बच्‍चो में कैसे दूर करें खून की कमी (एनीमिया) Bachcho Ko Anaemia Se Bachane Ke Upay

bachcho ko anaemia se bachane ke upay

हर मां की यह इच्छा होती है कि उसका बच्चा पूर्णतः स्वस्थ रहे | इसके लिए वह हर संभव प्रयास भी करती है | लेकिन एनीमिया बच्चों में होने वाली ऐसी स्वास्थ्य समस्या है, जिसकी ओर आम तौर पर अभिभावकों का ध्यान नहीं जाता | भारत में स्वास्थ्य के प्रति जागरूक न होने और खान-पान की गलत आदतों की वजह से लगभग 65 से 70 प्रतिशत बच्चे एनीमिया यानी रक्ताल्पता के शिकार होते हैं |

जब शरीर में आयरन की कमी की वजह से लाल रक्त कोशिकाओं की कमी हो जाती है तो उसे एनीमिया कहा जाता है | वैसे यह समस्या किसी भी उम्र में हो सकती है, लेकिन बच्चों की सेहत के लिए रक्ताल्पता या एनीमिया बहुत नुकसानदेह साबित होती है | अगर लंबे समय तक एनीमिया का इलाज नहीं किया गया तो इसकी वजह से आगे चलकर बच्चे को एस्थमा, डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर या ब्लड कैंसर जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं |

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क्यों होती है एनीमिया की समस्या Bachcho Ko Anaemia Hone Ke Karan

एनीमिया के लिए मुख्यतः खान-पान की गलत आदतें और आधुनिक जीवन शैली जिम्मेदार है | आजकल बच्चे घर में बना पौष्टिक भोजन खाने से कतराते हैं और अभिभावक भी कुछ ऐसा ही खान-पान अपनाते हैं, इसलिए आजकल बच्चे हरी सब्जियां, दालें, दूध और फल नहीं खाना चाहते | इसद वजह से उनके शरीर में आयरन और जरुरी विटामिंस की कमी हो जाती है और उन्हें एनीमिया हो जाता है |

बब्चों में एनीमिया के लक्षण Bachcho Ko Anaemia Hone Ke Laskhan

1. वजन और कद के विकास की प्रक्रिया की गति धीमी पड़ना |

2. रोग प्रतिरोधक क्षमता का कम होना, भूख न लगना और बार-बार बुखार, सर्दी-खांसी, न्यूमोनिया जैसी समस्याएं होना |

3. त्वचा में फंगल इन्फेक्शन का होना |

4. बाल झड़ना और आंखों के नीचे डार्क सर्कल्स बनना |

5. हथेलियों, पैरों के तलवे और नाखूनों की रंगत का सफ़ेद पड़ना |

6. पेट में दर्द और लूज मोशन जैसी समस्याएं |

7. एनीमिया की वजह से बच्चों के आई क्यू लेवल में भी 2 से 3 प्रतिशत की कमी आ जाती है |

8. एनीमिक बच्चों की आंखों की दृष्टि भी कमजोर हो जाती है और उन्हें बचपन में ही चश्मा लग जाता है |

9. एनीमिया से प्रभावित बच्चे अक्सर सुस्त रहते हैं और उनके चेहरे पर बाल-सुलभ रौनक नहीं दिखाई देती |

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बच्चों को एनीमिया से कैसे बचाएं Bachcho Ko Anaemia Se Bachane Ke Upay

1. अगर आपके बच्चे में ऊपर बताए गए लक्षणों में से कोई भी लक्षण दिखाई दे तो आपको अपने बच्चे का कंप्लीट ब्लड काउंट टेस्ट और आयरन प्रोफाइल जरुर करवाना चाहिए | अगर जांच की रिपोर्ट में बच्चे का हीमोग्लोबिन का लेवल 12 ग्राम से कम हो तो आप किसी कुशल शिशु रोग विशेषज्ञ को उसे दिखाएं और उसे आयरन और मल्टी विटामिन गोलियां खाने को दें | आजकल आर्गेनिक आयरन सप्लीमेंट भी आते हैं, जो बच्चों की सेहत के लिए ज्यादा फायदेमंद साबित होते हैं |

2. बच्चों में शुरू से ही हरी पत्तेदार सब्जियां, सैलेड, आयरनयुक्त फल जैसे- केला, सेब, अनार, ड्राई फ्रूट्स, खजूर और गुड़ खाने की आदत विकसित करें ताकि उनके शरीर को पर्याप्त मात्रा में आयरन मिल सके | पांच वर्ष की उम्र के बच्चे को पूरे दिन में तीन कटोरी हरी सब्जियों और सैलेड का सेवन करना चाहिए |

3. एनीमिया को दूर करने के लिए आयरन के साथ कैल्शियम, प्रोटीन, विटामिन और मिनरल्स का भी सेवन करना चाहिए | इसके लिए वे नियमित रूप से दाल और दूध का सेवन पर्याप्त मात्रा में करें | पांच वर्ष के बाद बच्चे को अपने रोजाना के भोजन में प्रतिदिन 1.5 से 2 ग्राम प्रति किलो कैलरी प्रोटीन का सेवन करना चाहिए | उदाहरण के लिए अगर किसी बच्चे का वजन 20 किलोग्राम है तो उसे चाहिए कि वह प्रतिदिन 40 ग्राम प्रोटीन का सेवन करें, जो कि सामान्यतः दो कटोरी दाल से मिल जाता है |

अगर बच्चे के खान-पान संबंधी आदतों में सुधार लाया जाए तो उनकी रक्ताल्पता की समस्या आसानी से दूर हो सकती है |

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