अस्थमा का आयुर्वेदिक होमियोपैथिक एक्यूप्रेशर इलाज Asthma (Dama) Ka Ilaj In Hindi

Ayurvedic Natural Remedies for Asthma Dama Ka Ilaj

अस्थमा का आयुर्वेदिक होमियोपैथिक एक्यूप्रेशर इलाज Asthma (Dama) Ka Ilaj In Hindi – यहां इस आर्टिकल में आज हम आपको दमा ठीक करने के Ayuvedic, Homeopathic और Acupressure इलाज के बारे में बताएगें | आइये सबसे पहले जानते हैं आयुर्वेदिक इलाज के बारे में –

1. अस्थमा का आयुर्वेदिक इलाज Asthma Ka Ayurvedic Ilaj In Hindi

आयुर्वेदिक विशेषज्ञों के अनुसार अस्थमा दो तरह का होता है – एक तो हृदय से संबंधित अस्थमा और दूसरा फेफड़ों से संबंधित | दोनों के लक्षण एक जैसे होते हैं और उनमें अंतर कर पाना भी मुश्किल होता है | ठीक से निरीक्षण करने पर ही पता चल पाता है, कि अस्थमा हृदय से संबंधित है या फेफड़े से | मोटे तौर पर यह कहा जा सकता है कि यदि बैठे-बैठे ही रोगी की सांस चढ़ने लगे, उसे दम घुटता सा प्रतीत हो, तो वह हृदय से संबंधित अस्थमा होता है | जबकि दौड़ने के दौरान सांस चढ़े, या एक्सरसाइज के दौरान सांस चढ़े तो वह फेफड़े से होने वाला अस्थमा कहलाता है

आयुर्वेदिक विशेषज्ञ, अस्थमा को 5 भागों में बांटते हैं और उसी के आधार पर इसका इलाज भी करते हैं |

यह पांच प्रकार हैं –

  • महाश्वास
  • ऊर्ध्व श्वास
  • छिन्य श्वास
  • तमक श्वास
  • शूद्र श्वास

महाश्वासयुक्त रोगी ऊपर की तरफ मुंह करके जोर जोर से सांस लेता है | अस्थमा के अटैक के समय उसके नेत्र चंचल और फटे-फटे से हो जाते हैं | वह ठीक से बोल नहीं पाता, तुतलाता है | उसके सांस लेने की आवाज दूर तक सुनाई देती है |

ऊर्ध्व श्वास का रोगी हमेशा ऊपर की तरफ देखकर सांस लेता है | नीचे की तरफ सांस लेने में उसे तकलीफ होती है | ऐसा रोगी कभी-कभी बेहोश भी हो जाता है | उसका मुंह सूखा रहता है और वह छटपटाता है |

 छिन्य श्वास  का रोगी रह-रह कर सांस लेता है | लगातार सांस नहीं ले पाता है | उसकी सांस टूट टूट कर आती है | उसको हृदय में काटने जैसी पीड़ा महसूस होती है | नाभि के नीचे पेडू में जलन होती है, उसकी आंखों में पानी भरा होता है | रोगी की चेष्टाएं बदल जाती हैं, वह कुछ भी बकने लगता है |

अस्थमा के अधिकांश रोगी तमक श्वास श्रेणी में आते हैं | ये रोगी सो नहीं पाते | उनको बैठने से आराम मिलता है | बदलते मौसम में यह अस्थमा ज्यादा परेशान करता है | आयुर्वेद में हर ऋतु को 2 महीने का माना गया है | अतः यह जल्दी-जल्दी रोगी को परेशान करता रहता है इस प्रकार के अस्थमा में एलर्जी से होने वाले अस्थमा के रोगी भी आते हैं |

अंत में पांचवी प्रकार में अस्थमा (शूद्र श्वास) के वे रोगी आते हैं, जो ज्यादा मेहनत करते हैं और रूखा-सूखा खाते हैं | इस प्रकार के रोगियों को कष्टसाध्य अस्थमा नहीं होता है |

आयुर्वेद विशेषज्ञ अस्थमा का मुख्य कारण बासी खाना, गरिष्ठ भोजन, बहुत ज्यादा ठंडी चीजें वा पेय पदार्थ, प्रकृति के विपरीत खानपान व आहार-बिहार, वजन उठाना, ज्यादा उपवास रखना और स्वतः आने वाले वेगों को रोकना मानते हैं जैसे छींक, भूख, पेशाब व इंद्रिय सुख आदि को रोकना | इसके अलावा किसी चीज की एलर्जी भी अस्थमा का कारण बनती है |

एलर्जी वाला अस्थमा बच्चों में तथा 30 वर्ष की उम्र तक बड़ी आसानी से ठीक हो जाता है | उसके बाद उसे ठीक करना काफी कठिन हो जाता है | यदि किसी बड़े को अस्थमा है, तो बच्चों में किसी ना किसी प्रकार के त्वचा संबंधी रोग हो सकते हैं – जैसे फंगल इंफेक्शन इत्यादि |

