अफीम खाने के फायदे और नुकसान Afeem Ke Fayde Aur Nuksaan In Hindi

afim ke fayde aur nuksaan

अफीम खाने के फायदे और नुकसान Afeem Ke Fayde Aur Nuksaan in Hindi

अफीम पोस्त के पौधे (poppy) से प्राप्त की जाती है। पौधे की ऊंचाई एक मीटर, तना हरा,सरल और स्निग्ध, पत्ते  आयताकार, पुष्प सफेद, बैंगनी या रक्तवर्ण, सुंदर कटोरीनुमा एवं चौथाई इंच व्यास वाले आकार में होते हैं। फल, पुष्पों के झड़ने के तुरंत बाद ही लग जाते हैं, जो एक इंच व्यास के अनार के समान होते हैं। ये डोडा कहलाते हैं। बाद में ये अपने आप फट जाते हैं। फल का छिलका पोश्त कहलाता है। सफेद रंग के सूक्ष्म, गोल, मधुर स्निग्ध दाने बीज के रूप में डोडे के अंदर होते हैं, जो आमतौर पर खसखस के नाम से जाने जाते हैं।

बाजार में अफीम घनाकार बर्फी के रूप में जमाकर बेची जाती है। नमी का असर होते ही अफीम मुलायम हो जाती है। इसका आंतरिक रंग गहरा बादामी, चमकीला होता है, जबकि बाहरी रंग कालिमा लिए गहरा भूरा होता है। इसमें विशिष्ट प्रकार की तीव्र गंध होती है, जो स्वाद में तिक्त होती है। गर्म जल में घुल जाने वाली अफीम जलाने से न तो धुआं निकलता है और न राख ही शेष रहती है।

अफीम के विभिन्न भाषाओं में नाम Afeem Name In Various Languages

  • संस्कृति-अहिफेन।
  • हिंदी-अफीम।
  • मराठी-आफू।
  • गुजराती-अफीण।
  • बंगाली – आफिम।
  • अंग्रेजी-ओपियम (Opium) 
  • लेटिन—पापावर सोम्नीफेरम (PapaverSomnifrerum) |

अफीम के औषधीय गुण Afeem Ke Gun in Hindi

आयुर्वेद मतानुसार अफीम गरम प्रक्रति, स्वाद में तिक्त, प्रभाव में मादक, कफ-वात शामक, पित्त प्रकोपक, नीद लाने वाली, वेदना नाशक, पसीना लाने वाली, शारीरिक स्रावों को रोकने वाली होती है।

यूनानी मतानुसार अफीम मस्तिष्क की शक्ति को उत्तेजित करती है, शरीर की शक्ति व गर्मी को बढ़ाने से आनन्द और संतोष की अनुभूति प्रदान करती है। आदत पड़ने पर निर्भरता बढ़ाना, शारीरिक अंगों की पीड़ा दूर करने की प्रकृति, कामोत्तेजक, स्तम्भन शक्ति बढ़ाने वाली, आधासीसी, कमर दर्द , जोड़ो के दर्द,  बहुमूत्र, मधुमेह, श्वास के विविध रोग, अतिसार, खून के दस्त में गुणकारी है।

आधुनिक मतानुसार अफीम की रासायनिक संरचना का विश्लेषण करने पर मुख्य रूप से मार्फीन 5 से 31 प्रतिशत, जल 16 प्रतिशत, अल्प मात्रा में कोडीन, थीबेन, नार्सीन, नार्कोटीन, पापवरीन, एपोमोर्फिन, आक्सीडीमोर्फिन, एपोकोडिन, ओपियोनिन, मेकोनिन एसिड, दुग्धाम्ल, राल, ग्लूकोस, अमोनिया, उड़नशील तेल, मैग्नेशियम के लवण आदि तत्व पाए गए हैं। एलोपैथिक चिकित्सा में अफीम से प्राप्त मोर्फिन, कोडीन का सबसे अधिक उपयोग किया जाता है।

अफीम का प्रभाव मुख्य रूप से मस्तिष्क और वात नाड़ियों के सुषुम्ना केंद्र पर ज्यादा होता है। इससे पीड़ा कम होती है, नींद आती है, वीर्यस्तम्भन होता है, उत्तेजना मिलती है, मादक असर होता है और अधिक पसीना आता है।

