तनाव से मुक्ति कैसे पाएं – 7 तरीके Tension Ka Gharelu Desi ilaj In Hindi

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तनाव से मुक्ति कैसे पाएं – 7 तरीके Tension Ka Gharelu Desi ilaj In Hindi –

Tension meaning in hindi – तनाव

तनाव जीवन का अभिन्न अंग है. संतुलित तनाव वीणा के तारों की तरह है. जिससे जीवन का मधुर संगीत जन्म लेता है. उसके बिना जीवन बिल्कुल नीरस हो जाता है और स्रजनात्मकता जैसे खो जाती है. लेकिन तनाव इतना भी अधिक ना हो जाए कि वह आपको ही परेशान करने लगे. इसलिए मानसिक तनाव एक सीमा से अधिक बहुत नुकसान पहुंचाता है, पर आज के जीवन में तनाव इतना रस-बस गया है कि तनाव के लक्षण हर तरफ नजर आते हैं. ऊंची आवाज में जरा सी बात पर झुंझलाहट, बेचैनी, क्रोधित अंतर्मन, तनाव के ऐसे चिह्न है, जिससे रोजाना हमारा सामना होता है.सच पूछिए तो तनाव की अपनी एक विशिष्ट भाषा है, कोई इसे समझ ले तो वह बहुत आसानी से यह भाप सकता है कि कौन कब तनाव से घिरा हुआ है. सघन तनाव कई प्रकार से सामने आता है, आप किसी के चेहरे और व्यवहार को देखकर शरीर से निकल रहे संकेतों को देखकर आप साफ-साफ बता सकते हैं कि वह किस तरह के तनाव से गुजर रहा है.

मांस पेशियों में भर आया तनाव (Muscle ka Tanav) कई तरह से व्यक्त होता है. माथे पर बल, तनी हुई भौंहे, भींचते दांत, बाहर की तरफ खिंचा हुआ जबड़ा, भिंचे हुए कंधे , तनी मुठियों, मुठ्ठियों में भिंचे अंगूठे, एक दूसरे पर बल खाती टांगे, एक दूसरे को बांधती पेट के आगे तनी बाहें, सभी तनाव की ओर इशारा करती भाव-भंगिमाएं हैं. अगर कोई सिर के बालों को तोड़े मरोड़े, नाखून काटे, जमीन पर पैर से थाप देता रहे, तब भी यह समझ लेना चाहिए कि वह भला व्यक्ति तनावग्रस्त है, तनाव मांस पेशियों में आकस्मिक फड़कन (Twitching) और गर्दन, कंधों, सिर तथा कमर में जकड़न एवं दर्द भी पैदा कर सकता है.

तनावग्रस्त होने पर अच्छे खासे व्यक्ति का व्यवहार बिगड़ जाता है (tanav ke lakshan in hindi). बेचैनी. व्याकुलता. चिड़चिड़ापन. खीझ, असमान्य क्रोध, काम में पूरी एकाग्रता ना बनना, ठीक से नींद ना आना आदि तरह-तरह की परेशानियां आदमी को घेर लेती हैं.

इस तरह तनाव शरीर के आंतरिक अंगों पर भी काफी असर डालता है. तनाव होने पर खूब पसीना आता है, मुंह सूखने लगता है, पेट में खलबली मची रहती है, चक्कर आ सकते हैं, दिल की धड़कन और सांसे तेज हो जाती हैं और बेहोशी भी आ सकती है.

तनाव की एक बड़ी विशेषता यह भी है कि यह आपके व्यक्तित्व का हिस्सा बन जाता है, जो व्यक्ति हमेशा हड़बड़ी में रहता है, जरूरत से ज्यादा इस प्रतिस्पर्धा रखता है, हमेशा उग्र रवैया रखता है, क्षमता से अधिक काम हाथ में लेता रहता है और इतना महत्वकांशी होता है कि उसके सपने कभी पूरे होने में ही नहीं आते, उसके तनाव होने की आशंका हमेशा बनी रहती है.

