खूनी बवासीर के 7 घरेलू उपचार Khooni Bawasir Ka Desi Ilaj In Hindi

Khooni Bawasir Ka Desi Ilaj In Hindi

खूनी बवासीर का घरेलू उपचार Khooni Bawasir Ka Desi Ilaj In Hindi – बवासीर एक ऐसा मर्ज है जो ज्यादातर कब्ज होने से होता है | पहले यह बीमारी बहुत काम लोगो में पायी जाती थी लेकिन आजकल यह बीमारी ज्यादा हो गयी है | इसका कारण आजकल की लाइफस्टाइल है जिसमें जंक फूड का सेवन लोग ज्यादा करने लगे है और उनको कब्ज भी होने लगा है |

बवासीर में गूदा के बाहर और अन्दर मस्से हो जाते है | यदि बवासीर में यदि मल के साथ खून भी गिरता हो तो उसे खूनी बवासीर कहा जाता है। खूनी बवासीर काफी घटक होती है इसलिए इसका इलाज जल्द कराना जरूरी होता है |

खूनी बवासीर का घरेलू उपचार Khooni Bawasir Ka Desi Ilaj

1. नीबू के दूध का सेवन – गर्म दूध में नीबू का रस निचोड़कर तुरंत पी जाएं, इससे खूनी बवासीर में लाभ होगा। आप इसे दिन में दो बार कर सकते है | 20-30 दिनों में आपको फायदा नज़र आयेगा |

2. आंवला का प्रयोग करें – सूखे आंवले को बारीक पीसकर एक चम्मच दूध या छाछ के साथ सुबह-शाम दो बार लेने से खूनी बवासीर ठीक हो जाता है।

3. अनार का छिलका – मीठे अनार का छिलका छांव में सुखाकर पीस लें। दो-दो ग्राम चूर्ण दिन में तीन बार ताजा पानी के साथ लेते रहने से 10 दिनों में ही खूनी बवासीर पूर्णत: मिट जाता है। सुबह-शाम ताजा पानी से अनार के चूर्ण की आठ ग्राम की फंकी लेने से काफी राहत मिलती है।

4. पका पपीता खाएं – खूनी बवासीर में पका हुआ पपीता खाना लाभप्रद है । आप नियम बना लें कि दिन 2-3 बार 500 ग्राम पका पपीता खायें | इससे आप 15 दिनों में फायदा महसूस करेगे |

5. अंजीर का रेगुलर सेवन करें – कुल 20 अंजीर का सेवन बवासीर ठीक कर सकता है। इसके लिए दो-दो अंजीर सुबह-शाम पानी में भिगोकर खाइए। सुबह भिगोई गई अंजीर शाम को खाइए और शाम को भिगोई गई अंजीर अगली सुबह सेवन कीजिए। पांच दिनों तक यह उपचार अपनाने से चमत्कारी लाभ होता है।

6. नारियल की जटा – नारियल की जटा जलाकर पीसकर बूरा मिलाकर 10-10 ग्राम की फंकी पानी के साथ लेने से काफी लाभ होता है।

7. बेल की जड़ – बेल की जड़ को पीसकर बराबर मात्रा में मिश्री मिलाकर चूर्ण बना लें। दो से लेकर पांच ग्राम तक ताजा पानी से खा लें। एक खुराक का असर तीन घंटे तक देखें। उसके बाद दूसरी खुराक लें। यह एक अनुभूत नुस्खा है, जो बवासीर से रक्त जाना कुछ ही घंटों में दूर कर देता है। यदि बेल की जड़ न मिले तो कच्चे बेल के गूदे में सौंफ और सोंठ कूट- मिलाकर काढ़ा बनाकर पीएं तुरंत लाभ होगा।

क्या खाएं और क्या नहीं : बवासीर के रोगियों को रेशेदार पदार्थों से युक्त आहार लेना चाहिए। आहार में रेशेदार पदार्थों की मात्रा तब तक धीरे-धीरे बढ़ाते रहनी चाहिए, जब तक मल नरम व मलत्याग कष्टरहित न हो जाए। बवासीर में चिकने, मिर्च-मसालेदार खाद्य पदार्थों के सेवन से परहेज करना चाहिए।

1 Comment

  1. Hydroxy ke operation ke baad andkosh mein khujali hoti hai aur chipchipa sa pani pasine ki tarah nikalta hai kya kare bataye

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