सेहत के लिए सुबह की सैर के फायदे Benefits Of Morning Walk In Hindi

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सेहत के लिए सुबह की सैर के फायदे Benefits Of Morning Walk In Hindi – Subah Ki Sair Ke Fayde

हर चिकित्सा पद्धति यह मानती है कि सैर करना सेहत के लिए बहुत अच्छा है | इससे शरीर चुस्त रहता है, दिल, फेफड़े और मांस पेशियों की कसरत होती है और दिमाग तरोताजा रहता है | कुछ अनुसंधानकर्ताओं ने तो यह परीक्षण भी कर डाला है, कि सैर से हमारे भीतर की दुनिया की जैव रासायनिक संरचना पर क्या असर पड़ता है | इसमें यह पाया गया है, कि नियमित सैर करने से रक्त में दिल को सुरक्षा देने वाले अच्छे कोलेस्ट्रॉल यानि H. D. L. (High Density Lipoprotein) की मात्रा बढ़ती है और नुकसान पहुंचाने वाले जोखिम भरे कोलेस्ट्रॉल जैसे LDL (Low Density Lipoprotein) की मात्रा कम हो जाती है |

कुछ परीक्षणों में तो यहां तक देखा गया है कि कई लोगों के लिए सैर करना एक समय के बाद आदत बन जाती है | घड़ी की सुइयों के फेर में या किसी दूसरे कारण से अगर कोई आदत के मुताबिक सैर के लिए नहीं जा पाता तो उसे उस रोज अधूरापन सा महसूस होता है | इसका संबंध भी शरीर की जैव रासायनिक से जोड़ा गया है | वैज्ञानिकों ने साबित करने की कोशिश की है, कि सैर करने से शरीर में कुछ ऐसे प्राकृतिक जो रसायन पैदा होते हैं, जो हमारे दुख दर्द मिटाते हैं और उनकी रासायनिक संरचना मार्फीन जैसी होती है | सैर करने से शरीर की कुदरती बचाव प्रणाली यानी इम्यून सिस्टम भी अधिक सशक्त बनती है |

अक्सर समझा जाता है कि सैर के इन फायदों को हासिल करने के लिए यह जरूरी है कि शेर तेज गति से ही सैर (tez gati se subah ki sair) की जाए नहीं तो कोई फायदा नहीं | लिहाजा इस बारे में कुछ बातें साफ कर देना बेहतर होगा | आइये जानते हैं कि सही है और क्या मिथ है –

  • बड़े डग भरना किसी भी मायने में फायदेमंद नहीं है | सैर करते समय कदम उतने ही बड़े ले, जितने की आदत हो | कदमों की लंबाई आरामदेह होनी चाहिए, तनाव पैदा करने वाली नहीं होनी चाहिए |
  • किसी भी गति से सैर करना उपयोगी होता है | यह सोच गलत है कि तेज गति से सैर करना ही कारगर है | शरीर जिस रफ्तार को आसानी से सह सके, वही गति अपनाएं | हां, अगर आपका स्वास्थ ठीक-ठाक हो, तो धीरे-धीरे गति को बढ़ा लेना भी अच्छा है | यह बात बिल्कुल सही है, कि तेज रफ्तार से सैर करना भरपूर व्यायाम है |
    • अगर सेहत अनुमति दे, तो सैर करने की अपनी गति बढ़ाने के लिए एक सरल तरीका अपनाएं | सैर करते समय बाहों को कुहनियों पर 90° कोण पर मोड़ कर आगे-पीछे कुदरती तौर पर स्विंग करें | इससे प्रायः शरीर के चलने की गति स्वता बढ़ जाती है | इसका संबंध शरीर के Bio-mechanics या जैव प्रक्रिया से है | बाहों और टांगों के बीच सदा एक संतुलन बना रहता है | जब कोई चलता है, तो चलने की गति का इस सामंजस्य से भी संबंध रहता है | अगर हम बांहे सीधी रख कर चलें तो टांगों की गति धीमी हो जाती है | बाहे मोड़ कर चलें तो टांगो की रफ़्तार कुछ तेज हो जाती है |
    • चलते वक्त गति बढ़ाने के लिए, कमर के ऊपर के भाग को झुकने देना अच्छा नहीं होता है | इस झुकाव से कंधों, छाती और रीढ़ में तनाव पैदा होता है | जबकि सैर करने का एक मकसद निसंदेह शरीर को तनाव रहित करना है | लिहाजा अगर तेज गति से चलें तब भी इस बात का पूरा ध्यान रखें, कि कंधे और पीठ कतई ना झुके |
  • चलते हुए शारीरिक मुद्रा सही और क़दमों में ताकत हो | इसके लिए एक सुझाव यह है कि महसूस करें कि टांगे नाभि के 2 इंच ऊपर से आरंभ हुई हैं, ना कि कूल्हों से | यह कल्पना दरअसल शरीर की मांसपेशियों के हिसाब से गलत भी नहीं है | पर मन भी अगर इस सोच को अपना ले तो चलने की गति खुद-ब-खुद तेज हो जाएगी |
  • अगर आपको हृदय रोग, स्वास रोग या गठिया जैसा कोई रोग हो जिससे चलने में तकलीफ महसूस होती हो या अनावश्यक जोर पड़ने का अंदेशा हो तो सैर का कार्यक्रम अपनाने से पहले डॉक्टर से सलाह जरूर लें |

