गठिया (Arthritis) का घरेलू उपचार

Desi Nuskhe For Arthritis In Hindi.

गठिया रोग में प्रायः घुटनों के जोड़ वाले स्थान पर झिल्ली में सूजन अथवा जमाव के कारण दर्द रहने Home remedies for arthritisलगता है | यह रोग अधिकतर 30 से 50 वर्ष की आयु में होता है | स्त्रियां इस रोग से अधिक प्रभावित होती हैं | रोगी चलने-फिरने में असमर्थ हो जाता है | जोड़ों का स्वरूप बदल जाता है, उनमें सूजन हो जाने से चलने-फिरने में भी कठिनाई होती है | रोग अधिक बढ़ने पर हाथों की उंगलियों का स्वरूप भी बिगड़ जाता है | व्यक्ति हाथों से कोई काम ठीक से नहीं कर सकता | अन्य हड्डियां भी प्रभावित होती हैं | गठिया में शरीर के बहुत से अंग धीरे-धीरे रोगग्रस्त होने लगते हैं | कई बार केवल कुछ समय अथवा कुछ वर्षों के लिए शरीर के अन्य भागों में फैलने से पूर्व इसका केन्द्र शरीर का कोई एक जोड़ ही रहता है | बहुत कम ऐसे रोगी हैं जिन्हें यह रोग एकाएक लगा हो  |

गठिया (Arthritis) का कारण

शरीर में यूरिक अम्लों की अधिकता होना इस रोग का प्रमुख कारण माना जाता है | परन्तु इस रोग के अन्य कारणों की विस्तृत जानकारी प्राप्त नहीं हो सकी है |

गठिया (Arthritis) होने के लक्षण

प्रातःकाल उठते समय जोड़ों में अकड़न महसूस होती है | विशेष रूप से हाथ और पैरों की उंगलियों, कलाई, कोहनी, कंधे, टखनों, घुटनों, कमर और गर्दन में दर्द होता है | जोड़ों में सूजन आ जाती है |

गठिया (Arthritis) का उपचार

1. गठिया की प्रारंभिक अवस्था में जब जोड़ों में सूजन का अनुभव होता है, तो सही ढंग से आराम करने से भी लाभ होता है | परंतु जब यह रोग बढ़ जाता है और सूजन समाप्त नहीं होती तो चिकित्सक एस्पीरिन तथा सूजन को समाप्त करने के लिए दवाइयां देने लगते हैं | स्टेराइड हार्मोंस जैसी दवाएं भी दी जाती हैं |

2. इस रोग में कई बार प्रभावित जोड़ों को शल्य चिकित्सा द्वारा बदल भी दिया जाता है | गठिया के रोगी के लिए आयुर्वेद में पंचकर्म का विधान है | इसमें शरीर में मालिश, भाप स्नान, विरेचन अथवा जड़ी-बूटियों से बनाई गई गरम पोटलियों से सेंक और मालिश आदि की जाती है | परंतु पंचकर्म करते समय रोगी की आयु और उसकी सहनशक्ति का ध्यान रखना आवश्यक है | अधिक कमजोर रोगी के लिए पंचकर्म ठीक नहीं | पूरी तरह से पंचकर्म में प्रशिक्षित न होने पर रोगी को इससे हानि भी हो सकती है |

3. गठिया के रोगी को यदि निमोनिया अथवा कोई अन्य रोग हो गया हो तो पहले उसका इलाज करना चाहिए |

4. गठिया के रोगी के लिए सेब बहुत ही उपयोगी है | सेब का उपयोग उस स्थिति में और अधिक बढ़ जाता है जब शरीर में यूरिक एसिड की मात्रा अधिक हो | सेब के सेवन से यूरिक एसिड की मात्रा में कमी आती है | सेब को उबालकर जैली के रूप में दर्द और सूजन वाले स्थान पर लगाने और रगड़ने से भी गठिए के रोगी को लाभ होता है |

5. कुछ चिकित्सकों का विश्वास है कि गठिया के रोगी को तीन या चार दिन तक खाने के लिए केवल केला देना चाहिए | रोगी को प्रतिदिन आठ से नौ केले दिए जा सकते हैं | अन्य कोई चीज खाने के लिए नहीं देनी चाहिए | इससे भी लाभ होता देखा गया है |

6. खीरा भी गठिया के रोगी के लिए लाभकारी है | खीरे के रस में गाजर, चुकन्दर और अजवाइन के पत्तों का रस मिलाकर देने से शरीर में यूरिक एसिड की मात्रा कम हो जाती है | इस रस का भोजन आदि के साथ उपयोग करना अत्यन्त लाभदायक है |

7. लहसुन के उपयोग से भी जोड़ों में होने वाला दर्द समाप्त होता है | सबसे अच्छा यह है कि लहसुन की कुछ तुरियां छीलकर नियमित रूप से चबाई जाएं | इस प्रकार इसका रस त्वचा और रक्त में जल्दी ही घुल कर रोग से प्रभावित अंगों को लाभ पहुंचाता है |

