गले के रोग (कंठमाला) का घरेलू उपचार

कंठमाला लसीका ग्रंथियों का एक चिरकारी रोग (chronic disease) है। इसमें गले की ग्रंथियाँ बढ़ जाती हैं और उनकी माला सी बन जाती है इसलिए उसे कंठमाला कहते हैं। आयुर्वेद में इसका वर्णन ‘गंडमाला’ तथा ‘अपची’ दो नाम से उपलब्ध है, जिन्हें कंठमाला के दो भेद या दो अवस्थाएँ भी कह सकते हैं।

गले के रोग (कंठमाला) की घरेलू दवा

  • बकरी के दूध में आक के जड़ की छाल पीस कर गरम करके लगायें इससे कंठमाला फुटकर बह जाएगा या बैठ जायेगा |
  • बरगद का पत्ता गरम करके बाँधने से अथवा बरगद का दूध लगाने से कंठमाला बैठ जाता है |
  • रात को दो तोला कुलमुण्ड़ी भिगो दे | सुबह मलकर पिये | इससे एक माह में कंठमाला ठीक हो जायेगा |
  • गले में चिरचीटे की जड़ बाँधने से कंठमाला ठीक हो जाता है |
  • कड़वी लौकी का गुदा सिंदूर में बारीक पीस कर लगाने से कंठमाला ठीक हो जाता है |

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