लेकिन कोई चाहे तो अपने काम करने के ढंग और अपने व्यक्तित्व में छोटे-छोटे परिवर्तन लाकर जीवन को अधिक सहज, स्वस्थ और सुरीला बना सकता है. यह बात गांठ बांध लेनी चाहिए कि बार-बार चिंता और तनाव कम करने वाली दवाएं (tanav kam karne ki dawa) लेने या तनावग्रस्त रहने से जीवन का मजा अधूरा रह जाता है. कुछ बातें हैं जिन पर अमल करके आप अपने तनाव को कम कर सकते हैं और आपका जीवन पहले से बेहतर हो सकता है.

तो आइए जानते हैं यह कौन सी बातें हैं जिन्हें अपने जीवन में अपनाकर आप तनाव से मुक्ति  (Tanav Se Mukti – Chhutkara)पा सकते हैं –

1. उतना ही काम हाथ में लें जितना कर सके

आधुनिक सभ्य समाज ने हमपर शालीनता और विनम्रता की एक ऐसी परत चढ़ा दी है, जिसके तले हम अक्सर ना नहीं कह पाते. अच्छा और लोकप्रिय बने रहने के लिए ना चाहते हुए भी हम कई कामों के लिए हां कह देते हैं. बाद में उसके लिए समय खोज पाना या तो बहुत मुश्किल होता है या वह आगे की पूरी योजना को गड़बड़ा देता है. दोनों ही स्थितियां तनावकारी होती हैं. इससे अच्छा है कि कोई भी काम हाथ में लेने से पहले अपनी समय सीमा और काम के औचित्य को ठीक से तौलने जो काम ना कर सकते हो, उसके लिए विनम्रता के साथ साफ-साफ मना कर दे. कोई भी भला आदमी आपकी विवशता समझ जाएगा और उसमें अगर यह समझ नहीं, तो उसकी खातिर खुद को तनाव में भला क्यों डुबोना.

क्षमता से अधिक काम सिर पर ले लेने से एक तो जब तक काम पूरे नहीं होते तनाव बना रहता है, दूसरे मानसिक एकाग्रता भी भंग होती है. जिससे कोई भी काम अच्छी तरह से पूरा नहीं होता. इससे भी आंतरिक असंतोष पैदा होता है और काम ना होने से प्रभावित व्यक्तियों से संबंधों में दरार अलग पैदा होती है.

2. काम की प्राथमिकताएं तय कर ले

आज की जिंदगी में हर कोई समय के दबाव में जीता है. काम अनगिनत हैं, लेकिन समय सीमित है. ऐसे में तनाव से बचने के लिए अपने मन में प्राथमिकताएं स्पष्ट रख कर चलना जरूरी है. सभी कार्यों की लिस्ट बना लें और उनके आगे उनकी प्राथमिकता दर्ज कर लें. फिर एक के बाद एक काम करते चलें. इससे बहुत से काम एक साथ आ जाने पर भी आप पर दबाव नहीं बनेगा, नहीं तो कई बार यही तनाव रहता है कि मुझे इतना कुछ करना है. इसे मैं कैसे पूरा कर सकूंगा, और यह सबसे बड़ा दुश्मन बन जाता है.

3. घड़ी की सुइयों के अनुसार ना चले

हर समय हड़बड़ी रखना कतई ठीक नहीं होता है. अपने काम को व्यवस्थित मन से और धैर्य पूर्वक तथा लग्न के साथ करना चाहिए. ऐसा किया गया काम हमेशा अच्छा होता है. जबकि हड़बड़ी में किया गया काम अच्छा नहीं होता है और साथ ही बहुत समय भी लेता है.