पर यह सोच सरासर गलत है, कि दिल का दौरा पड़ चुकने के बाद सैर करने लायक नहीं रहता है | दरअसल अच्छाई तो इसी में है कि दौरे के कुछ हफ्तों बाद ही अगर स्वास्थ्य अनुमति दे तो डॉक्टर से सलाह लेने के बाद सैर का एक पूरा कार्यक्रम बनाकर उसे अमल में लाना चाहिए | इससे दिल की सेहत बढ़ती है, बंद और रुकी कोरोनरी धमनियों के हिस्सों में नई रक्त धमनियां फूट आती हैं | जिनसे दिल को खुराक मिलने लगती है |

डायबिटीज से पीड़ित लोगों के लिए भी सैर बहुत फायदेमंद होती है (Diabetics ke liye monring walk ke kai fayde) | नियमित सैर करने से शुगर का लेवल नियंत्रण और संतुलन में रहता है और साथ ही यह संतुलन ज्यादा देर तक बना रहता है |

लेकिन यह ध्यान रखना भी जरूरी है, कि शरीर के साथ कभी भी ज्यादती न की जाए (Excess morning walk ke nuksan)| यदि आपके जोड़ सूजे हो, सांस फूलती हो या किसी भी कारण से कोई परेशानी हो तो यह सोचना सरासर गलत है कि मन में संकल्प हो तो कोई भी रोग दूर भाग जाएगा | कुछ लोग इसी गलत सोच के कारण अपने रोग को बढ़ा लेते हैं |

1. सैर को नियम बना लेने से ही सच्चा स्वास्थ्य लाभ और आनंद मिलता है | हफ्ते में कम से कम 5 दिन सैर के लिए जरूर निकाले | शहरी जीवन में कई तरह के कारण इस सैर में बाधक बनते हैं, पर यदि आपकी इच्छा शक्ति मजबूत है तो हर मुश्किल आसान हो जाती है और उसका कोई न कोई रास्ता निकल ही आता है |

2. सैर के लिए निकलते समय यह ध्यान अवश्य रखें कि शरीर पर उपयुक्त वस्त्र जरूर हो | ढीले वस्त्र जो मौसम के अनुकूल हो और पैरों में कैनवस के आरामदेह जूते भी कसे हो, तो बेहतर होगा | समय बचाने के चक्कर में इन छोटी मगर महत्वपूर्ण बातों पर ध्यान न देना, आपके लिए भविष्य में कष्टकारी सिद्ध हो सकता है |

3. आखरी बात यह है कि भरपेट भोजन करने पर सैर करना शारीरिक नियमों की दृष्टि से ठीक नहीं है अगर दिल की सेहत जरा भी कमजोर हो तब इस बात का ध्यान रखना खास तौर पर जरूरी हो जाता है

इसलिए आप यह जितना जल्दी हो सके समझ लें कि सुबह की सैर करना आपके शरीर के लिए बहुत ही जरूरी और स्वाथ्यवर्धक है (morning walk ke fayde in hindi)| इसे जीवनचर्या का अंग बना लेना तन और मन दोनों के लिए ही फल दायक है |

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