसार आंवला आमाशय, मस्तिष्क एवं हृदय को बल देने वाला, पित्तशामक, शीतल, शोधक होता है। शीतल गुण के कारण रक्त की गर्मी और पित्त की तेजी को घटाता है। रूखे गुण के कारण रक्त का शुद्धीकरण करता है। गर्भाशय, नेत्रों, आमाशय, बुद्धि को तीव्र करना, उनके दोषों को दूर करना इसका विशेष गुण है।

वैज्ञानिक मतानुसार आंवला के रासायनिक तत्वों का विश्लेषण करने पर ज्ञात होता है कि इसके 100 ग्राम रस में 921 मिलीग्राम और गूदे में 720 मिलीग्राम विटामिन सी पाया जाता है, जबकि आर्द्रता 81.2, प्रोटीन 0.5, वसा 0.1, कार्बोहाइड्रेट 14. 1, खनिज द्रव्य 0.7 प्रतिशत तथा कैल्शियम, फास्फोरस, लोहा, निकोटिनिक एसिडि, गैलिक एसिड, टैनिक एसिड, शर्करा (ग्लूकोज) भी पाया जाता है।

आंवले के नुकसान / हानिकारक प्रभाव Amla ke nuksan / Side Effects in hindi

आंवला प्लीहा (Spleen) के लिए हानिकारक होता है। लेकिन मधु के साथ सेवन करने से यह दुष्प्रभाव खत्म हो जाता है।

आंवला खाने की मात्रा : फल का रस 10 से 20 मिलीलीटर। चूर्ण 5 से 10 ग्राम।

आँवला के फायदे Amla Juice Ke Fayde in Hindi Language

आँवले को आयुर्वेद में अमृत माना गया है और इसकी बहुत सारे गुणों को बहुत बिस्तार से बताया गया है | इसलिए हम यहां पर आपको इसके औषधीय गुणों को बता रहे है | आप यहाँ जानेंगे की आँवले का प्रयोग घरेलु औषधि बनाने में कैसे प्रयोग किया जाता है और आप कैसे अपने स्वास्थ्य के रक्षा कर सकते हैं |

आंवले में सभी रोगों को दूर करने की शक्ति होती है, फिर भी यदि आंवले का चूर्ण एक चम्मच की मात्रा में सुबह-शाम शहद के साथ नियमित रूप से सेवन किया जाय, तो ह्र्दय की बेचनी,धड़कन, कमजोरी, नेत्र ज्योति, वीर्य की दुर्बलता, दांतोंऔर मसूड़ों के विकार, केशों का कमजोर होना और झड़ना, रक्ताल्पता, श्वास रोग, विकार, पाचन शक्ति की खराबी, चर्म रोग,रक्तचाप की अधिकता, स्कर्वी , रक्त, पित्त, वमन, सुजाक, बहुमूत्र, दांत रोग जैसी बीमारियों में लाभ मिलता है।