दमा का आयुर्वेदिक इलाज Dama Ka Ayurvedic Gharelu Ilaj In Hindi

आयुर्वेदिक विशेषज्ञ रोगी की नब्ज देखकर उसकी प्रकृति निर्धारित कर उसी के अनुरूप दवा देते हैं | यहां कुछ दवाएं प्रस्तुत की गयी हैं जिनको किसी भी प्रकार के अस्थमा रोगी ले सकते हैं | सुबह-शाम आधा चम्मच शुद्ध हल्दी पाउडर को दूध व शक्कर में मिलाकर पीने से अस्थमा के रोगी को बहुत फायदा होता है | प्रतिदिन सेवन करने से उसका इनहेलर भी छूट जाता है | मधुमेह के रोगी शक्कर का सेवन न करें | 5 वर्ष की आयु के बाद बच्चे वह बड़े, कनवासव या वासकासव उम्र के अनुरूप मात्रा निर्धारित करके काली चाय में डालकर पिए |

परहेज

ठंडी चीजें, ठन्डे पेय पदार्थ, बासी खाना, तला-भुना खाना आदि ना खाएं | विशेष रुप से अमचुर और इमली से तो एकदम परहेज करें |

2. होमियोपैथिक चिकित्सा से दमा का उपचार

यह चिकित्सा पद्धति लक्षणों पर आधारित है | अतः अस्थमा में विशेष व्यक्ति का इलाज उसके लक्षण देखकर ही किया जाता है | इस पद्धति से इलाज कराने पर अस्थमा जड़ से समाप्त हो जाती है | होमियोपैथी चिकित्सकों का मानना है, कि अस्थमा एक ऐसी बीमारी है, जिसमें दर्द निवारक गोली देकर राहत नहीं पहुंचाई जा सकती है | लक्षण देखकर ही दवा दी जाती है | जो रोगी इनहेलर का प्रयोग करते हैं, उन्हें एक दम से इन्हेलर का प्रयोग बंद करने को नहीं कहा जाता बल्कि धीरे-धीरे ही इन्हेलर का प्रयोग बंद कराया जाता है |

यहां कुछ दवाएं प्रस्तुत हैं, जिन पर संक्षेप में विचार किया जा सकता है लेकिन इलाज किसी योग्य चिकित्सक की सलाह के बाद ही करें – काली कर्ब, एन्टमटार्ट, कार्बोवेज, लेक्सस, नेट्रमसल्फ, फास्फोरस, सिलिका व स्नेगा आदि |

परहेज

अस्थमा के रोगी को कृतिम खुशबू, रंग और आइसक्रीम का सेवन नहीं करना चाहिए |

3. एक्यूप्रेशर पद्धति से दमा का उपचार Acupressure Points For Asthma Treatment

इस चिकित्सा पद्धति में मरीज का इलाज दवा से नहीं बल्कि शरीर के प्रेशर पॉइंट पर दबाव डालकर किया जाता है | एक्यूप्रेशर थेरेपिस्ट मानते हैं, कि यदि अस्थमा रोगी सही तरीके से अपने प्रेशर पॉइंट्स पर दबाव डाले तो उसका इनहेलर तक छूट जाता है |

अस्थमा का संबंध नाक, गले, फेफड़े, श्वास नली और ब्रांकल ट्यूब से है | हमारे हाथ और पैरों में शरीर के सभी हिस्सों के प्रेशर पॉइंट्स मौजूद हैं | यदि उन पर सही ढंग से दबाव डाला जाए, तो अस्थमा के रोगी को बहुत राहत मिलती है | यहां पर हम आपको कुछ प्रेशर पॉइंट्स और उन पर दबाव के बारे में बता रहे हैं |

  • हाथ के पीछे की तरफ अंगूठे के बगल वाली उंगली, जिसे तर्जनी (इंडेक्स फिंगर) कहते हैं, उसके अंतिम छोर पर साइड में बाहर की तरफ हड्डी होती है | यदि उस पर अंगूठे से प्रेशर दिया जाए, तो अस्थमा के रोगी को बहुत फायदा होता है | शुरुआती दौर में अंगूठे से उक्त स्थान पर 40 से 60 बार तक प्रेशर दें | यह क्रिया दिन में 4 से 6 बार दोनों हाथों पर करें |
  • दोनों हाथों की उंगलियों के पोरों पर अंगूठे से प्रेशर दें | यह क्रिया भी दिन में 4 से 6 बार तक करें और प्रत्येक उंगली पर 40 से 60 बार तक दबाव दें |
  • एक्यूप्रेशर प्लेट के बारे में आमतौर पर कहा जाता है कि उस पर खड़े होकर कदम ताल करें, पर एक्यूप्रेशर थेरेपी कहते हैं कि एक पैर पर शरीर का सारा भार डालें और दूसरे पैर को प्लेट पर रखें और सहने लायक तक भार डालें | यह क्रिया दिन में 2 बार और प्रत्येक पैर पर 50 से 60 बार तक करें |

उपरोक्त बताए स्थानों पर प्रेशर देने से मरीज को अस्थमा में बहुत राहत मिलती है |

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