महाऔषधिय गुणों से भरपूर है गौमय Mahaushadhi ke Guno se Bharpoor hai Gomay

हमारी भारतीय संस्कृति में हमेशा से ही गाय को माता का पवित्र स्थान दिया गया है. गाय या गौ माता, किसी चिकित्सालय से कम नहीं. गाय के दूध से लेकर मूत्र, हर एक में कुछ न कुछ औषधीय गुण होते हैं. गाय का गोबर, जिसे हम खाद के रुप में इस्तेमाल करते हैं, में भी अनेको ऐसे गुण विद्वान हैं जिनसे आप अनजान हैं. आयुर्वेद चिकित्सा में भी गाय के गोबर, गौमूत्र सभी के गुणों का वर्णन मिलता है (Gomay Ke Adbhut Guno se Bharpoor hai).

अग्रमग्रं चरन्तीनाषधधिना वने व ने तासामृषभपत्रीनां पवित्रां कायशोध्नम् तन्मे रोगांश्च शोकांश्च नुद गोमय सर्वदा .

इस मंत्र का भावार्थ है कि गोबर पोषक, शोधक, दुर्गंध नाशक, सारक, बलवर्धक और शरीर के लिए कांतिदायक होता है. हमारे ग्रंथों में मिले उल्लेख के अनुसार सिर से पैर तक गोबर का लेप कर और स्नान करने के समय यह मंत्र उच्चारण करना चाहिए (Ayurved me Gomay ka Mahtav).

आयुर्वेद चिकित्सा ग्रंथों में गाय, गौमय, गौमूत्र, गौदुग्ध, गौघृत, गौदधि की महिमा का वर्णन अनेक स्थानों पर प्राप्त होता है. इन सब में से गौमुत्र को समस्त विकारों के नाश के लिए अमृत माना जाता है. आयुर्वेद आचार्यों ने गौमूत्र को कफ, वात और पित्त – त्रिदोष नाशक बताया है. भारत में गौ को अपने विभिन्न अमृतमय गुणों के कारण हमेशा से ही माता की संज्ञा दी जाती रही है. ऐसी मान्यता है कि यह घर के शुद्धिकरण में मददगार होता है. प्रसव के बाद गौ के पांच द्रव्य जिसे पंचगव्य कहा जाता है को पिलाने की परंपरा आज भी है. इससे प्रसूता के गर्भस्थ संक्रामक जीवाणु तत्काल नष्ट हो जाते हैं (Gomay Mahaushadhi ka Bhandar Hai)

गौमूत्र, गौदुग्ध के औषधीय गुणों से तो सभी भली-भांति परिचित हैं परंतु के गौमय के गुणों के बारे में आज भी कई लोग अनजान हैं. गाय के गोबर से बने उपलों (कंडों) के धुएं से प्रदूषण नहीं फैलता है बल्कि यह वायु को शुद्ध करता है. वायुमंडल का प्रदूषण दूर करने के साथ यह विषाक्त कीटाणुओं को भी नष्ट करता है. इससे वातावरण स्वास्थ्यप्रद बन जाता है.

गोबर के औषधीय उपयोग तथा लाभ Gobar ke Aushadhi Upyog Tatha Labh

शतधौत क्रिया पानी से धोने की एक विशेष विधि है Shatdhaut Kriya Pani se Dhone ki Ek Vishesh Vidhi hai किसी कांसे की थाली में लगभग 100 ग्राम मक्खन डाले और उसमें पानी का छींटा मारे, फिर उसे हाथ से मले. जब वह पानी मक्खन से अलग हो जाए, तब फिर छीटा मारे, फिर मथे या मले. यही क्रम 100 बार करें और उस पानी को हर बार बाहर डालते जाए. आयुर्वेदिक शब्दों में इसे ‘शतधौत क्रिया’ कहते हैं. फिर इस मक्खन में 25 ग्राम गोबर भस्म मिलाकर रख लें. शरीर पर जहां भी खाज खुजली हो इस लेप को लगाएं, तुरंत आराम मिलेगा.

