डी एंड सी होता क्या है ? D & C Hota Kya hai ?

हो सकता है कि कभी आपको या आपकी सहेली को डॉक्टर ने ‘डी एंड सी’ ऑपरेशन करवाने की सलाह दी हो. ये शब्द देखने समझने में रहस्यपूर्ण से लगते हैं और महिलाएं समझती है कि यह कोई बहुत खतरनाक व गंभीर ऑपरेशन है. लेकिन वास्तव में ऐसा नहीं है( Full Form of D and C is Dilation and curettage).

डी एंड सी का अर्थ होता है- Dilatation (फैलाना) और Curettage (खुरचना). इस ऑपरेशन में शल्य चिकित्सक योनिद्वार से गर्भाशय तक के मार्ग को चौड़ा करता है और गर्भाशय में चम्मच जैसा एक उपकरण डाल कर उसकी दीवारों पर जमीं ऊतकीय परतो को खुरचता है. ये परते मासिक स्त्राव के दौरान जमती है और गर्भाशय को निरंतर संकरा बनाती जाती है. इस समस्या को दूर करने के लिए इन परतों को हटाना जरूरी होता है (D and C me Mahila ke Pet ki Safai ki Jati hai).

यही डी एंड सी है. यह केवल दस मिनट का छोटा सा ऑपरेशन है (D and C ek Minor sa Operation Hota hai) और बहुत सामान्य भी है. संभवतः  आप देखेंगी कि आपके अस्पताल के फार्म पर ‘डी एंड सी’ प्लस लिखा है. यहां ‘ई यू ए’ का अर्थ है कि ऑपरेशन से पूर्व आपको सचेत किया जाना है. कई महिलाएं सचेतावस्था में अपने आंतरिक भागों की जांच नहीं करवा पाती. इसीलिए उन्हें सचेत करना पड़ता है.

आखिर यह क्यो जरूरी है ? Aakhir Yeh Kyu Jaruri Hai

डी एंड सी से आपके गर्भाशय के भीतर की स्थिति का पता लगाया जा सकता है. कोई भी डॉक्टर या स्त्री रोग विशेषज्ञ आपके शरीर की बाहरी जांच से गर्भाशय संबंधी गड़बड़ियों का पता नहीं लगा सकता. लेकिन यदि डी एंड सी किया गया है तो गर्भाशय से खुरचे हुए ऊतकों को प्रयोगशाला में परीक्षण के लिए भेजा जा सकता है. वहां इन्हें सूक्ष्मदर्शी की सहायता से देखा जाता है. प्रयोगशाला की रिपोर्ट से शल्य चिकित्सक को इस बात का पता लगाने में काफी आसानी हो जाती है कि आपको में काफी आसानी हो जाती है कि आपको किस तरह का स्त्री रोग है. डी एंड सी किए जाने के कई कारण हो सकते है. इन्हें मुख्यतः दो श्रेणियों में बांटा जा सकता है- परीक्षण या निदान के लिए और इलाज के तौर पर किया जाने वाला डी एंड सी( Dilation and curettage bde Faydo ki ek Chhoti si Surgery hoti hai)

परीक्षण व निदान में डी एंड सी का उपयोग कैसे किया जाता है Parikshan And Nidan me D and C ka Upyog Kaise Kiya Jata hai

  1. बांझपन के कारण का पता लगाने के लिए.
  2. अत्यधिक व अनियमित रक्त स्राव का कारण जानने के लिए.
  3. गर्भाशय के कैंसर (खासकर प्रौढ़ महिलाओं में) का पता लगा लगाने के लिए.
  4. रजोनिवृत्ति के पश्चात हारमोन रीप्लेसमेंट थेरेपी का उपयोग कर रही महिलाओं में.

इन महिलाओं में डी एंड सी से पता लगाया जाता है कि कहीं हार्मोनो का उनके गर्भाशय पर दुष्प्रभाव तो नहीं पड़ रहा.

उपचार में डी एंड सी का उपयोग Upchar me D and C ka Upyog

  1. गर्भाशय की जिस lining से खून बह रहा हो उसे हटकर अत्यधिक रक्तस्राव को रोका जा सकता है.
  2. गर्भाशय में होने वाली हल्की पर तकलीफ देह सूजन से भी Curettge (खूरचने का उपकरण) के जरिए आराम पाया जा सकता है.
  3. शिशु के जन्म के बाद गर्भाशय में बचे रह गए नाल के टुकड़ो को बाहर निकाल कर उनके कारण होने वाला रक्त स्राव रोका जा सकता है.
  4. गर्भ गिरने या गर्भपात की स्थिति में गर्भाशय में बचे रह गए नाल के टुकड़ों को बाहर निकाला जा सकता है.
  5. गर्भपात का आदर्श तरीका भी डी एंड सी ही है. हालांकि आजकल दूसरे तरीके अधिक प्रचलित हो गए है.
  6. मासिक धर्म के दौरान अत्यधिक दर्द की शिकार महिलाएं भी डी एंड सी के जरिए राहत प्राप्त कर सकती है. गर्भाशय की गर्दन को चौड़ा करने से प्रायः ऐसी महिलाओं को आराम मिलता है. हालांकि इस तकलीफ के उपचार के लिए डी एंड सी का उपयोग कम ही होता है क्योंकि आजकल मासिक के दर्द से मुक्ति दिलाने वाली गोलियां भी उपलब्ध है.

