महिलाओं में बहुमूत्र रोग का घरेलू इलाज

Natural remedies for frequent urination in female

महिलाओं में बहुमूत्र रोग को सोम रोग भी कहा जाता है, लेकिन अधिकांश महिलाओं को सोम रोग के विषय में पर्याप्त जानकारी नहीं होती। यहां तक कि इसके नाम से भी वे परिचित नहीं। सोम रोग का संक्षिप्त परिचय एक वाक्य में इस तरह दिया जा सकता है कि जैसे पुरुषों में बहुमूत्र रोग होता है वैसे ही स्त्रियों में सोम रोग होता है। स्त्रियों को होनेवाले बहुमूत्र रोग को ही कुछ लक्षणों के फर्क के कारण सोम रोग कहा जाता है। बहुमूत्र व सोम रोग में एक लक्षण समान है वह है मूत्रातिसार यानी बार-बार पेशाब अमाना।

बहुमूत्र रोग का कारण

अति भोगविलासी जीवन जीने, अति मैथुन और कामुक आचरण करने, अनियमित आहार-विहार तथा खानपान में पथ्य-अपथ्य का पालन न करने से यह रोग होता है।

बहुमूत्र रोग के लक्षण

स्त्री को जब यह रोग होता है तब शुरू-शुरू में निर्मल, शीतल पानी जैसा सफेद, साफ तथा गंध व पीड़ारहित जल योनिमार्ग से बार-बार बहने लगता है। कुछ दिनों बाद जब रोग पुराना हो जाता है तब यह मूत्रातिसार का रूप धारण कर लेता है, स्त्री मूत्र आवेग को रोक नहीं पाती और धीरे-धीरे शरीर कमजोर होता जाता है। कई बार तो मूत्र का आवेग इतना तीव्र होता है कि स्त्री के उठते-उठते पेशाब छूट जाता है। इस रोग में ‘सोम’ नामक धातु का शरीर से नाश होता जाता है। इसीलिए इसे सोम रोग की संज्ञा दी गई है। सोम धातु के क्षय से शरीर कमजोर हो जाता है, त्वचा रूखी, मुंह व तालू बार-बार सूखता रहता है। जम्हाई या अर्द्धमूर्च्छा की स्थिति बनी रहती है। खाने-पीने से तृप्ति न होना, पति के साथ सहवास करने की क्षमता न रहना इस रोग के अन्य लक्षण हैं।

बहुमूत्र रोग का उपचार

1. आंवले के बीजः आंवले के बीजों को पानी में पीसकर फिर शहद तथा चीनी मिलाकर पीने से सोमरोग में लाभ होता है। आंवला, शहद,मुलहठी तथा दूध मिलाकर सेवन करने से सोमरोग दूर हो जाता है |

2. आंवला व केलाः पका हुआ केला, आंवलों का रस, शहद तथा मिश्री को समभाग में मिलाकर इच्छानुसार सुबह-शाम नाश्ते के रूप में सेवन करते रहने से धीरे-धीरे सोम रोग दूर हो जाता है।

3. पथ्य आहारः सोमरोग से ग्रसित स्त्री को सुबह के नाश्ते में तथा रात को पानी में भिगोए हुए चने (बिना तले या भूनकर) खूब चबा-चबाकर खाने चाहिए। सुबह के भोजन के साथ एक गिलास छाछ में एक चम्मच लवणभास्कर चूर्ण घोलकर उसे एक-एक घूट करके पीना चाहिए। यहां यह भी ध्यान रखें कि सुबह व शाम का भोजन नियमित रूप से करें तथा दोपहर के बाद थोड़ा विश्राम करें।

4. अपथ्य आहारः सोम रोग होने की दशा में अधिक जल, शीतल पेय, फलों का रस, गन्ने का रस, चाय आदि का सेवन न करें। दिन में सोने की आदत, आलस्य, भय, शोक, चिंता, क्षमता से अधिक कार्य, देर रात तक जागना तथा पति के साथ सहवास न करें।

सोम रोग की चिकित्सा साधारण कार्य नहीं है, इस रोग को बेहद गंभीरता से लेना चाहिए। अत: रोग का पता लगते ही किसी स्त्री रोग विशेषज्ञ से चिकित्सा करानी चाहिए।

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