गौमय से खाज खुजली इलाज Gomay se Khaj Khujali Ka Ilaj थोड़ी देर के लिए गौमय को सुखा लें. इसे जलाकर भस्म तैयार कर ले. अब गाय के दूध से बने मक्खन को 100 बार पानी से धो.

रक्त दोष को दूर करता है Rakt Dosh Ko door Karta hai गौमय शरीर पर छोटी-छोटी फुंसियां होने का मुख्य कारण होता है रक्त दोष अर्थात् अशुद्ध रक्त होना. रक्त दोष के कारण फोड़े आदि होने पर रोगी को बहुत दर्द होता है. कई बार अनेक उपचार करने पर भी परेशानी ज्यों की त्यों ही रहती है. ऐसी स्थिति में ताजे गोबर का रस लगभग 10 ग्राम सुबह शाम सेवन करने से लाभ होता है. (रस निकालने के लिए एक सूती कपड़े में ताजे गोबर को बांधकर उसे निचोड़े. इससे कपड़े से छान कर रस निकलता है.) इसके अतिरिक्त फोड़े फुंसियों को गौमूत्र से धोकर उन पर गोबर का लेप करने से भी राहत मिलती है.

दृष्टि दोष में है फायदेमंद Drishti dosh me Faydemand गोबर के ताजे रस को निकाल कर प्रतिदिन सुबह-शाम 2 बूंद दोनो आंखों में डालें. इससे दृष्टि दोष ठीक हो जाता है. Read More – कमजोर दृष्टि का घरेलू इलाज

आंखों की फुंसी से राहत Ankho ki Funsi se Rahat कभी न कभी हर व्यक्ति की आंखों की पलकों के अंदर फुंसी निकल आती है. उससे व्यक्ति को बड़ी असुविधा होती है. ऐसी स्थिति में गाय के ताजे गौमूत्र की आंखों में दो-दो बूंद दिन में लगभग 2-3 बार डालें. आंखों की पलकों पर लेप करने मात्र से ही तत्काल लाभ मिलता है. Read More – आँखों के नीचे काले घेरों का इलाज

गौमय से एड़ी के दर्द का इलाज Gomay se Adi ke Dard Ka Ilaj जब एड़ी में किसी भी कारण से दर्द रहता हो और चलने फिरने में कष्ट होता हो तो ऐसी स्थिति में प्रतिदिन सूर्योदय से पूर्व गाय के ताजे गोबर में पैर (एड़ी) रखकर लगभग 10 मिनट खड़े रहे. यह प्रयोग सुबह शाम करना और भी अधिक लाभप्रद होता है. (गाय का गोबर बिल्कुल ताजा और गर्म होना चाहिए.) गाय की उपलों की गरम भस्म एड़ी पर मलने से भी दर्द बंद हो जाता है. यह प्रक्रिया दिन में 2-3 बार करें. Read More – फ्लैट फुट की समस्या कारण और समाधान

उदर कृमि का उपचार Udder Krimi ka Ilaj लगभग 4 चम्मच गौमूत्र का सुबह शाम सेवन करे. एक घंटे के लिए नाभि पर गाय का ताजे गोबर का लेप कर दे. इससे पेट के कीड़े कुछ ही दिनो में मल के साथ निकाल जाएंगे.

गौमय से बर्र, मच्छर, मक्खी, मकड़ी आदि के काटने पर इलाज Gomay se Barn, Machar, Makhi, Makdi Aadi ke Katne par Ilaj जब कोई छुद्र जंतु बर्र आदि काट लेते है तो उस स्थान पर सूजन हो जाती है, रोगी को अत्यंत जलन होती है व त्वचा पर फफोले भी उठ जाते है. अधिक वेदना के कारण कै बार रोगी को ज्वर भी हो जाता है. इसके लिए जब कोई ऐसा जंतु काट ले तो तत्काल गाय के गोबर को उस स्थान पर अच्छी तरह मल कर उसका मोटा लेप लगा दें. दिन में लगभग 2-3 बार ऐसा करने से विषाणु नष्ट हो जाते है और रोगी को आराम मिल जाता है.

