दमा रोग के लक्षण और बचाव के तरीके

Asthma Symptoms And Treatment In Hindi

सर्दियों के मौसम में दमा रोगियों की दिक्कते बढ़ सकती हैं, लेकिन कुछ सजगताएं बरतकर इस रोग को नियत्रित किया जा सकता है…

सर्दी का मौसम दमा (अस्थमा) के रोगियों की दिक्कतें बढ़ा सकता है। दमा फेफड़े की बीमारी है, जो हर आयु वर्ग के लोगों को अपनी गिरफ्त में लेती है। बच्चों को भी यह रोग परेशान करता है। दमा को नियंत्रित कर सामान्य जीवन जिया जा सकता है। इस रोग में सांस नली में सूजन आ जाती है और वे सिकुड़ जाती है |

दमा रोग के लक्षण

  • सांस लेने में तकलीफ
  • सीने में तकलीफ
  • सांस फूलना
  • खांसी आना
  • सीने में घरघराहट महसूस करना

दमा रोग की डायग्नोसिस

स्पाइरोमेट्री नामक जांच से इस रोग का पता लगाया जाता है।

दमा रोग का कारण

जिन कारणों से दमा का दौरा पड़ता है या फिर दमा की समस्या बढ़ती है, उन्हें एलर्जन कहा जाता है। धूल, धुआ, परागकण और कोई भी खाद्य पदार्थ दमा की समस्या को बढ़ा सकता है। मौसम बदलने या फिर श्वसन तंत्र में संक्रमण के कारण भी दमा की समस्या बढ़ सकती है। इसके अलावा धूम्रपान करने से भी दमा की समस्या बिगड़ सकती है।

पटाखों के धुएं से बचेः दीवाली के दौरान पटाखों का धुआं प्रदूषण का कारण बनता है और दमे के रोगियों में दमे के जोखिम को बढ़ा देता है। जब पटाखे जलाए जाते हैं, तो इनमें से सल्फर डाईऑक्साइड, कार्बन डाईऑक्साइड, मैंगनीज और कैडमियम जैसे प्रदूषक तत्व भी निकलते हैं। इन प्रदूषकों से सांस नली पर बुरा असर पड़ता है।

इलाजः डॉक्टरों के परामर्श से इनहेलर का प्रयोग करें।

दमा रोग से बचाव

  1. इनहेलर अपने पास रखें। डॉक्टर द्वारा बतायी गई दवाओं की डोज की समय पर लें।
  2. सर्दियों के मौसम में दमे के लक्षणों से बचाव के लिए समुचित ऊनी कपड़े पहनें।
  3. धूल और धुएं से बचाव के लिए अपने मुंह और नाक को स्कार्फ से ढक सकते हैं |

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