नागकेसर के फायदे हिंदी में Benefits Of Nagkesar In Hindi

nagkesar ke fayde hindi me

आइये आज जानते है नागकेसर के फायदे हिंदी में Benefits Of Nagkesar In Hindi – Khane Ke Fayde

नागकेसर का वृक्ष आमतौर पर आसाम, नेपाल, बर्मा, बंगाल के पहाड़ी क्षेत्रों में जंगली रूप से पाया जाता है। कहीं-कहीं बाग-बगीचों में भी लगाया जाता है। इसका सदाबहार वृक्ष मध्यम ऊंचाई का दिखने में सुंदर होता है। तना गोल, चिकना और रक्ताभ भूरे रंग की छाल युक्त होता है। पत्ते 3 से 6 इंच लंबे, एक से डेढ़ इंच चौड़े, आयताकार, भालाकार, ऊपर से हरे, चिकने और नीचे से सफेद होते हैं। नए पते लाल रंग के और पुराने स्पष्ट सघन शिराओं से युक्त होते हैं।पुष्पों की बहार बसंत ऋतु में आती है, तब 1 से 3 इंच घेरे वाले, सुगंधित, सफेद फूलों के मध्य केसरिया रंग के पुंकेसर लगते हैं।

सांप के फन के आकार के इन पुंकेसर के कारण ही इसका नाम नागकेसर पड़ा। फलों का आकार 1 इंच से बड़ा, अंडाकार, बाह्यकोष युक्त पाई जाता है। बीज एक इंच आकार के, चिकने, भूरे, 1 से 4 की मात्रा में प्रत्येक फल से निकलते हैं। बीजों की मज्जा मांसल और तेल युक्त पाई जाती है। पीला नागकेसर ही अधिकता से प्रयोग में लिया जाता है, जबकि लाल, काला और सिलोन ब्रह्मा का नागकेसर भी कहीं-कहीं पाया जाता है।

आप यहा पर ये जानेंगे

  1. बवासीर के लिए नागकेसर का सेवन Bavaseer Ke Liye Nagkesar Ka Sevan
  2. पैरों के तलवों की जलन के लिए लगाये नागकेसर का लेप Taluwo Ki Jalan Ke Liye Lagaye Nagkesar Ka Lep
  3. जोड़ों के दर्द में नागकेसर चूर्ण का सेवन  Jodo Ke Dard Me Nagkesar Churn Ka Sevan
  4. श्वेत प्रदर में नागकेसर से लाभ Swet Prader Me Nagkesar Se Labh
  5. नपुंसकता में नागकेसर Napusangta Me Nagkesar
  6. नाक, पेशाब में खून आना के लिए नागकेसर का सेवन Naak, Pesaab Me Blood Ke Liye Nagkesar Ka Sevan
  7. पसीने की अधिकता होने पर नागकेसर से ईलाज Pasine Ki Adhikta Hone Par Nagkesar Se Ilaaj
  8. अतिसार, प्रवाहिका में नागकेसर से लाभ Atisaar, Pravahika Me Nagkesar Se Labh
  9. गर्भपात में नागकेसर के सेवन से लाभ  Garbhpaat Me NaagKesar Ke Sevan Se Labh
  10. रक्तपित में नागकेसर चूर्ण का सेवन Raktpith Me Nagkesar Churn Ka Sevan
  11. हिचकी आने पर नागकेसर चूर्ण का उपयोग Hiccup AAne Per Nagkesar Churn Ka Upyog
  12. मासिक धर्म के कष्ट होने पर नागकेसर का सेवन करे Masik Dharm Ke Kasth Hone Per Nagkesar Ka Sevan

नागकेसर के  विभिन्न भाषाओं में नाम Nagkesar Ke Vibhinn Bhasao Me Name

  •  संस्कृत (Nagkesar In Sansrit) – नागकेसर।
  •  हिंदी (Nagkesar In Hindi) – नागकेसर।
  •  मराठी और गुजराती (Nagkesar In Gujarati And Marathi) – पीलू नागकेसर।
  •  बंगाली (Nagkesar In Bangali) – नागेश्वर।
  •  अंग्रेज़ी (Nagkesar In English) – कोबरा सेफ्रॉन (Cobra Saffron)।
  •  लैटिन (Nagkesar In Latin) – मेसुआ फेरिया (Mesua Ferrea) |

