गर्भधारण से पूर्व सावधानियां और सुझाव Before Pregnancy Tips And Care in Hindi

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गर्भधारण से पूर्व सावधानियां और सुझाव Before Pregnancy Tips And Care in Hindi – हर माता-पिता व घर परिवार के लोगों की यही कामना होती है कि गर्भस्थ शिशु जब जन्म ले, तब वह पूर्ण रुप से स्वस्थ हो | जन्म के तुरंत बाद ही उसके लिए डॉक्टर की सहायता लेने की आवश्यकता ना पड़े |

आज से 40 से 50 वर्ष पहले, घरों में दाइयों के हाथों से ही बच्चे का जन्म होता था | किसी डॉक्टरी सहायता या किसी भी प्रकार की दवा की जरूरत नहीं पड़ती थी | लेकिन वर्तमान में बिना कष्ट के स्वस्थ बच्चे को जन्म बहुत ही कम महिलाएं दे पाती हैं | आज हालात यह हैं कि गर्भ धारण से लेकर बच्चे के जन्म तक मां को दवाइयों तथा डॉक्टरों की देखरेख में ही रहना पड़ता है | गर्भपात हो जाने के कारण कई बच्चे गर्भ में ही दम तोड़ देते हैं या बहुत कमजोर और बीमार पैदा होते हैं |किसी भी तरह की परेशानी के बिना स्वस्थ बच्चे का जन्म आज भी संभव है | लेकिन इसके लिए आपको अपना स्वास्थ्य ठीक रखना होगा, शरीर को पुष्ट बनाना होगा, विटामिन तथा खनिज लवण युक्त संतुलित आहार लेना होगा और रक्त को शुद्ध और रोग प्रतिरोधक शक्ति वाला बनाना होगा | किसी महिला का पहले गर्भपात हो गया हो तो उसे दूसरा गर्भधारण करने से पहले न केवल काफी सावधानी बरतने की आवश्यकता होती है, बल्कि इसके लिए अपनी जीवनशैली को भी बदलने की आवश्यकता होती है |

योगासन, एक ऐसा माध्यम है, जिसके द्वारा शरीर को हमेशा फिट रखा जा सकता है | योगाभ्यास से मन व तन दोनों ही स्वस्थ रहते हैं, यौवन अधिक समय तक सुरक्षित रहता है | गर्भधारण की प्लानिंग करने से 4 माह पूर्व ही अपना जीवन योगमय बनाने से बच्चा निसंदेह पूर्ण स्वस्थ पैदा होता है | इसके लिए यहां दी गई कुछ बातों का अमल में लाना जरूरी होगा |

आइए जानते हैं ऐसी ही कुछ बातों के बारे में जो आपको ऐसी स्थिति में काम आएंगी :

कब्ज न होने दें Garbhavastha Me kabj ka ilaj

➔ कब्ज का सीधा संबंध आपकी दिनचर्या और भोजन से होता है | कब्ज ना हो या कब्ज हो तो उसका निवारण हो जाए |इसके लिए सबसे पहले अपनी दिनचर्या पर ध्यान दें, सुबह जल्दी उठे और रात को जल्दी सोए |

➔ जितनी भूख हो, उतना ही खाना खाएं और सुबह-शाम सैर पर अवश्य ही जाएं | दिन में आराम करें, पर सोए नहीं | क्योंकि जो व्यक्ति दिन में सोते हैं, उन्हें ही रात में नींद नहीं आती है और जब रात में पर्याप्त नींद नहीं आती है, तब सुबह पेट साफ नहीं हो पाता है | कब्ज रहने लगता है | इसलिए कब्ज से अपना बचाव करना है तो रात में गहरी नींद लेना जरूरी है |

➔ पर्याप्त मात्रा में पानी पिए | दिन भर में कम से कम 10 से 12 गिलास पानी अवश्य पिएं और सुबह बिस्तर से उठते ही कम से कम दो से तीन गिलास ताजा पानी पिए और उसके बाद 2 से 3 मिनट तक खुले आसमान में टहलें, फिर सौच के लिए टॉयलेट में जाएं इससे पेट अच्छी तरह से साफ हो जाता है |

➔ हरी सब्जियों का अत्यधिक सेवन करें | चोकरयुक्त आटे की रोटी खाएं | कब्ज को तोड़ने के लिए, सुबह पपीता खाएं या एक गिलास संतरे का रस ले | निश्चित समय पर पर्याप्त भोजन लें और रात को सोते समय एक गिलास दूध पिए |

➔ जो व्यक्ति समय से पर्याप्त भोजन नहीं करते हैं, सलाद का सेवन नहीं करते हैं, सब्जी कम मात्रा में खाते हैं, शारीरिक श्रम नहीं करते हैं, तली-भुनी चीजों का अधिक सेवन करते हैं और अत्यधिक तनाव में रहते हैं, उन्हें ही कब्ज की ज्यादा शिकायत आमतौर पर रहती है और पेट साफ नहीं रहता | भोजन में सलाद जैसे खीरा, ककड़ी, गाजर, मूली, प्याज आदि हरी सब्जी, दाल, चावल, चपाती शामिल करें और भोजन के प्रत्येक कौर को खूब चबा-चबा कर खाएं | जिससे पेट साफ रहे और भूख खुलकर लगे | इस प्रकार स्वास्थ्य में स्वतः ही सुधार आना शुरू हो जाएगा |

