तिल और तिल के तेल के औषधीय गुण Sesame Seeds Oil Benefits in Hindi

Sesame Seeds Oil Benefits in Hindi

तिल और तिल के तेल के औषधीय गुण Sesame Seeds Oil Benefits – Til Ke Fayde in Hindi

Sesame oil in hindi means – तिल का तेल

तिल और तिल के तेल के कई फायदे हैं (Sesame Oil Has Many Benefits). इसलिए यहाँ Til ke fayde hindi me बताये जा रहें हैं.

तिल के औषधीय गुण नीचे दिये गये है –

घाव होना – पानी में तिलों को पीसकर पुल्टिस बांधने से अशुद्ध घाव साफ होकर शीघ्र भर जाता है।

गर्भाशय की पीड़ा– तिलों को बारीक पीसकर तिल के ही तेल में मिला किंचित् गर्म करके नाभि के भाग में धीरे धीरे लेप करने या मलने (मर्दन करने) से शीत जन्यपीड़ा शान्त हो जाती है।

प्रमेह– तिल तथा अजवायन को दो एक के अनुपात में मिलाकर पीस लें और समान मात्रा में मिश्री मिलाकर सेवन करवायें। पुरुषों में प्रमेह रोग का घरेलू उपचार

शीघ्र प्रसव– शीघ्र प्रसव हो सके इसके लिये 70 ग्राम की मात्रा मे काले तिल कूटकर 24 घन्टें के लिये जल में भिगों दे। सुबह उन्हें छानकर प्रसव महिला को पीला दें। बच्चा शीघ्र हो जायेगा।

रक्त स्त्राव– प्रसूती या गर्भवती महिला के योनी मार्ग से रक्त निकलना बन्द नही हो तो तिल व जौ को कुटकर शक्कर मिलाकर शहद के साथ चाटना चाहिए।

रक्तार्श-लगभग 50 ग्राम काले तिलों को सोखने योग्य पानी में भिगोये। लगभग 30 मिनट जल में भीगे रहने के बाद उन्हें पीसकर उसमें लगभग एक चम्मच मक्खन एंव दो चम्मच मिश्री मिला दें। इसका प्रतिदिन दो बार सेवन करने से खूनी बवासीर (रक्तार्श) में लाभ होता है।

पेट दर्द– 20-25 ग्राम साफ तिल चबाकर उपर से गर्म पानी पिलाने से पेट का दर्द ठीक हो जाता है। साथ ही तिलों को पीसकर लम्बा सा गोला बनाकर उसे तवे पर सहन करने योग्य करके पेट के उपर फिराने से अत्यन्त से अत्यन्त कष्टदायी पेट का दर्द (उदर शूल) भी शान्त हो जाता है।

सूजाक– 15-15 ग्राम की मात्रा में काले तिल तथा देशी खाड बारीक पीसकर गाय के कच्चे दूध के साथ रोग की स्थिति के अनुसार सेवन करने से लाभ हो जाता है। सूजाक (Gonorrhea) रोग का प्राकृतिक इलाज

बवासीर-

1. काले तिल चबाकर उपर से ठंडा जल पीने से बादी बवासीर ठीक हो जाता है।

2. तिल पीसकर गर्म करके मस्सो पर लेप करने या बाधने से भी बवासीर में लाभ होता है। इसके साथ तिल के तेल का एनिमा (बासी) देने से आते चिकनी होकर शौच के गुच्छे निकल जाते है। जिससे धीरे धीरे रोग समाप्त हो जाने लगता है।

खूनी दस्त (रक्तातिसार)- काले तिल एक भाग में मिश्री 5 भाग मिलाकर पीसकर बकरी के दूध के साथ देने से रक्तातिसार में लाभ हो जाता है।

वात रक्त– तिलों भूनकर दूध में बुझाकर बारीक पीसकर लेप करने से वात रक्त का रोग दूर हो जाता है।