4. अनावश्यक ईर्ष्या रखना ठीक नहीं

कुछ लोग हमेशा ही दूसरे लोगों से या दूसरे लोगों के कार्यों से या उनकी प्रगति से ईर्ष्या करते रहते हैं और ऐसे मौके तलाशते रहते हैं कि कैसे उन लोगों को नीचा दिखाए या उनके काम में अड़ंगा डालें. इस प्रकार की स्पर्धा रखना ठीक नहीं होता है. ऐसे में आप हमेशा चिंता और तनाव में रहेंगे, जो कि आपके शरीर के लिए कतई अच्छा नहीं होगा. इसलिए सकारात्मक सोच रखें, जिससे कि मन मस्तिष्क को ऊर्जा मिलती है और पूरा शरीर स्फूर्ति में रहता है.

5. योजनाबद्ध तरीके से काम करें

जीवन में सुनियोजित ढंग से चलना हमेशा काम आता है. हो सकता है, सभी योजनाएं सफल ना हो या उसमें कुछ बाधाएं आए, पर इससे विचलित होकर नहीं चलना चाहिए. कर्मयोगी वही है, जो जरूरत के मुताबिक अपने में, अपनी कार योजना में सुधार और बदलाव ला सकें. मगर ऐसा भी ना हो कि आप अपने लक्ष्य से पूरी तरह भटक जाएं. किसी भी योजना का प्रारूप, कार्य विशेष से सुनिश्चित होता है. लेकिन कुछ सामान्य बातें हर जगह लागू होती हैं जैसे –

➔ सबसे पहले यह तय कर लें कि कार्य पूरा करने में क्या-क्या काम करने होंगे.

➔ उन में से किस तरह और किससे मदद की जरूरत होगी.

➔ काम पूरा करने के लिए क्या-क्या संसाधन जुटाने होंगे और यह कहां से कैसे जुड़ पाएंगे और इनमें कितनी लागत आएगी.

➔ काम पूरा करने में कितना समय लगेगा.

➔ क्या-क्या बाधाएं सामने आ सकती हैं और उनको कैसे दूर किया जा सकता है.

6. अपनी तनाव सीमा पार ना करें

जिस तरह हर व्यक्ति अपने में अलग है, उसी तरह हर किसी की तनाव सीमा भी अलग होती है. कोई कम तनाव में ही टूटने लगता है, तो कोई बहुत तनाव होने पर भी हंसते खेलते समय गुजार देते हैं. समझदारी इसी में है कि अपनी तनाव सीमा पहचाने और उसकी लक्ष्मण रेखा को पार ना होने दें. इससे आपको खुशी मिलेगी और आपके शरीर में स्फूर्ति बनी रहेगी.

7. आराम और मनोरंजन के लिए भी समय रखें

कामकाज की ही तरह, तफरी और मौज मस्ती के लिए भी समय निकालना बहुत जरूरी है. इससे मन मस्तिष्क और शरीर फिर से खिल उठते हैं और नई स्फूर्ति पाने से तनाव से राहत मिलती है. लेकिन इसके लिए जरूरी है कि मन और आत्मा को कुछ समय के लिए बिल्कुल खुला छोड़ दें.

लोग साल में एक बार पर्यटन पर निकल जाने को ही आराम करने का उपाय मान लेते हैं, लेकिन यदि उसमें यात्रा ही यात्रा करनी पड़े और नजर घड़ी की सुईयों पर ही टिकी रहे, तो यह किसी काम का नहीं होता है.

तनाव से बचना मुश्किल नहीं होता है, जीवन में थोड़ा सा अनुशासन, रोजाना हल्के व्यायाम करने, संतुलित भोजन लेने, 7-8 घंटे की अच्छी नींद लेने, हंसने खेलने और खुशी देने वाली चीजें अपनाते रहने से जीवन स्वस्थ और भरा-पूरा रहता है.

आपने यहाँ जाना कि क्या है tension dur karne ka mantra और tension lene se kya hota hai. तनाव दूर करने का इलाज (tension dur karne ki dua, mansik tanav se mukti ke upay) बहुत सरल और मुफ्त हैं.

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