सरसों के औषधीय गुण

  • सूजन– सरसो के दानों के बीच में पीसकर लेप करने से सूजन समाप्त हो जाती है।
  • गैस टृबल– आधुनिक काल में मनुष्य के शरीरिक परिश्रम न करने के कारण वायुदूषित होने मानसिक कलेशो में जीने या अनुचित अप्राकृतिक खान पान के कारण पेट में गैस बनने की बीमारी बहुत होने लगी है। इससे छूटकारा पाने के लिए भोजन में संयम बरतने के साथ ही सरसों के तेल की नाभि के चारों ओर पेट पर दायी ओर से बायी ओर मालिश करनी चाहिए।
  • तिल्ली बढ़ना- कुछ दिनों तक सरसों के तेल की पेंट पर मालिश करने से तिल्ली की वृद्धि रूक जाती है।
  • गठिया रोग– सरसों के तेल में कपूर मिलाकर मालिश करने से मांस पेशियों की गठिया मिट जाती है।
  • गर्भ धारण- सरसों को पीसकर उसका शाफा बनाकर मासिक धर्म के स्नान के उपरान्त 3 दिनों तक योनि में रखने से बाझपन समाप्त हो जाती है।
  • कफज खासी– सरसों के दानों को पीसकर शहद के साथ चाटनें से कफ के कारण उत्पन्न खासी समाप्त हो जाती है।
  • मुख सौन्दर्य-  (1) सरसों के कल्फ को गल जाने तक दूध में उबालकर नीचे उतार लें और ठंडा कर लें इस योग को मुख पर मलने से चेहरे का कालापन समाप्त हो जाता है। और उस पर तेजस्विता झलकने लगती है।

(2) सरसों के दानों को दूध में डालकर तब तक औटायें जब तक कि सम्पुर्ण दूध न जल जायें। दूध जलने पर सरसों उतारकर सूखा पीसकर उसका उबटन करने से शरीर की काति बढ़ जाती है। और रंग साफ हो जाता है।

  • पायरिया- सरसों के तेल में पिसा हुआ सेधा नमक मिलाकर प्रतिदिन मंजन करने से दातों का हिलना और दातों की जड़ से रिसने वाला खून बन्द हो जाता है। दात साफ तथा मजबूत हो जाते है।
  • नासूर– रूई की बत्ती आक के दूध में भिगोंकर सुखा लें। तत्पश्चात सरसों के तेल में डुबोंकर उसका काजल पाट लें। उस काजल को नासूर में भरने से नासूर रोग समाप्त हो जाता है।
  • कर्ण शूल- सरसों के तेल को कान में टपकाने से बादी के कारण उत्पन्न कान का दर्द मिट जाता है।

थोड़ा हल्का गर्म तेल को कान में टपकाने से सभी प्रकार के दर्द बहरापन और आवाज समाप्त हो जातें है। यदि कान मे कीड़ा घुस गया हो भी तो निकल जाता है।

  • उरोज सौन्दर्य या स्तनों का उभार– यदि महिला प्रतिदिन सरसों के तेल की अपने स्तनों पर मालिश करे तो वे उतुंग मोटे उभारयुक्त पुष्ट तथा स्पृहणीय हो जाते है।
  • मालिश- जाड़े के दिनों में शरीर पर तेल की मालिश करने से त्वचा की तलवों में तेल की मालिश करने से पैरो का सो जाना तथा शरीर की थकान दूर हो जाती है। नीद खुब गहरी आती है। नेत्रों में ठंडक पड़ती है। और रोशनी बढ़ने लगती है।
  • जल जाना- आग से शरीर का कोई अंग जल गया हो तो जलें स्थान पर सरसों के तेल लगाने से छाला या फफोड़ा नही पढ़ेगा।
  • नाप सरकना या नाभि डिगना– यदि नाप सरक जाये तो सरसों के तेल की 2.1 बूदे नाभि में डालकर लेट जायें अथवा रूई का फाहा तेल में भिगोंकर नाभि पर आवश्यकतानुसार रखने से नाप ठीक हो जाती है। इसके अतिरिक्त कटि शूल उन्माद सिर की पीड़ा श्वास क्रास व अनेक वात व्याधियों में इससे लाभ होता है।
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3 Comments

  1. में जैसे ही वजन उठता हु पेट में नाप और नल की समस्या होती जिससे में बहुत परेशां हु इसका इलाज बताये धन्यावाद

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