अस्थमा का उपचार एलोपैथिक से Asthma Kya Hota Hai – Dama Ka Upchar Allopathy Se

Asthma Symptoms And Treatment In Hindi

Asthma Kya Hota Hai – Dama Ka Upchar Allopathy Se अस्थमा का उपचार एलोपैथिक से – अस्थमा यानी दमे का रोग आजकल काफी आम है | एलोपैथी, होम्योपैथी, और आयुर्वेद में अस्थमा का उपचार है लेकिन आज इस आर्टिकल में हम आपको बताएगें कि दमा किस होता है और इसका एलोपैथी चिकित्सा में क्या इलाज है |

जीवन की शुरूआत से लेकर मृत्यु तक सांस लेना शरीर की एक अहम क्रिया है | इसके बिना तो जीवन के बारे में सोचा ही नहीं जा सकता, पर जब सांस लेने की इस क्रिया में रुकावट आने लगे और ज़रा सी परेशानी बढ़कर एक गंभीर रूप धारण कर ले तो वह बीमारी बन जाती है | यह बीमारी अस्थमा या दमा (Asthma) कहलाती है | अस्थमा जिसे दमा के नाम से भी जाना जाता है (Asthma is also known as Dama) |आजकल यह रोग बहुत अधिक बढ़ गया है | छोटे बच्चों से लेकर बड़े-बूढ़े सभी इसकी गिरफ्त में आने लगे हैं | प्रदूषण के कारण यह बीमारी दिनों दिन बढ़ती जा रही है | अगर अस्थमा से ग्रसित बच्चों की ही बात करें, तो हम पाएंगे कि आज से तीन दशक पहले तक केवल 5% बच्चे ही इस रोग से पीड़ित थे, जबकि अब यह संख्या बढ़कर 20% हो गई है | अस्थमा का अधिक प्रभाव बचपन और बड़ी उम्र के लोगों में ज्यादा पाया जाता है | आज हमारे देश की लगभग 10% जनसंख्या इस रोग से पीड़ित है |

अस्थमा (दमा) का कारण Dama Kaise Hota Hai

अस्थमा के बारे में मोटे तौर पर कहा जा सकता है, कि सांस की नली में सिकुड़न आ जाना ही इस तकलीफ का मुख्य कारण है | दमा के अधिकांश रोगियों की स्वास नलिका एलर्जी करने वाले अनेक पदार्थों के प्रति संवेदनशील हो जाती है | इनके संपर्क में आने से रोगी को दमा का अटैक पड़ सकता है | यह पदार्थ रोगी के स्वास नली में मुख्यतः वायु द्वारा प्रवेश करते हैं | लेकिन कुछ भोज्य पदार्थों से भी ऐसा हो सकता है | एलर्जी उत्पन्न करने वाले कारणों में मुख्य हैं – मौसम परिवर्तन, रसोई तथा वाहनों का धुआं, किताबों, फर्नीचर, कालीन, पर्दे आदि की धूल और उनमें पलते सूक्ष्म कीटाणु, बाहरी वातावरण की धूल, मिल या फैक्ट्री का धुआं, जूट, घास, उन का रेशा व जानवरों के पंखों से सम्पर्क, फूल तथा पराग कण इत्यादि | इसके अलावा हृदय रोग भी दमे का कारण हो सकता है | जब शरीर के बाएं हिस्से में ठीक तरह से रक्त का संचार नहीं हो पाता है, तब भी सांस लेने में परेशानी होती है इसको कार्डिएक अस्थमा कहते हैं |

शोध के आधार पर यह बात सामने आई है, कि आंशिक अनुवांशिकता भी अस्थमा की एक प्रमुख वजह है | कई विकासशील देशों में तो अस्थमा एक आम बीमारी बन गई है | वैसे गांव की अपेक्षा शहरी लोगों में यह बीमारी ज्यादा पाई जाती है | कुछ सर्वेक्षण यह भी बताते हैं कि उच्च वर्गीय बच्चों में अस्थमा की बीमारी अधिक होती है | यदि माता-पिता दोनों ही इस बीमारी से पीड़ित हैं, तो उनके बच्चों में इस रोग की होने की संभावना अधिक रहती है | अगर माता-पिता में से एक ही इस रोग से ग्रसित है तो भी इस की संभावना अधिक होती है | दमा मुख्यतः तीन कारणों से होता है | सांस नलिका में सिकुड़न, उनके भीतरी भाग में सूजन होने और स्वास नलिका में बलगम जमा होने से | कई बार जब कीटाणु फेफड़ों में चले जाते हैं, तो वे भी दमा को तीव्र कर सकते हैं |

