घरेलू नुस्खे द्वारा उपदंश का इलाज Syphilis Treatment In Hindi At Home

treatment for syphilis

उपदंश को सिफलिस रोग भी कहते हैं | उपदंश एक घातक रोग है और रोग की पहचान होते ही प्रारंभिक उपचार करने पर भी यदि लाभ न हो तो किसी अनुभवी और योग्य चिकित्सक से धैर्यपूर्वक लगातार इलाज कराएं जब तक यह रोग बिल्कुल ठीक न हो जाए तब तक संभोग से दूर रहें। यहां तक कि कामुक विचारों से भी बचे।

उपदंश या सिफलिस एक Sexually Transmitted Disease (STD) हैं | यह रोग महिलाओ और पुरुषों दोनों को हो सकता है | इसके पहले लक्षण कभी कभी नहीं दिखते है | उपदंश की पहचान करने के लिए नीबू एक उत्तम साधन है। नीबू को उपदंश के स्थान पर लगाने पर यदि असहनीय जलन हो तो समझ लेना चाहिए कि वह व्यक्ति उपदंश से पीड़ित है।

syphilis rog ke lakshan and gharelu upchar

सिफलिस या उपदंश का कारण Syphilis Details In Hindi

यह रोग ग्रामीण व अशिक्षित वर्ग में व्यापक रूप से पाया जता है। जननेन्द्रिय की सफाई न करने, वेश्यागमन करने, अविवेकपूर्ण ढंग से संभोग करने, लिंग में रगड, नाखून या कठोर वस्तु से कट जाने तथा ऋतुकाल में भी स्त्री के साथ संभोग करने आदि कारणों से यह रोग हो जाता है। कभी-कभी वंशानुगत कारणों से भी इस रोग का प्रसार होता है।

सिफलिस या उपदंश रोग के लक्षण Syphilis Rog Ke Lakshan

प्रारंभ में पुरुष जननेंद्रिय के अग्रभाग पर लाल रंग की छोटी सी फुंसी उठती है। 5-7 दिन बाद यह फुंसी फूट जाती है तथा इसमें घाव बन जाता है। इस घाव का स्राव दूषित होता है, जो शरीर पर जहां भी लगता है वहीं घाव हो जाते हैं। जब यह रोग पुराना हो जाता है तब सारे शरीर पर लाल-लाल चकते व घाव हो जाते हैं तथा शरीर से विशिष्ट प्रकार की गंध आने लग जाती है। इस रोग में लापरवाही करने पर जननेंद्रिय गलने लगती है, रक्तविकार व वात प्रकोप बढ़ जाते हैं। प्रारंभिक अवस्था में इस रोग की चिकित्सा आसानी से हो जाती है। परंतु जैसे-जैसे यह रोग पुराना होता जाता है वैसे-वैसे इसकी चिकित्सा कठिन व असाध्य होती चली जाती है।

सिफलिस रोग का घरेलु उपचार How To Treat Syphilis At Home

How To Get Rid of Syphilis At Home – सिफलिस का घर पर इलाज एक हद तक संभव है | इसलिए आइये जानते हैं ऐसे ही कुछ घरेलु उपायों के बारे में –

✔ आंवला से सिफलिस का इलाज – पानी में नीम की पत्तियां उबालकर घाव को धोएं। आंवलों का चूर्ण जलाकर इसकी राख को दिन में एक बार घाव पर बुरक दें। यह उपाय लगातार 20-25 दिन तक करते रहने से प्रारंभिक स्थिति में रोग नष्ट हो जाता है। अमलतास, देशी नीम, हरड, बहेड़ा, देशी आंवला तथा चिरायता काढ़ा बनाकर उसमें खैरसार व विजयसार मिलाकर पीने से रोग नष्ट हो जाता है।

✔ अरंडी का तेल का पयोग सिफलिस में – गिलोय के काढ़े में लगभग 15 से 25 ग्राम तक अरंडी का तेल मिलाकर पीने से उपदंश में काफी फायदा होता है।

✔ त्रिफलाः त्रिफला के काढ़े से उपदंश के घावों को धोकर त्रिफला की राख में शुद्ध शहद मिलाकर लगाने से उपदंश के घाव ठीक हो जाते हैं। रसकपूर, सफेद कत्था, मुर्दासंख, संख-जीरा तथा सुपारी की राख या त्रिफला की राख को मिलाकर मरहम जैसा बनाकर उपदंश के घावों पर लगाने से आशातीत फायदा होता है। उपदंश के घावों को त्रिफला के क्वाथ से धोना लाभकारी है।

✔ ईंख: कचनार की छाल, इन्द्रायण की जड़, बबूल की फली, जड़ तथा पत्तों सहित छोटी कटेरी तथा ईख का पुराना गुड़ 250 ग्राम-इन सबको लगभग चार लीटर पानी में डालकर मिट्टी की हॉडी में पकाएं जब पानी चौथाई रह जाए तब इसे उतारकर छान लें। यह दवा की आठ खुराक हैं। सुबह-शाम इसकी एक-एक खुराक का सेवन करें। उपदंश में पर्याप्त लाभ होगा।

जो घरेलु इलाज हमने ऊपर बताये हैं वो सभी घरेलु और प्राकृतिक हैं, अतः रोग को ठीक होने में समय लगेगा | यदि किसी को यह रोग है और सिरियस है तो उसे किसी अनुभवी चिकित्सक को दिखाएँ |

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1 Comment

  1. 26 साल पहले में सम्भोग किया था मरे गुप्तांग में लाल रंग के दाने निकले थे फिर जलन होने लगी फिर उसमें मवाद आने लगा में उसका इलाज कर वाया पेंसिलिन के इंजेक्सन लग वाया में मुझको अराम मिलगया लेकिन 26 साल के बाद गुप्तांग में फिर से वे निशान हो गए हैं और जलन होती है अब में किया करू मुझ को इलाज बताइये आप की महँ कॉर्प होगी

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