भयंकर जलोदर रोग से छुटकारा Bhayankar Jlodar dard se Chutkara जैसा की नाम से प्रतीत होता है, जलोदर रोग में पेट में पानी भर जाता है. इसमें रोगी की थोड़ी लापरवाही भी जानलेवा सिद्ध हो सकती है. ऐसी स्थिति में रोगी को धूप में लेटाकर उसके पेट पर गाय के ताजे गोबर का लेप करे. लेप की परते मोटी होती चाहिए. दिन में करीब 3-4 बार ऐसा करे. इसके साथ ही 50 ग्राम गौमूत्र में 2 ग्राम यवक्षार मिलाकर आवश्यकतानुसार दिन में 2-3 पिलाएं. रोगी को केवल गौदुग्ध पर रखे. आशातीत लाभ होता है.

गौमय योनि कंडु रोग को दूर करता है Gomay Yoni Kundu Rog ko Door Krata hai गोबर का रस निकालकर उससे योनि का प्रक्षालन करे फिर डेटोल भावित जल से धो दें. यह क्रम कुछ दिन करने से योनि की खुजली व फंगस आदि रोग ठीक हो जाते है.

सर्पदंश में लाभ Sarpdansh me Labh यदि आपको कभी कोई विषधर सांप या अन्य जंतु काट लें, तो गौ के पंचद्रव्य लाभदायक होते है. विषधर जंतु के काट लेने पर विष के प्रभाव से व्यक्ति को बार बार बेहोशी जैसा महसूस होता है. ऐसी स्थिति में रक्त मोक्षणादि कर्म करने के बाद गोबर का रस, गौदुग्ध, गौघृत, गौदधि और गौमूत्र समान भाग में लेकर गर्म कर लें. इसके गुनगुना होने के बाद हर 10 मिनट के अंतराल पर रोगी को इसका सेवन कराते रहें. साथ ही रोगी के सिर के बाल इस्तुरे से बनवा (उतार) दे और उसपर ताजे गोबर का लेप करें. लेप की परत मोटी होनी चाहिए. इससे रोगी की निश्चित ही प्राणरक्षा होती है.

गौमय चेचक रोग में सहायक Gomay Chechak Rog me shayak चेचक का रोगी जिस कमरे में विश्राम करता है उस पूरे कमरे में गाय के गोबर से लेप कर दें. कमरे में कंडों की धूप दें. रोगी को गौमूत्र पान भी कराएं. इससे शीघ्र आराम मिलता है. चेचक की तीव्रावस्था में गोबर के रस में कपूर मिलाकर लगाने से शीतलता मिलती है. इससे रोग से शीघ्र राहत पाने में भी सहायता मिलती है. Read More – चेचक, शीतला व मसूरिया का ज्वर का घरेलु उपचार

शीतपित्त का उपचार Shitpit ka Upchar शीतपित्त में शरीर पर व्रण का निर्माण हो जाता है जिन पर रोगी को तीव्र खुजली होती है. बार बार खुजली करने से व्रण से रक्तस्त्राव होने की भी संभावना रहती है. ऐसी स्थिति में गोबर रस में थोड़ा सा कपूर मिलाकर पूरे शरीर पर लगाएं. इससे आपको तत्काल आराम मिलेगा. गोबर रस में कपूर और गेरू मिलाकर लेप करना अधिक फायदेमंद होता है. त्वचा रोगों में तरिचादि तेल का भी प्रयोग किया जा सकता है. इसमें भी गोबर रस मौजूद होता है.

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