[ इसे भी पढ़ें –अफीम का नशा उतारने का घरेलू नुस्खा]

अफीम के नुकसान Afeem Ke Nuksaan – Side Effects

अफीम की आदत पड़ जाने के बाद जो व्यक्ति इसका नियमित सेवन करने लगते हैं, उनमें दुष्परिणाम स्वरूप नेत्र की पुतलियों का संकोचन, अधिक नींद आना, श्वास की गति धीमी होना, अवसाद, अधिक पसीना आना, नाड़ी की गति मंद होना, अचेतनता, कमजोरी, मद, विषम श्वास, देह शीतलता, सांस लेने में तकलीफ होना, त्वचा में संकोचन, हाथ-पैर व मुख की त्वचा काली पड़ना आदि रोग होते हैं और अंत में मृत्यु भी हो जाती है।

अफीम लेने की मात्रा How Much Afeem Amount To Use

30 से 125 मिलीग्राम।

विभिन्न रोगों में अफीम से इलाज Afeem Ke Fayde – Upchar Ke Tarike In Hindi

वैसे तो अफीम बहुत ही बदनाम है लेकिन इसके कुछ उपचार भी होते हैं | इसका कई रोगों के इलाज में इस्तेमाल किया जाता है (Afeem Ke Fayde In Hindi) | आइये कुछ के बारे में यहाँ पर चर्चा करते हैं –

दांत दर्द के इलाज में Daant Dard Ke Upchaar Me : अफीम और नौसादर बराबर की मात्रा में मिलाकर कीड़ा लगे दांत के छेद में दबाकर रखने से दांत दर्द में राहत मिलती है।

सिर दर्द को ठीक करने में Headache ke upchar me: आधा ग्राम अफीम और एक ग्राम जायफल को दूध में मिलाकर, तैयार लेप को कपाल पर लगाएं या फिर आधा ग्राम अफीम को दो लौंगों के चूर्ण के साथ हलका गर्म करके कपाल पर लेप लगाने से सर्दी और बादी से उत्पन्न सिर दर्द दूर होगा।

खांसी के इलाज में Cough Ko Theek karne Ke Liye: 50 मिलीग्राम अफीम को मुनक्के में रखकर निगल लें। खांसी का दौरा शांत होकर नींद आ जाएगी।

गर्भस्राव को रोकने में Garbhshrav Ke ilaj Me : 40 मिलीग्राम अफीम पिण्ड खजूर के साथ मिलाकर दिन में 3 बार खिलाएं। गर्भस्राव शीघ्र रुकेगा।

स्वरदोष को ठीक करने के लिए : अजवायन और अफीम के डोंडे समान मात्रा में पानी में उबालें और फिर छाने हुए पानी से गरारे करें।

कमर दर्द को ठीक करने के लिए Kamar Dard Ko Theek Karne Ke Liye: एक चम्मच पोस्त के दानों को (खसखस), इतनी ही मात्रा में मिसरी के साथ पीसकर एक कप दूध के साथ दिन में 3 बार सेवन करें।

अतिसार में : आम की गिरी का चूर्ण दो चम्मच, अफीम 180 मिलीग्राम मिलाकर एक चौथाई चम्मच की मात्रा में दिन में 3 बार सेवन कराएं।

वमन, उबकाई के इलाज में : कपूर, नौसादर और अफीम बराबर की मात्रा में मिलाकर मटर के दाने के बराबर की गोलियां शहद के साथ बना लें। दिन में तीन बार एक-एक गोली पानी के साथ दें।

अनिद्रा की शिकायत Neend Na Aane par: गुड़ और पीपलामूल का चूर्ण बराबर की मात्रा में मिला लें। इसे एक चम्मच की मात्रा में अफीम की 80 मिलीग्राम मात्रा मिलाकर रात्रि में भोजन के बाद सेवन कराएं।

आमातिसार : भुनी हुई लहसुन की कली में 60 मिलीग्राम अफीम मिलाकर खाने से आमातिसार में तुरंत राहत मिलती है।

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