भगन्दर- भयंकर व्याधि भगन्दर या वेदनायुक्त वातजन्य धावों में तिल या असली को भूनकर परन्तु गर्भ स्थिति में दूध में बुझाकर व उसी दूध में पीसकर लेप करना चाहिए। भगन्दर रोग मिट जायेगा।

बहुमात्र– प्रातः साय तिल मोदक (तिल के लड्डू) खाने से अधिक पेशाब आना बन्द हो जाता है।

कब्ज– लगभग 60 ग्राम तिल लेकर उन्हे कूट लें फिर उनमें कोई मिष्ठान मिला लें। इसे खाने से कब्ज का नाश होता है।

बालों में रूसी होना- बालो में तिल के तेल की मालिश कर लगभग 30 मिनट के पश्चात गर्म पानी में भीगी एंव निचोडी हुई तौलिया सिर पर लपेंटें। तौलिया के ठंडे होने पर पुनः तौलिया गर्म जल में भिगोकर निचोड़कर सिर पर लपेटे। यह क्रिया लगभग 5 मिनट तक करे। फिर कुछ देर के बाद शीतल जल से सिर धो लेने पर रूसी दूर हो जायेगी ।

सुखी खासी– यदि सर्दी के कारण सूखी खासी हो तो 4-5 चम्मच मिश्री एंव इतने ही तिल मिश्रित कर ले। इन्हे एक गिलास मे आधा पानी रहने तक उबाले। इसे प्रतिदिन प्रातः साय एंव रात्री के समय पीये।

आग से जलना- तिल जल में चटनी की भाती पीस लें। इस का दग्ध जले स्थान पर मोटा लेप करने से जलन शान्त हो जाती है।

मोच आना- तिल की खल लेकर उसे पीसे एंव पानी मे गर्म करे फिर उतारकर गर्म ही मोच आये स्थान पर बाधने से मोच के दर्द में लाभ होता है।

मानसिक दूर्बलता– तिल गुड दोनो सममात्रा में लेकर मिला लें।उसके लड्डू बना ले। प्रतिदिन 2 बार 1-1 लड्डू दूध के साथ खाने से मानसिक दुर्बलता एंव तनाव दूर होते है। शक्ति मिलती है। कठिन शारीरिक श्रम करने पर सांस फूलना जल्दी बुढ़ापा आना बन्द हो जाता है।

दंत चिकित्सा- प्रातः काल तथा साय काल लगभग 50-50 ग्राम की मात्रा में (बिना मिठा मिलाये) धीरे धीरे काले तिल चबाकर उपर से पानी पीने से दात मजबूत मल रहित हो जाते है। और हिलते हुए दात भी पुनः जम जाते है।

पथरी- तिल क्षार को रोग की दशानुसार देशी शहद में मिलाकर दूध के साथ सेवन करने से पथरी रोग में लाभ होता है।

मकड़ी का विष– तिलो को पिलवाकर तेल निकाल लेने के उपरान्त बचे भाग खली में थोड़ी हल्दी मिलाकर पानी में पीसकर रोग स्थान पर लेप कर देने से मकड़ी का विष समाप्त हो जाता है।

मुहासे- मुहासो के लिए तिल की खली को जलाकर इसकी राख में गोमूत्र मिलाकर लेप करने से कुछ दिनों में मुहासे ठीक हो जाते है।

नारू रोग- खली तिल की को काफी में पीसकर लेप करने से नारू रोग में लाभ होता है।

बहुमूत्रता– जाड़े के दिनो में गुड़ तिल की गर्म ताजा गजक खाने से अधिक पेशाब आना और गले की खुजली ठीक हो जाती है।

तिल का प्रयोग करने के लिए लोग til gud ke ladoo recipe in hindi का भी प्रयोग करते हैं. साथ ही til oil benefits for hair भी हैं. Til oil ko hair me lagane se baal lambe aur ghane bante hai. Til ka tel benefits ek nahi anek hai. Sesame oil yani til ka tel ayurved में बड़ा महत्व रखता है.

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1 Comment

  1. hello sir i am suffering from fistula from last 2 months,in MIR it is lower level fistula..pl sugess me best and effective medicine for fistula…thanks…

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