डी एंड सी की प्रक्रिया D and C Ki Prakriya

डी एंड सी के मरीजो को पहले एकाध दिन के लिए अस्पताल में दाखिल किया जाता है ताकि उनकी जांच की जा सके. आपरेशन के दौरान उन्हें अचेत कर दिया जाता है. इसके पश्चात स्त्री रोग विशेषज्ञ आपके गर्भाशय की गर्दन तक जाने वाले मार्ग को करीब 12 मिलीमीटर के व्यास तक चौड़ा कर देता है. यह खतरनाक प्रतीत होता है पर वास्तव में इससे कोई हानि नहीं पहुंचती. आखिरकार बच्चे के जन्म के समय तो गर्भाशय की गर्दन अपेक्षा बहुत अधिक चौड़ी हो जाती है.

इसके पश्चात शल्य चिकित्सक गर्भाशय के भीतरी चारों ओर जमे अनावश्यक पदार्थों को खुरच देता है. इसके स्थान पर कुछ समय में स्वस्थ, नवीन lining आ जाती है. ‘डी एंड सी’ में बस यही सब होता है. इसमें कोई टांका नहीं लगाया जाता, कोई चीरा नहीं लगाया जाता यदि सब कुछ ठीक ठाक रहा तो आपरेशन के बाद आप अपने पैरों पर चलकर अपने वार्ड तक जा सकती है. इसलिए पहले से ही पर्याप्त संख्या में अतिरिक्त सैनिटरी टावल का प्रबंध करके रखें. कभी कभी मरीज को घर लौटाने के बाद कुछ खास समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है. ये है :

खून का अधिक बहना Blood ka Adhik Bahana ऐसा होने पर बिस्तर पर लेट जाएं. रूई के फाहे से खून का बहाव रोकने की कोशिश करें. आपातकालीन स्थिति में सैनिटरी टाबल भी आधा काट कर रक्त स्राव रोकने के लिए योनि में प्रविष्ट कराया जा सकता है. फौरन अपने विशेषज्ञ डॉक्टर को फोन करें.

शरीर के तापमान में बढतोरी Body Temprature me Badhotri यदि आपको तेज बुखार है तो इसकी वजह इन्फेक्शन (संक्रमण) हो सकती है. ऐसी स्थिति में अपने विशेषज्ञ डॉक्टर से संपर्क करें.

गंदे तरल का बहना Gande Taral ka Bahana इसका कारण भी इन्फेक्शन हो सकता है. इस अवस्थ में भी डॉक्टर को दिखाना जरूरी है.

पेट में जोर का दर्द Pet me Jor ka dard यह इस बात का संकेत हो सकता है कि खुरचते समय गर्भाशय में चोट लग गई है. हालांकि ऐसा बहुत कम होता है. आराम करे और फौरन डॉक्टर को बुलाएँ.

घरेलू झगड़े है रोगो का कारण Gharelu Jhagde hai Rogo Ka Karan

झगड़े हर घर में होते है. आपसी तू तू मै मै एक सीमा तक स्वास्थ्य के लिए अच्छा भी होता है क्योंकि इसमें मन में छाया हुआ गुबार छंट जाता है और मन हल्का हो जाता है. किन्तु यदि झगड़े रोज रोज के हो जाये और उनसे कोई हल निकालना नजर न आये तो आदमी बीमार पड़ सकता है और जो पहले से बीमार है उसकी बीमारी बढ़ सकती है.

इस संबंध में 35 से 70 वर्ष के बीच के ऐसे व्यक्तियों पर किया जिन्हें हाल ही में दिल का दौरा पड़ा था(Gharelu Jhagde Bhi Heart Attack ka Karan Bante) उन्होने पाया कि उन सबका घरेलू जीवन काफी समय से कलहपूर्ण चल रहा था. कलह कई तरह का था. किसी की पत्नी से नहीं पटती थी, कोई इस बात से हताश था कि उसके बच्चे पढ़ने लिखने से मन चुराते है, किसी के युवा बेटे ने उनको अकेला छोड़कर अपनी अलग दुनिया बसा ली थी.

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