स्वस्थ रहने के 61 नियम How To Become Healthy In Our Daily Life

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स्वस्थ रहने के नियम के बारे में जानकारी आज देंगे. यदि आप चाहते हैं कि आप स्वस्थ रहें और किसी प्रकार की कोई परेशानी न हो तो आपको कुछ करना होगा.

आप यदि कुछ नियमों का पालन करते हैं तो आप ज्यादा समय तक स्वस्थ जीवन जी सकते हैं.

ऐसे ही कुछ नियमों के बारे मने नीचे जानकारी दे गयी है –

1. सुबह या दोपहर का भोजन करने के बाद तुरंत तेज चलना या दौड़ना पेट के लिए बहुत हानिकारक है | 30 मिनट आराम करने के बाद ही कहीं जाएं |

2. शाम को खाना खाने के बाद धीरे-धीरे खुले वातावरण में 1 किलोमीटर तक टहलें | खाना खाकर उसी समय बिस्तर पर लेटने से कब्ज हो सकता है |

3. अधिक तेज या धीमा रोशनी में पढ़ना, चलती गाड़ी में पढ़ना, सिनेमा या TV अधिक देखना, गर्म चीजों का अधिक सेवन करना, मिर्च मसालों का अधिक इस्तेमाल करना, आग के पास देर तक बैठना, सूर्य की तरफ देखना आदि बातें आंखों के लिए हानिकारक है |

4. पीलिया, सुजाक, कुष्ठ, रक्तपित्त, घाव, सूखी खांसी, अनिंद्रा आदि रोगों में रोगी को अदरक का सेवन न कराएं | अदरक का सेवन करने से रोगी की परेशानी बढ़ सकती है |

5. बच्चों के पेट में कीड़े हो तो उन्हें चीनी, गुड़, मिठाई, टॉफी, दूध न दें | गाय या बकरी का पतला दूध देने से लाभ होता है |

6. किसी आदमी या किसी बच्चे ने जहरीला पदार्थ खा लिया हो तो उसे 200 ग्राम पानी में आधा चम्मच नमक घोल कर तुरंत पिला देना चाहिए और उसको मुंह में उंगली डालकर उल्टी करने के लिए प्रेरित करना चाहिए | उल्टी हो जाने के बाद मुसम्मी का जूस घूंट घूंट करके पिलाने से उसे आराम मिलना शुरू हो जाता है |

7. भोजन करते समय पानी न पिएं और यदि पीना ही पड़ जाए तो बर्फ या फ्रिज का ठंडा पानी भोजन करते हुए न पिएं | इससे दांत और आंत पर बुरा प्रभाव पड़ता है |

8. नींद से जागने के तुरंत बाद भोजन न करें, पानी भी न पिएं, क्योंकि ऐसे में पाचन रस एक्टिव नहीं होते | क्रोध, चिंता, तनाव की स्थिति में भी भोजन न करें |

9. बहुत गर्म या बर्फ जैसी ठंडी वस्तु गले से नीचे न उतारें | बहुत ठंडी चीज खाने ही हो तो बहुत धीरे धीरे खाएं | बहुत गर्म के बाद बहुत ठंडा और बहुत ठंडा के बाद बहुत गर्म पदार्थ भूल से भी न खाएं | इससे पाचन क्रिया बिगड़ती आती है |

10. खाना खाने के बाद उसी समय पेशाब अवश्य करें |

11. तेज धूप में चलने, व्यायाम या शारीरिक श्रम के बाद या शौच जाने के बाद उसी समय पानी न पिएं |

12. दही को गर्म करके न खाएं | इससे आंतों को हानि पहुंचती है |

13 . दूध तथा कटहल परस्पर विरोधी हैं | इन दोनों चीजों को एक साथ न खाएं |

14. मछली खाने के बाद दूध न पिएं | ये परस्पर विरोधी खाद्य पदार्थ हैं और सफेद दाग होने की आशंका रहती है |

15. शहद को गरम करके प्रयोग में न लाएं |

16. सिर पर कपड़ा बांधकर या पैरों में जूते मोजे पहनकर कभी न सोएं | इससे रक्त संचार में बाधा पड़ती है |

17. सन्निपात के रोगी को जलन होती हो तो उसके आग्रह करने पर भी ठंडी पानी उसे न दें | उसे हमेशा कुनकुना पानी ही पीने को दें |

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18. रात में सोने से पित्त शांत होता है | मालिश करने से वायु कम होती है, वमन करने से कफ कम होता है और उपवास करने से बुखार शांत होता है |

19. बेहोशी, गर्मी, पित्त बढ़ने, रक्त दोष, विष दोष, उल्टी, रक्तपित्त आदि रोगों में रोगी को ताजा पानी पिलाएं |

