गेहूं के औषधीय गुण और घरेलू उपचार (Wheat)

गेहूं पूरे भारत देश पाया जाता और किसी न किसी रूप में सभी इसे खाते है | लेकिन इसका उपयोग उपचार के लिए कैसे करे इसकी जानकारी काफी कम लोगों को है | अतः हमने यहाँ पर गेहूं के कुछ औषधीय गुण और घरेलू उपचार दिये है जिससे आपको काफी जानकारी मिलेगी |

dadi maa ke gharelu nuskhe from wheat

 

1. खाँसी में गेहूं से  उपचार : २० ग्राम गेंहू के दानों को नमक में मिलाकर २५० ग्राम जल में उबाल लें एक तिहाई मात्रा में रहने पर गरम-गरम पी लें | ऐसा लगभग एक सप्ताह करने से खाँसी जाती रहेगी |

2. अनैच्छिक वीर्य पात या स्वप्नदोष : रात को सोते समय, पेशाब के साथ या पेशाब करने के पश्चात अनिच्छा से वीर्य निकलने की स्थिति में एक 100 ग्राम गेहूं लगभग बारह घंटें भिगोकर उसकी बारीकी से लस्सी बनाकर पियें | स्वाद के लिये उसमें उचित मात्रा में मिश्री मिला सकते है | इसके सेवन से वीर्य का पतलापन भी दूर हो जाता है |

3. उदर शूल : गेहूं के हरीरा में चीनी व बादाम गिरी का वल्क मिलाकर सेवन करने से मस्तिस्क (दिमाग) की कमजोरी, नपुंसक, तथा छाती में होने वाली पीड़ा शांत हो जाती है |

4. खुजली : गेहूं के आटे को गूँथ कर त्वचा की जलन, खुजली बिना पके फोड़े फुंसी तथा आग में झुलस जाने पर लगा देने से ठंडक पड़ जाती है |

5. मूत्र कुच्छ : लगभग 70 ग्राम गेहूं रात्रि को सोते समय पानी में भिगोयें और प्रात: उन्हें पीस-छानकर स्वाद के लिये थोड़ी-सी मिश्री मिलाकर पियें | ऐसा सात दिन तक करने से शरीर में उत्पन्न दहकता (गर्मी) शांत हो जाती है | मूत्राशय सम्बन्धी अनेक रोगों से भी मुक्ति मिल जाती है |

6. अस्थि भंग : थोड़े से गेहूं के दानों को तवे पर भूनकर पीस लें और शहद मिलाकर कुछ दिनों तक चाटने से अस्थि भंग दूर हो जाता है |

7. नपुंसकता : अंकुरित गेहूं भोजन से पूर्व प्रात:काल नियमित रूप से खूब चबा-चबा कर खाने से जनेन्द्रिय सम्बंदित सब विकार दूर हो जाते है | यक्ति पूर्णत: पौरुष युक्त होकर स्त्री प्रसंग करने योग्य हो जाता है | स्वाद के लिए अंकुरित गेहूं के साथ मिश्री किशमिश का भी सेवन किया जा सकता है | इसका सेवन कुछ समय तक लगातार नियमित करना चाहिये |

8. किट दंश : यदि कोई जहरीला कीड़ा काट ले तो गेहूं के आटे में सिरका मिलाकर दंश स्थान पर लगाना चाहिये |

9. बालतोड़ : शरीर के किसी भी अंग पर किसी प्रकार मसलकर बाल टूट जाने से फोड़ा हो जाता है, जो की अत्यंत दाहक और कष्टकर होता है | इसमें से गेहूं के दाने चबा-चबाकर बाँधने से २-३ दिन में ही लाभ हो जाता है |

10. पथरी : गेहूं और चने को उबालकर उसके पानी को कुछ दिनों तक रोगी व्यक्ति को पिलाते रहने से मूत्राशय और गुरदा की पथरी गलकर निकल जाती है |

11. बद या ग्रंथि शोध : बद या किसी फोड़ें के पकाने के लियें गेहूं के आटे की पुल्टिस 7 – 8 बार बाँध देनी चाहिये |

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About Dr Kamal Sharma 16 Articles
Hello to my readers. I am Ayurveda Doctor Practicing in Mumbai. Thanks

2 Comments

  1. sir meri wife ko bhojan nali
    me ulsar hai one year se.dr ke anussr ribonik plus aadi medcin liya par sahi na hua aciditybhi bai pl help kare

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