ठंडी के मौसम में बुजुर्ग लोग कैसे करें सेहत की देखभाल

अन्य लोगों की तुलना में सर्दियों के मौसम में सीनियर सिटीजन को स्वास्थ्य संबंधी समस्या कुछ ज्यादा ही सताती हैं | यह सच है कि बुजुर्गों के अलावा बच्चों और अन्य आयु के लोग भी सेहत संबंधी समस्याओं से ग्रस्त हो सकते हैं | लेकिन कुछ सजगता बरतकर सर्दियों में होनेवाली इन समस्याओं का निवारण किया जा सकता है | उत्तर भारत में सर्दियों का मौसम आ चुका है और गुलाबी सर्दी के साथ कुछ बीमारियां भी आ सकती हैं | इससे बचने के लिए कुछ सावधानियां जरूरी हैं |

सर्दी से होने वाली बीमारियां दो तरह के लोगों को ज्यादा परेशान करती हैं पहला बच्चों और दूसरा बुजुर्गों को यहां पर हम बुजुर्गों को होने वाली कुछ बीमारियों के कारण, लक्षण और बचाव के तरीके के बारे में जानकारियां दे रहे हैं | बुजुर्गो को इस मौसम में होने वाली कुछ बीमारियां इस प्रकार हैं – ह्रदय से संबंधित रोग, हार्ट अटैक, हर्निया,  दम फूलना |

हृदय से संबंधित रोग

सर्दियों में बुजुर्गों के दिल से संबंधित यह परेशानियां बन सकती हैं –

  • उच्च रक्तचाप या हाई ब्लडप्रेशर होना
  • हार्ट अटैक करना
  • हार्ट फेल होना

ह्रदय रोग के लक्षण

यह रोग कभी भी हो सकता है | शुरुआत में कोई भी लक्षण प्रकट नहीं होते है सिर्फ जांच से ही हृदय संबंधी समस्याओं का पता चल सकता है | कुछ लक्षण इस प्रकार हैं –

  • सिर दर्द होना
  • सांस फूलना और में सूजन आना लेटने पर खांसी आना और सीने में दर्द होना

ह्रदय रोग के उपाय

  • नियमित जांच करवाएं और दवा लें
  • उपर्युक्त लक्षण प्रकट होने पर शीघ्र ही डाक्टर की सलाह डाक्टर की सलाह ले
  • हृदय और गुर्दे के रोगी तरल पदार्थ की मात्रा डाक्टर के परामर्श के अनुसार ही ले

हाईपोथार्मिया (Hypothermia) का रोग

इसका मतलब शरीर का तापमान कम हो जाना | बुजुर्ग और बच्चों के शरीर में गर्मी जल्दी बाहर आ जाती है यदि उपयुक्त सावधानियां ना बरती जाएं तो वह हाईपोथार्मिया के शिकार हो सकते हैं | लापरवाही बरतने पर यह समस्या जानलेवा हो सकती है

हाईपोथार्मिया के लक्षण

  • शरीर का ठंडा पड़ जाना
  • बेशुध होना
  • हृदय गति का धीमा पढ़ना

हाईपोथार्मिया के उपाय और सावधानियां

  • बाहर जाने के पहले उपयुक्त ऊनी कपड़े पहनें
  • एक या दो मोटे कपड़े पहनने के बजाय कई लेयर वाले पतले कपड़े पहने
  • बीमार विकलांग या बुजुर्ग लोगों का खास ध्यान रखें यह लोग कंबल या रजाई आदि का प्रयोग करें
  • ज्यादा ठंड में बाहर जाने से बचें
  • गरम पर पदार्थ का सेवन अधिक करें

चिलब्लेन (Chilblain)

चिलब्लेन में पैरों और हाथों की उंगलियों में ठंड लग जाती है | इसमे ऊंगलियों नीला या लाल हो जाती हैं और इससे होने वाले दर्द और खुजली को मेडिकल भाषा में चिलब्लेन कहते हैं | यह समस्या ज्यादातर सर्दियों में ही होती है | इससे बचने के लिए आप दास्ताने और जुराव का प्रयोग सर्दी के शुरुआती दौर से ही करें | कम सर्दी में सूती और ज्यादा सर्दी में ऊनी कपड़े पहने | समस्या होने पर गर्म पानी से सिकाई करें लेकिन यह ध्यान रहे कि पानी ज्यादा गर्म ना हो |

दमा का रोग

तापमान में गिरावट, कोहरा, प्रदूषण या वायरल इंफेक्शन के कारण सर्दियों में सांस की समस्याएं ज्यादा होती हैं | इन समस्याओं में दमा (अस्थमा) प्रमुख रूप से है |

दमा के लक्षण

  • सांस फूलने के साथ सांय – सांय की आवाज आना
  • पीला सफेद बलगम आना
  • खाँसी का बढ़ जाना
  • रात को सो ना पाना
  • सुस्ती आना

दमा दूर करने के उपाय

  • दमा रोगी सर्दी की शुरुआत में डॉक्टर के पास जाकर अपनी दवाई की मात्रा नए सिरे से निश्चित करवा लें | हो सकता है मौसम में बदलाव के साथ दवा की डोज बढ़ानी पड़े |
  • गर्म कपड़े पहने और वह कान को जरूर ढक कर रखें |
  • दवा के बारे में अपने मित्रों और सगे सम्बन्धियों को जरूर बताएं |
  • खाने में हल्दी, अदरक, तुलसी, काली मिर्च और केसर आदि का प्रयोग करें|

फ्लू

यह एक प्रकार के वायरस के कारण होने वाली बीमारी है

फ्लू के लक्षण

फ्लू से बचने के उपाय

  • मौसम में बदलाव से पहले हर साल फ्लू का टीका लगवाएं |
  • तुरंत डॉक्टर की सलाह लें |
  • बुखार और दर्द के लिए पेरासिटामोल का प्रयोग करें |
  • बीमार लोगों को घर पर रह कर आराम करना चाहिए जब तक अति आवश्यक ना हो करवानी सार्वजनिक जगह पर ना जाएं |
  • पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थों का सेवन करें |
  • साफ सफाई का ध्यान रखें

सर्दियों में सावधानियां

  • धूप निकलने के बाद ही सैर करने जाएं
  • फिटनेस एक्सपर्ट की सलाह के अनुसार ही व्यायाम करें
  • गरम तरल पदार्थ जैसे चाय दूध और सूप का प्रयोग करें
  • डाक्टर की सलाह से समय रहते फ्लू और निमोनिया का टीका लगवाए
  • हृदय और किडनी के मरीज मौसम में बदलाव पर अपने डॉक्टर की सलाह लें और नियमित दवाएं लें और तरल पदार्थ की मात्रा की भी जानकारी लें
  • फ्लू जैसी संक्रामक बीमारी के दौरान में घर में रहें ताकि बीमारी को फैलने से रोका जा सके
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