20. आग से जल जाने पर जले भाग पर ताजा पानी की धार छोड़ दें | इससे जलन तुरंत शांत हो जाती है |

21. सिर दर्द होने पर पूरे सिर की मालिश न करके सिर के बीचो-बीच देसी घी से धीरे-धीरे मलें |

22. गुर्दे के रोगी घी, तेल या उनसे बने भोज्य पदार्थों का सेवन बिल्कुल न करें |

23. न्यूमोनिया के रोगी ठंडी और बर्फीली हवा से अपना बचाव करें | बंद कमरे में लेट कर पूरी तरह से विश्राम करें |

24. दिमाग में रक्त बढ़ने के कारण नाक से खून बहने लगे तो उसे तुरंत रोकने का प्रयास न करें, क्योंकि इस कोशिश के कारण लकवा होने की आशंका रहती है | यह रक्त आंख तथा कान से भी बाहर आ सकता है |

25. एक चम्मच खुरासानी अजवायन 150 ग्राम गरम पानी में घोलकर पीने से व्यक्ति को रात में अच्छी नींद आती है | यह औषधि सोने से 10 मिनट पहले लेनी चाहिए |

26. मन्दाग्नि तथा अजीर्ण नाशक औषधि या हमेशा खाना खाने के बाद ही लें |

27. कान दर्द हो, कान बह रहा हो या कान में जख्म हो गया हो तो ऐसे में ठंडी हवाओं तथा ठंडे पानी से व्यक्ति को अपना बचाव करना चाहिए |

28. कफ बढ़ जाने पर देसी घी में नमक मिलाकर छाती पर मले ताकि जमा कफ बाहर निकल जाए | नमक और कुनकुना पानी एक दो गिलास पीकर उल्टी करने से भी छाती पर जमा कब बाहर निकल जाता है |

29. रात को दस्त की कोई भी औषधि नहीं खानी चाहिए | मल रुकने, कब्ज होने या मल बंधने पर रोगी को सुबह तड़के दस्त करना सही रहता है |

30. लकवे की शिकायत होने पर डॉक्टर से पूछकर गरम औषधि या तेल की मालिश बार बार करनी चाहिए |

31. पांव या हाथ में चोट या मोच आने से सूजन हो तो रात में लेप न लगाकर दिन में लगाएं और लेप के सूखने पर नया लेप बार बार लगाते रहें |

32. हिस्टीरिया के रोगी के मुंह पर पानी के छींटे देकर नसवार दें, जिससे छींक आते ही श्लेष्मा ( कफ ) की रुकावट दूर होकर रोगी होश में आ जाए |

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33. लेप में कच्चे हींग का उपयोग होता है लेकिन खाने पीने के काम में हींग को हमेशा देसी घी में भूनकर इस्तेमाल करें |

34. भोजन के दौरान पानी पीना, भोजन के तुरंत बाद पानी पीना, खट्टे या अम्लीय पदार्थ का सेवन करना, कॉफी, चाय, शराब, भांग, पान मसाला, गुटका, चरस तथा आदि अधिक गर्म चीजें अम्ल पित्त रोग में वर्जित है |

35. मानसिक चोट, भय, चिंता, शोक, क्रोध, तनाव आदि के कारण नींद न आती हो तो जरा सा जायफल पानी में घिसकर चाटने से नींद आ जाती है |

36. खट्टी चीजें, मट्ठा, फलों का रस, तेल की चीजें आदि रात के भोजन में शामिल न करें | दही का सेवन भी रात को न करें |

37. मांस, दूध, दही तथा इनसे बना भोजन सफेद दाग तथा कुष्ठ के रोगियों को नहीं करना चाहिए |

38. अगर किसी औषधि को किसी पतले पदार्थ में मिलाना हो तो चाय, कॉफी या दूध में न मिलाकर मठ्ठा, निबू रस, नारियल पानी या सादे पानी में मिलाकर लेना सही रहता है |

39. घी तेल के व्यंजन खाने के बाद तुरंत पानी न पीकर 2 घंटे के बाद पीना चाहिए | चाय या कॉफी पीने के तुरंत बाद कोल्ड ड्रिंक या कोई भी ठंडा पेय नहीं पीना चाहिए |

40. भोजन ताजा ही खाएं | यदि बनाकर रखना ही पड़ जाए तो उसे स्वच्छ स्थान पर ढककर रखें और जब खाना हो तो उसे हल्का गर्म करके ही खाएं |

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41. भोजन देखने तथा सूंघने में प्रिय और खाने में स्वादिष्ट होना चाहिए | ऐसा भोजन जल्दी हजम होता है |