नागकेसर के गुण Nagkesar Ke Gunnagkesar ke gun

आयुर्वेदिक मतानुसार नागकेसर रस में तिक्त, कषाय, गुण में लघु, विपाक में कटु, तासीर में गर्म, कफ पित्तनाशक, श्वास केंद्र उत्तेजक होता है। यह खूनी बवासीर, रक्तप्रदार, रक्ततिसार,अग्निमांध, अजीर्ण, वमन, प्रवाहिका, कृमि रोग, तृष्णा, उन्माद , खांसी, श्वास, ह्रदय दुर्बलता, मस्तिष्क दुर्बलता,रक्त विकार, नपुंसकता, संधिवात, ज्वर, श्वेत प्रदर, बांझपन, गर्भपात में गुणकारी है।

यूनानी चिकित्सा पद्धति के अनुसार नागकेसर तीसरे दर्जे का गर्म और खुश्क होता है। यह पसीने की दुर्गन्ध दूर करने, विष विकारों को नष्ट करने, कामोत्तेजना बढ़ाने में भी सक्षम औषधि है। इसके सेवन से पित्त की कमजोरी, सूखी-गीली खुजली, कुष्ठ के विकार दूर होते हैं।

वैज्ञानिक मतानुसार नागकेशर की रासायनिक संरचना का विश्लेषण करने पर ज्ञात होता है कि इसमें दो तिक्त पदार्थ व एक पीला रंजक द्रव्य पाया जाता है। पुष्पों से एक लाल भूरे रंग का सुगंधित तेल मिलता है। कच्चे फलों से एक तैलीय राल मिलता है, जिसमें एक पीला सुगंधित उड़नशील तेल होता है। बीजमज्जा से भूरे रंग का गाढ़ा स्थिर तेल 60 से 77 प्रतिशत तक मिलता है, जिसमें लैक्टोन और फेनोलिक द्रव्य पाया जाता है। इसके तेल का किडनी, मूत्राशय, जननेन्द्रिय की श्लेष्म कला पर उत्तम प्रभाव पड़ता है। वातरोगों में इस तेल की मालिश प्रभावकारी होती है।

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नागकेसर के विभिन्न रोगों में प्रयोग Nagkesar Ke Vibhinn Rogo Me Prayog

1. बवासीर के लिए नागकेसर का सेवन Bavaseer Ke Liye Nagkesar Ka Sevan :

नागकेसर पीसकर बने चूर्ण को मक्खन में फेंटकर मस्सों पर सुबह शौच के बाद लगाएं। खूनी बवासीर में नागकेसर के पुष्प का चूर्ण और मिस्री समभाग मिलाकर बनाए चूर्ण की एक चम्मच मात्रा आधा कप दही के साथ दिन में 3 बार सेवन कराएं।

2. पैरों के तलवों की जलन के लिए लगाये नागकेसर का लेप Taluwo Ki Jalan Ke Liye Lagaye Nagkesar Ka Lep :

नागकेसर के फूल इस रोग के इलाज में लाभकारी होते हैं | यदि किसी के तलुवो में जलन की समस्या है तो उसे ठीक किया जा सकता है | इसके लिए आप नागकेसर के फूलों के चूर्ण को घी में अच्छी तरह फेंटकर बनाया गया लेप दिन में 3 बार तलवों पर मलकर लगाएं।

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3. जोड़ों के दर्द में नागकेसर चूर्ण का सेवन  Jodo Ke Dard Me Nagkesar Churn Ka Sevan :