दमा के लक्षण Dama Ke Lakshan

बुखार नहीं हों, पर खासी बहुत दिनों तक बनी रहे, सामान्य होने पर दौड़ते समय खांसी आना, सांस लेते समय सीटी सी आवाज आना, नाक जाम हो जाना या बहना, साइनस में सूजन, दम घुटना आदि इसके प्रमुख कारण हैं | ऐसी स्थिति में तुरंत डॉक्टर को दिखाना चाहिए, इसके अलावा कई अन्य कारणों से एलर्जी होते ही अस्थमा का अटैक पड़ जाता है | ऐसे में खांसी आती है और आंखों से पानी आने लगता है |

अस्थमा दमा का उपचार Dama (Asthma) Ka Upchar

दमा की तीव्रता, अवस्था एवं जटिलता को पहचान कर ही अस्थमा का सफल उपचार व शीघ्र निदान किया जाता है | रोगी को अस्थमा का अटैक किन कारणों से पड़ा है, यह जानकर ही उसका उपचार किया जाता है | लंबे समय तक कफ और खांसी रहने पर एक्सरे कराया जाता है | यदि अस्थमा का अटैक गम्भीर है तो मरीज को नेपोलाईजर थेरेपी दी जाती है | इसमें कुछ दवाओं का मिश्रण होता है, जिसे स्पेशल मास्क लगाकर दिया जाता है | रोग की गंभीरता को देखकर एंटीबायोटिक व कम समय के लिए स्टेरॉयड का कोर्स भी दिया जाता है | मरीज को इनहेलर भी दिए जाते हैं | ये इनहेलर कई प्रकार के होते हैं, कुछ स्वास नली की सिकुडन को दूर करते हैं तो दूसरे उसकी सूजन को | बहुत से मरीज इनहेलर लेना नहीं चाहते, जो सही नहीं है | इन्हेलर टैबलेट की अपेक्षा 20 गुना ज्यादा प्रभावकारी होते हैं | अतः यदि चिकित्सक इन्हें इन्हेलर लेने की सलाह दें, तो बिना किसी परेशानी से उसका इस्तेमाल करें |

यदि मरीज को किसी एलर्जी की वजह से अस्थमा है तो एलर्जी पता करने के लिए टेस्ट जरूर कराएं | एलर्जी टेस्ट में 25 से 30 या अधिक इंजेक्शन भी लगाए जाते हैं और दो दिनों बाद उसका प्रभाव जांचा जाता है |

अस्थमा होने पर अपना सही तरीके से इलाज कराना चाहिए | दवा और सही उपचार द्वारा लोग ठीक हो जाते है | मौसम परिवर्तन और वायरल बुखार होने पर यह रोग बढ़ सकता है, अतः ऐसे समय अपना पूरा ध्यान रखना चाहिए | अस्थमा कोई छूत की बीमारी नहीं है, अतः इससे डरने की कोई आवश्यकता नहीं है | सफल उपचार ही इस रोग का सही निदान है | घर में किसी को भी अस्थमा होने पर ध्यान रखें कि –

  • जानवर न पाले,
  • हरियाली नष्ट ना करें
  • पॉलिथीन प्रयोग में ना लाएं
  • पेट्रोल का प्रयोग ना करें
  • जनरेटर का इस्तेमाल ना करें
  • धुल और धुएं वाली जगहों पर ना जाएं
  • घर में कीड़े मकोड़े और जाले ना लगने दें
  • रासायनिक पदार्थों और रंगों के संपर्क में ना आएं
  • ठंडे पेय, आइसक्रीम आदि का सेवन ना करें
  • मौसम के अनुरूप कपड़े पहने
  • तेज ठण्ड और गर्मी से बचाव करें 

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2 Comments

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