स्तनों में दूध बढ़ाने के घरेलू उपाय

माता का दूध नवजात शिशु के लिए अमृत के समान माना जाता है। माता का दूध शिशु के उत्तम विकास के लिए जरूरी है तो उसे बीमारियों व संक्रमणों से बचाने के लिए परम आवश्यक भी। चूंकि नवजात शिशु पूर्णत: माता के दूध पर आश्रित रहता है तथा उसका संपूर्ण आहार ही माता का दूध होता है-ऐसे में माता के स्तनों में दूध की कमी हो तो काफी दुखद स्थिति उत्पन्न हो जाती है।

स्तनों में पर्याप्त दूध नहीं उतरने से शिशु भूखा रह जाता है। वस्तुतः स्तनों में दूध की कमी शारीरिक कमजोरी के कारण होती है। यदि माता उत्तम व पोषक पदार्थों का सेवन न करे तो भी दूध की कमी हो जाती है। इसके अलावा चिंताग्रस्त रहना या मानसिक आघात लगने से भी दूध में कमी हो जाती है।

उपचार

पपीताः शरीर में रक्त की कमी से मां के स्तनों में दूध की कमी होना आम बात है। इस स्थिति में डाल का पका पपीता उत्तम औषधि है। पपीता खाली पेट लगातार 20 दिन तक खाना चाहिए। इससे स्तनों में दूध की वृद्धि होगी।

अंगूरः मातृ दुग्धवर्धन के लिए अंगूर का सेवन अमृत की तरह प्रभावशाली है। ताजा अंगूर नित्य खाने से स्तनों में खूब दूध उतरने लगता है।

मुनक्काः प्रसूता को प्रसव के पश्चात गाय के दूध में 10-12 मुनक्के उबालकर दिन में तीन बार पिलाने से दुग्धवर्धन होता है।

गाजरः भोजन के साथ गाजर के रस व कच्चे प्याज के सेवन से भी प्रसूता का दुग्धवर्धन होता है।

मूंगफली: दूध के साथ मूंगफली के सेवन से माताओं के स्तनों में दूध की वृद्धि होती है।

अरंड ककड़ीः प्रसूता को प्रसवोपरांत अरंड ककडी की सब्जी बनाकर खिलाने से स्तनों में दूध ज्यादा मात्रा में आने लगता है।

प्रसूता के स्तनों पर अरंडी के तेल की मालिश दिन में 2-3 बार करते रहने से स्तनों में अधिक दूध उत्पन्न होने लगता है।

 

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