नागकेसर का प्रोयोग आयुर्वेद के अनुसार हड्डी रोगों में किया जाता है | यह हड्डियों को मजबूत बनाता है और यदि पहले से हड्डियाँ कमजोर हैं तो उन्हें भी फायदा पहुंचता है | इसके लिए आप नागकेसर के बीजों का तेल लें और इस तेल से पीड़ित जोड़ पर सुबह-शाम मालिश करें | कुछ दिनों में इसमें फायदा नज़र आना शुरू हो जाता है |

4. श्वेत प्रदर में नागकेसर से लाभ Swate Prader Me Nagkesar Se Labh :

पुष्प चूर्ण एक चम्मच की मात्रा में एक कप छाछ के साथ दिन में 2 बार नियमित रूप से कुछ दिन सेवन करने से रोग में लाभ होगा।

5. नपुंसकता में नागकेसर Napusangta Me Nagkesar :

नागकेसर का तेल कई प्रकार के रोगों में लाभकारी होता है | इसका तेल पुरुषों के शिश्न के लियी लाभकारी होता है | यदि किसी को नपुंसकता की शिकायत है तो वे इसे इस्तेमाल में ला सकते हैं | इसके लिए नागकेसर के तेल की सुबह-शाम शिश्न पर नियमित मालिश करें। ऐसा करते रहने से 15-20 दिनों में लाभ मिलेगा |

6. नाक, पेशाब में खून आना के लिए नागकेसर का सेवन Naak, Pesaab Me Blood Ke Liye Nagkesar Ka Sevan :

सिंघाड़े और नागकेसर के पुष्प का चूर्ण समभाग पीसकर एक चम्मच की मात्रा में 3 बार खिलाने से खून आना बंद होगा।

7. पसीने की अधिकता होने पर नागकेसर से ईलाज Pasine Ki Adhikta Hone Pr Nagkesar Se Ilaaj :

पुष्पों का लेप पीड़ित अंगों पर लगाएं। लेप कम से कम दिन में 3 से 4 बार लगा सकते हो , और जल्द ही पसीने के रोग से छुटकारा मिल जाएगा |

8. अतिसार, प्रवाहिका में नागकेसर से लाभ Atisaar, Pravahika Me Nagkesar Se Labh

नागकेसर के अन्य लाभों में यह भी एक है | यदि किसी को इस प्रकार की शिकायत है तो वे नागकेसर के पुष्पों का चूर्ण बना लें और एक चम्मच की मात्रा में घी के साथ सेवन करें तो रोग में लाभ मिलता है।

9. गर्भपात में नागकेसर के सेवन से लाभ  Grabhpaat Me NaagKesar Ke Sevan Se Labh :

तीसरे से पांचवें माह में गर्भपात की आशंका हो, तो नागकेसर के पुष्प, वंशलोचन और मिस्री समभाग लेकर बनाया गया चूर्ण एक चम्मच की मात्रा में सुबह-शाम कुछ दिन नियमित सेवन कराएं।

10. रक्तपित में नागकेसर चूर्ण का सेवन Raktpith Me Nagkesar Churn Ka Sevan :

दूब के एक चम्मच रस में इतनी ही मात्रा में नागकेसर के पुष्प का चूर्ण मिलाकर सुबह-शाम सेवन करने से रोग में लाभ होगा।

11. हिचकी आने पर नागकेसर चूर्ण का उपयोग Hiccup AAne Per Nagkesar Churn Ka Upyog :

एक कप गन्ने के रस के साथ नागकेसर के पुष्प का एक चम्मच चूर्ण सेवन करने से हिचकियाँ आनी बंद हो जायेगी |

12. मासिक धर्म के कष्ट होने पर नागकेसर का सेवन करे Masik Dharm Ke Kasth Hone Per Nagkesar Ka Sevan :

नागकेसर के पुष्प का चूर्ण और मिस्री समभाग मिलाकर एक चम्मच की मात्रा में पानी से सुबह-शाम नियमित सेवन करने से मासिक धर्म आने से पूर्व कमर, पेडू की पीड़ा के अनेक कष्ट दूर होकर मासिक धर्म समय पर आने लगेगा।

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