8. गठिया के रोगी को भोजन से पूर्व कच्चे आलू का दो चम्मच रस पीने से लाभ होता है | इससे भी यूरिक एसिड की मात्रा कम होने लगती है | गठिया के रोगी के लिए आलू का छिलका भी बहुत उपयोगी सिद्ध हुआ है | छिलके में आवश्यक लवणों की काफी मात्रा पाई जाती है | छिलके को उबालकर और छानकर प्रतिदिन दिन में सात-आठ बार देने से रोगी को लाभ होता है | उपलों की आंच में आलू भूनकर सेवन करने से भी गठिया में लाभ होता है |

कुछ आवश्यक सलाह

1. गठिया के रोगी प्रायः कब्ज का शिकार होते हैं | कब्ज दूर करने के लिए कोई चूर्ण अथवा गोली न देकर दूध में कैस्टर ऑयल (अरण्डी का तेल) डालकर सेवन करना अधिक लाभकारी होगा |

2. गठिया के रोगी को तले हुए या ऐसे पदार्थ जिनसे शरीर में वायु का प्रकोप होता हो, प्रयोग नहीं करने चाहिए | इस रोग में चावल का सेवन भी हानिकारक है |

3. गठिया के रोगी को दही, अचार, इमली, सिरका तथा अन्य खट्टी चीजें नहीं खानी चाहिए | यदि बहुत ही आवश्यक हो तो छाछ आदि ले सकते हैं | परंतु ध्यान रहे कि छाछ में खटास न हो |

4. नीबू गठिया के रोगी के लिए बहुत ही उपयोगी है | प्रातःकाल मौसम के अनुसार ठण्डे या गरम जल में नीबू का रस और शहद मिलाकर पीना चाहिए |

5. गठिया का रोगी अंकुरित अन्न का सेवन कर सकता है | इससे उसे लाभ होगा |

6. गठिया के रोगी को टमाटर, घिया, पेठा, खीरा, खरबूजा आदि खाना चाहिए |

7. पुदीने के कुछ हरे पते तथा सूखा पोदीना एक गिलास पानी में डालकर उबालें | जब यह पानी आधा रह जाए तो रोगी को पीने के लिए दिन में दो बार दें | गठिया के दर्द में इससे लाभ होगा |

8. गठिया तथा वायु संबंधी रोगों में प्याज खाने अथवा उसके रस का प्रयोग करने से रोग शांत होता है |

9. प्याज के रस में सरसों का तेल समान मात्रा में मिलाकर दर्द वाले स्थान पर मालिश करने से लाभ होता है |

10. गठिए की सूजन अथवा दर्द वाले स्थान पर लहसुन के तेल की मालिश करने से लाभ होता है | किसी भी प्रकार के तेल की मालिश के बाद उस स्थान की हवा से बचाना चाहिए |

11. लहसुन की एक गांठ को साफ कर उसकी तुरियों के छोटे-छोटे टुकड़े कर लें | उन्हें दूध में उबालकर खीर बनाएं | पांच-छह सप्ताह लहसुन की खीर खाने से गठिया रोग दूर हो जाता है | लहसुन वाला दूध रात के समय सेवन करने से और अधिक लाभ होता है |

12. गठिया के रोगी को नमक का अधिक प्रयोग नहीं करना चाहिए |

13. गठिया के रोगी मेथी का उपयोग किसी भी रूप में कर सकते हैं | मेथीदाने की घी में भूनकर पीसें तथा थोड़ी सूजी अथवा भूना आटा मिलाकर लड्डू बना लें | प्रातःकाल दूध के साथ खाने से गठिया के रोगी को सर्दियों में विशेष रूप से लाभ होता है | मेथीदाने को गर्मियों में अंकुरित कर खाने से लाभ होता है |

14. अदरक के रस में घी या शहद मिलाकर पीने से कमर, जांघ तथा अन्य दर्दो में लाभ होता है | अदरक के स्थान पर दस ग्राम सौंट अथवा सूखी अदरक का चूर्ण 100-125 ग्राम पानी में उबालकर शहद मिलाकर पीने से भी बहुत आराम मिलता है |

15. असगंध और देसी बूरा समान मात्रा में तीन चम्मच सुबह-शाम गरम दूध के साथ सेवन करना लाभकारी है |

16. गठिया के रोगी को चुकन्दर का सेवन करते रहना चाहिए |

17. यदि दर्द अधिक हो तो सौंठ की मात्रा से दुगुनी मात्रा में अखरोट की गिरी और उससे चार गुनी मात्रा में काला तिल मिलाकर कूट-पीसकर प्रातः तथा सायं गरम जल से 20 ग्राम की मात्रा में सेवन करने से लाभ होता है |

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