➔ इन बातों के अलावा कुछ हल्की-फुल्की योगा एक्सरसाइज भी करते रहना चाहिए जैसे रोज जल-नेति करके नाक को साफ रखें और भस्त्रिका का अभ्यास करें | कटिचक्रासन, पश्चिमोत्तानासन, योग मुद्रासन, सुप्त वज्रासन, शलभासन, धनुरासन, पाद हस्तासन, पवन मुक्तासन, हलासन, सर्वांगासन, मत्स्यासन, कपालभाती प्राणायाम, शीतली प्राणायाम, नाड़ीशोधन, प्राणायाम, अग्निसार प्राणायाम आदि करें |

अन्य उपाय Garbhavastha me savdhani

☑ योग क्रियाओं के साथ-साथ पेट पर गर्म ठंडा (3 मिनट गर्म और 2 मिनट ठंडा) सेक लें | इसके बाद 1 घंटे ठंडी पट्टी और ऊपर गरम पट्टी लपेटे |

☑ शरीर को रगड़-रगड़ कर स्नान करें | सुबह-शाम सैर पर निकल जाएं | मौसम ठंडा हो तो हफ्ते में दो या तीन बार गर्म पैर का स्नान, रात में सोने से पहले या सुबह स्नान से पहले अवश्य ही करें |

☑ ध्यान रहे कि गर्भधारण के 3 माह तक महिलाएं योगासन कर सकती हैं, जिनमें वज्रासन, पश्चिमोत्तानासन, अर्धमत्स्येंद्रासन, सुप्त पवनमुक्तासन, मकर आसन, विपरीत करणी, हस्तपादासन, हलासन का अभ्यास नियमित रूप से कर सकती हैं | विपरीतकर्णी में टांगे सीधी न करके 70 डिग्री तक सिर की ओर मोड़ ले | हाथ नितंबों पर रखें विपरीत करणी का अभ्यास करने से गर्भपात का खतरा कम हो जाता है |

गर्भावस्था की अन्य जरूरी जानकारी – 

भोजन का रखें खयाल Garbhavastha me kya khana chahiye

➔ चार पांच माह तक योग आसनों के अभ्यास से शरीर हष्ट पुष्ट हो जाए और गर्भधारण करने की स्थिति में आ जाए, तब पाचन क्रिया को दुरुस्त करने के लिए एक हफ्ते तक नींबू शहद, गर्म पानी, कच्ची सब्जियां, गाजर, खीरा, लौकी, पालक, सफेद पेठा जो भी मौसम के अनुसार उपलब्ध हो, और फल का रस, फल मौसम के अनुसार ले, किसमिस, मुनक्का भिगोकर तथा सब्जी का सूप लें.

➔ इसके बाद 3 हफ्ते तक, एक समय भोजन में शाम को फल, दूध, बाकी सब्जी फलों के रस और सब्जी का सूप ले.

➔ अब 3 हफ्ते के बाद अपने भोजन की व्यवस्था इस तरह से करें, सुबह शौच आदि के बाद नींबू, शहद, पानी या फल अथवा सब्जी का सूप लें.

➔ सुबह 9:00 बजे 5-6 बदाम गिरी, 20-25 किसमिस, 6-7 मुनक्के और इसके साथ ही दूध, एक फल, सेब, पपीता, नाशपाती आदि लें.

➔ दोपहर 12:00 बजे, फल का रस या कच्ची सब्जी का रस लें. 1:30 बजे भोजन में चोकर, साग वाली चपाती, सलाद, सब्जी, दही आदि लें. सलाद अधिक मात्रा में लेने की कोशिश करें.

➔ सायं 5:00 बजे कोई भी फल खाएं या फल का रस पिए या नींबू, शहद गर्म पानी ले. 7:30 बजे सब्जी का सूप ले.

➔ रात 8:00 बजे दाल, सब्जी, सलाद और एक-दो चपाती भूख के हिसाब से या फल और सब्जी का सूप तथा रात में सोते समय दूध लें. फल खाने के आधा घंटे बाद सब्जी का सूप लें.  इस मध्य कुछ खाने पीने की जरूरत हो तो सब्जी और फलों के रस लें. चाय, काफी ना पिए या दिन में केवल एक बार पिए.

➔ गर्भधारण के बाद गर्मी के भोजन में कैल्शियम, फास्फोरस, आयरन, आयोडीन, विटामिन ए, डी और ई का होना बहुत आवश्यक है. गर्भावस्था में ज्यादा भोजन ना करें, परंतु जो भी भोजन करें, वह विटामिन और मिनरल्स से भरपूर हो और पोस्टिक हो.

➔ गर्भावस्था के शुरुआती 4 से 5 महीनों में गर्भपात से बचने के लिए, गर्मियों में पेट में ठंडी पट्टी लपेट ले. गर्भधारण के बाद अगर गर्मियों के लिए परिश्रम का काम संभव ना हो, तो हाथ पैर की रोजाना मालिश करने से बहुत लाभ होता है.

➔ स्वस्थ बच्चे के जन्म के लिए यह भी जरूरी है कि मां बनने वाली महिला हमेशा खुश रहे. अधिक परिश्रम से बचें, बोझ उठाना, अधिक समय तक खड़े रहना, तेज-तेज चलते हुए सीढ़ियां चढ़ना या उतरना, कूदना, नाचना, साइकिल चलाना, तैरना जैसी क्रियाएं गर्भवती महिलाएं ना करें. वह घरेलू हल्के-फुल्के काम करती रहें, याद रखें की मां स्वस्थ रहेगी, तो बच्चा भी अवश्य ही स्वस्थ पैदा होगा.

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