42. जब पूरी भूख हो अर्थात अच्छी तरह से भूख लगने पर ही भोजन करें |

43. भोजन करने के तुरंत बाद अथवा पहले अधिक शारीरिक और मानसिक श्रम न करें |

44. भोजन करने के बाद थोड़ी देर आराम कर लें या बाईं करवट लेट जाएं | इससे पाचन क्रिया आसानी से शुरू हो जाती है |

45. उतना ही भोजन करें, जितने से भूख शांत हो जाए | दोपहर का भोजन हल्का और रात का भोजन भारी ले सकते हैं क्योंकि दिन भर काम करने से शरीर की शक्ति काम में लगी रहती है और भोजन पच नहीं पाता |

46. रात में भोजन करने के कुछ समय बाद ही सोना अच्छा रहता है | इससे पूरी शक्ति भोजन को पचाने में लग जाती है |

47. 40-45 वर्ष की आयु के बाद जितने कम भोजन से आपका काम चलता है, उतना ही लेना चाहिए |

48. हफ्ते में एक समय या 1 दिन का उपवास या फलाहार लेना रोगों से बचने का सर्वोत्तम सरल उपाय है |

49. खाने को करीने से सजाकर खाने की मेज पर रखना, खाना खाने का स्थान साफ सुथरा होना, हाथ मुंह धोकर ढीले ढीले परिधान में तनाव मुक्त होकर भोजन करना- ये सब आमाशयिक रस को उत्पन्न करते हैं और भोजन को पचाने में पूरी मदद भी करते हैं |

50. खाना खाते समय पूरा ध्यान भोजन की तरफ रखें और स्वाद ले लेकर खाएं | भोजन करते समय अखबार पढ़ना, पुस्तक पढ़ना, टीवी देखना या अंय कोई काम करना भोजन पचाने में बाधा उत्पन्न करता है |

51. पहले कौर को पूरी तरह से चबाकर घोट लेने के बाद दूसरा कौर मुंह में डालें | जल्दी जल्दी और बिना ठीक से चबाए भोजन का अधिक भाग बिना पचे ही मल के रास्ते से बाहर निकल जाता है|

52. खाना शांति पूर्वक और ऐसे समय में करें जब कोई काम न हो या कहीं जाना न हो या कोई हड़बड़ी या जल्दबाजी न हो ताकि आप पर्याप्त समय भोजन करने में लगा सकें |

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53. दो भोजनों के बीच पर्याप्त समय दें | ताकि अच्छी भूख लग सके | यदि समय पर भूख न लगे तो उस समय का भोजन छोड़ दें या सलाद व सब्जी खाकर उठ जाएं |

54. शराब आदि या अनार चटनी की मदद से जबरदस्ती भोजन न करें | अधिक मिर्च, मसाले, चाय, कॉफी आदि पेय पदार्थों का सेवन भी भूख लगने नहीं देता और पाचन क्रिया को गड़बड़ा देता है |

55. कमजोर पाचन क्रिया वाले एक समय में एक या दो प्रकार का ही पदार्थ खाएं और भूख से कम खाएं | दूसरा पदार्थ 2 घंटे के बाद खा सकते हैं | इससे पाचन प्रणाली पर अनावश्यक दबाव नहीं पड़ता |

56. दक्षिण की तरफ पैर करके सोने से हृदय तथा मस्तिष्क के रोग उत्पन्न होते हैं | अतः दक्षिण की तरफ पैर करके न सोएं |

57. प्रतिदिन भोजन के 30 मिनट बाद 1-2 लहसुन की कच्ची कली छीलकर चबाया करें | ऐसा करने से पेट में कैंसर नहीं होता |

58. तुलसी की चार पत्तियां रोजाना खाने से या पीसकर गोली बनाकर पानी के एक घूंट के साथ निगलने से पेट के रोग नहीं होते | ह्रदय रोग, रक्त विकार और कैंसर से बचाव होता है |

59. भोजन करते समय और मल त्यागते समय दाई नाक से तथा पानी पीते और पेशाब करते समय बाई नाक से श्वास लेने से अजीर्ण और पेट के रोग कभी नहीं होते |

60. एक सप्ताह में एक बार करेले का साग खाने से सब तरह के बुखार, पित्त विकार, बच्चों को हरे पीले दस्त, बवासीर और पेट के कीड़ों और मूत्र रोगों से बचाव होता है |

61. भोजन करने के बाद मूत्र त्याग करने का नियम बनाकर पालन करने से गुर्दा, कमर और जिगर के रोग, गठिया, पौरुष ग्रंथि की वृध्दि आदि अनेक रोग से बचाव होता है |

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