मोतियाबिंद के लक्षण और जरूरी सावधानियां

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बदलते समय के साथ मोतियाबिंद की सर्जरी की प्रक्रिया का मुख्य उद्देश्य अंधेपन से बचाव के अलावा अच्छी द्रष्टि हासिल करना भी है | आपरेशन की सफलता की संभावना कच्चे मोतिया में ज्यादा होती है | इसीलिये कहतें हैं की मोतियाबिंद जितना कच्चा उतना अच्छा | अत: यह बहुत महत्वपूर्ण है की हम मोतियाबिंद के शुरुवाती लक्षणों के बारे में जानें |

जरूरी सावधानियां

मोतियाबिंद के शुरुवाती लक्षणों के सामने आने पर हम मंद होती हुई निगाह के कारण उत्पन्न हुई पीड़ा की motiyabind ka ilaj in hindiअवधि और उसकी तीब्रता दोनों को कम कर सकतें हैं | ये जानकारियाँ आपको मदद करेगीं –

१. जब हम रोशनी से अँधेरे में जातें हैं तो उस वक्त दिखने के अभ्यस्त होने में धीरे – धीरे अधिक समय लगाने लगता है | इसे Delayed Dark Adaptation कहतें हैं |

२. जब किसी जीज के एक से ज्यादा image दिखने लगे तो सावधान हो जाएँ | जैसे यदि आप दूर किसी बस को देखें और आपको एक से अधिक बस दिखाई देने लगें तो आप समझ लीजिये की मोतिया आपकी आँख में बन चुका है | और ऐसी स्थिति को Polyopia कहते है |

३. अत्यधिक चकाचौंध लगना, सामने आती हुई गाडी की रोशनी अगर आपको जरूरत से ज्यादा परेशान करने लगे, तो इसे मोतियाबिंद होने का लक्षण मानना चाहिए | ऐसी स्थिति को Glare Sensitivity कहतें |

४. यदि आपके चश्मे का नम्बर जल्दी – जल्दी बदलने लगे, तो मोतियाबिंद की जांच तुरन्त कराएँ |

५. धुंधला दिखने का लक्षण काफी बाद में प्रकट होता है | धीरे – धीरे दूर और पास के वस्तुए या कोई व्यक्ति धुंधले दिखायी देने लगतें हैं | अकसर धुंधलेपन का बदलाव इतना धीमा होता है की हम ठीक से जान ही नहीं पाते की दिखने में परेशानी होने लगी है |

यदि आपको ऊपर दिये लक्षण दिखायी देने लगें तो सावधान हो जाईये और समय रहते ही किसी योग्य नेत्रचिकित्षक से मिले | समय रहते मोतियाबिंद का इलाज बहुत से कष्ट से निजात दिला सकता है |

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