  • पेशाब में जलन होने पर : हरे आंवले का रस 50 ग्राम , शहद 20 ग्राम दोनों को मिलाकर एक मात्रा  तैयार करे | दिन में दो बार लेने से मूत्र पर्याप्त होगा और मूत्र मार्ग की जलन समाप्त हो जायेगी |
  • कृमि पड़ना – खान–पान की गडबडी के कारण यदि पेट में कीड़े पड़ गए हो तो थोड़ा–थोड़ा आंवले का रस एक सप्ताह तक पीने से वे समाप्त हो जाते है |
  • गर्मी के विकार – ग्रीष्म ऋतु में गर्मी की अधिकता के कारण कमजोरी प्रतीत हो , चक्कर आये, मूत्र का रंग पीला हो जाए तो प्रतिदिन सुबह के समय एक नाग आंवले का मुरब्बा खाकर ऊपर से शीतल जल पी ले गर्मी के विकार दूर हो जायेगें |
  • कट जाने पर –  किसी कारण शरीर का कोई अंग कट जाए और उससे खून निकालने लगे तो आंवले का ताजा रस लगा देने से रक्तश्राव बन्द हो जाता है कटी हुई जगह जल्द ठीक हो जायेगी |
  • विष–अफीम का असर खत्म करना – आंवले की ताजा पत्तियाँ 100 ग्राम को 500 ग्राम पानी में उबालकर और छानकर पिलाने से शरीर में अधिक दिनों से रमा हुआ अफीम का विष भी शांत हो जाता है |
  • मुख , नाक, गुदा से या खून की गर्मी के कारण रक्तश्राव – ऐसा होने पर ताजा आंवले के रस में मधु (शहद) मिलाकर रोगी व्यक्ति को पिलाना चाहिये |
  • नकसीर – ताजा आंवले के सिथरे हुए रस की 3-4 बूदे रोगी के नथुनों (नासाछिद्रों) में डालें तथा इसी प्रकार प्रति 15-20 मिनट बाद नस्य देकर ऊपर को चढ़ाने को कहें, नकशीर बन्द हो जायेगी | साथ ही आंवले को भी भूनकर छाछ (मठ्ठा) या काँजी में पीसकर मस्तिष्क पर लेप करा देने से शीघ्र लाभ होगा |
  • बहुमूत्र – आंवले के पत्ते का रस २०० ग्राम में दारूहल्दी घिसकर और मिलाकर पिलाने से बहुमूत्र व्याधि से लाभ हो जाता हैं |
  • मूर्च्छा – पित्त की विकृति कारण हुई मूर्च्छा में आंवले के रस में आधी मात्रा गाय का घी मिलाकर, थोड़ा- थोड़ा दिन में कई बार देकर ऊपर से गाय का दूध पिला देना चाहिये | कुछ दिनों तक इसके इस्तेमाल  से मूर्छा रोग हमेशा के लिए खत्म हो जाता है |
  • पीलिया , शरीर में खून की कमी – जीर्ण ज्वरादि से उत्पन्न पाण्डु-रोग को दूर करने के लिए ताजे आंवले के रस में गन्ने का ताजा रस और थोड़ा सा शहद मिलाकर पीना चाहिए, इससे लाभ होगा |
  • मिरगी या अपस्मार – ताजे आंवले के 4 किलो रस में मुलेठी 50 ग्राम तथा गोघृत 250 ग्राम मिला मन्दाग्नि पर पकाकर घृत सिद्ध कर ले | इस घृत के सेवन से मिरगी में लाभ हो जाता है |
  • अम्लपित्त , रक्तपित्त, ह्रदय की धड्कन, वातगुल्म, दाह – ताजे आवले का कपड़े से छना हुआ रस 25 ग्राम में सममात्रा में मधु मिलाकर (यह एक मात्रा है ) प्रातः एवं सायं पिलाने से सभी व्याधियों में आशातीत लाभ होता है |

बालों के झड़ने का घरेलू उपचार Hair Fall Treatment At Home in Hindi

आँवले के रस या चूर्ण का कोई भी प्रयोग मिट्टी , पत्थर या कांच के पात्र में रखकर ही सेवन करना चाहिये किसे अन्य धातु के पात्र में नहीं |

  • नेत्रों की लाली – (1) ताजे आँवले के रस को कलईदार पात्र में भरकर पकावें | गाढ़ा होने पर लंबी – लंबी गोलियां बनाकर रखा ले | इसे पानी में घिसकर सलाई से लगाते रहने से नेत्रों की लालिमा दूर हो जाती है | (2) आँख आना या नेत्राभिश्यन्द रोग की प्रारम्भिक अवस्था में भली प्रकार पके ताजा आँवले के रस की बूँद आँखों में टपकाते रहने से नेत्रों की जलन, दाहकता, पीड़ा व लालिमा दूर हो जाती है |
  • दाँत निकलना – बच्चों के दाँत निकलते समय आँवले के रस को मसूढ़ों पर मलने से आराम से और बिना कष्ट दाँत निकल आते है |
  • हिचकी , वमन , तृषा उबकाई – (1) आँवले के रस में शक्कर या मधु मिलाकर देने से पित्तजन्य वमन, हिचकी आदि बन्द हो जाती है | (2) किसी भी कारण से पित्त का प्रकोप हो और नेत्रों में धुधला सा छाने लगे तो आँवले के रस 20 ग्राम में सामान मात्रा में मिश्री मिलाकर पिलानी चाहिये |
  • केश श्वेत हो जाने पर – ताजे आँवले उबाल, मथ, रस छानकर बचे गूदे में चतुर्थांश घी मिलाकर भून ले | भली प्रकार भून जाने पर उसमे सामान मात्रा में कुटी हुई मिश्री मिलाकर किसे  कलईदार पात्र में या अम्रतावान में भर कर रखें | 20-20 ग्राम मात्रा सुबह-शाम मधु के साथ सेवन करके ऊपर से गाय का दूध पिए | शरीर पुष्ठ होकर असमय पके सफ़ेद बाल काले और चिकने हो जायेगें | यह बाजीकरण का बहुत अच्छा रसायन है |

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2 Comments

  1. ये आयुर्वेदिक नुस्खे हमें नया जीवन प्रदान करते हैं । अपने जीवन को खुशहाल बनाने के लिए इनके महत्व को स्वीकार करना चाहिए। इतनी उपयोगी जानकारी देने के लिए हम इस Website को तहे दिल से शुक्रिया अदा करते हैं ।

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